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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

देवदूत प्रार्थना : प्यार शांति के रास्ते खोलता है, दूसरों का गला नहीं घोंटता

ईश्वर की माँ मरियम के पर्व दिवस पर देवदूत प्रार्थना में, पोप फ्राँसिस ने याद दिलाया कि प्यार को दयालुता और सम्मान से भरा होना चाहिए, कभी भी उन लोगों पर हावी होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए जिन्हें हम प्यार करते हैं।

वाटिकन न्यूज

वाटिकन सिटी, सोमवार, 1 जनवरी 2024 (रेई) : ईश माता मरियम के महापर्व एवं 57वें विश्व शांति दिवस के उपलक्ष्य में 1 जनवरी को, संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में उपस्थित विश्वासियों के साथ संत पापा फ्राँसिस ने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया। उन्होंने देवदूत प्रार्थना के पूर्व विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, “आज के इस दिन में जब हम ईश्वर की सबसे पवित्र माँ मरियम का महापर्व मना रहे हैं, आइए, हम उनकी चिंतनशील नजर के नीचे इस नए समय को रखें, जिसे हमें दिया गया है।”

आज सुसमाचार पाठ हमें बताता है कि मरियम की महानता कुछ असाधारण कार्य सम्पन्न करने में नहीं है; बल्कि, जब चरवाहे, स्वर्गदूतों से संदेश पाकर, बेथलहम की ओर दौड़ते हैं (लूका 2:15-16 देखें), मरियम चुप रहती हैं। (लूक. 2,15-16)

मौन का महागिरजाघर

संत पापा ने कहा, “माँ की चुप्पी एक सुंदर विशेषता है। यह शब्दों की साधारण अनुपस्थिति नहीं है, बल्कि ईश्वर जो चमत्कार कर रहे हैं, उसके लिए आश्चर्य और आराधना से भरा मौन है।” संत लूकस लिखते हैं, “मरियम ने इन सब बातों को अपने हृदय में संचित रखा और वह इन पर विचार करती रही।”  (2,19) इस तरह वे अपने भीतर मौन और आराधना में, उस व्यक्ति के लिए जगह बनाती हैं जो पैदा हुआ; वे येसु को केंद्र में रखती हैं तथा उन्हें उद्धारकर्ता के रूप में गवाही देती हैं। इस प्रकार वे एक माँ हैं, न केवल इसलिए कि उन्होंने येसु को अपने गर्भ में धारण किया और उसे जन्म दिया, बल्कि इसलिए कि वे उनके स्थान को लिये बिना, उन्हें उजागर करती हैं। वे क्रूस के नीचे, सबसे अंधकारमय समय में भी चुप रहेंगी, और अपने लिए जगह बनाना और हमारे लिए भी जगह बनाना जारी रखेगा। बीसवीं सदी के एक धार्मिक व्यक्ति और कवि ने लिखा: "कुँवारी, मौन का महागिरजाघर / […] आप हमारे शरीर को स्वर्ग लेते / और ईश्वर को शरीर में लाते हैं।" (डी.एम. टुरोल्डो, लॉडारियो अल्ला वेर्गिन, विया पुलक्रिटुडिनिस», बोलोग्ना 1980, 35)।

संत पापा ने कहा, “मौन का महागिरजाघर : एक सुन्दर छवि है। अपनी चुप्पी और विनम्रता के साथ, मरियम ईश्वर की पहली "महागिरजाघर" हैं, वह स्थान जहां वे (ईश्वर) और मनुष्य मिल सकते हैं।”

लेकिन संत पापा ने आगे कहा,  “हमारी माताएँ भी, अपनी छिपी हुई देखभाल और अपनी चिंता के साथ, अक्सर मौन की भव्य मूर्ति होती हैं। वे हमें दुनिया में लाती और हमपर अपनी निगाहें बनाये रखती हैं जिसपर अक्सर कोई ध्यान नहीं देता, पर वे ऐसा करती हैं ताकि हम बढ़ सकें। आइए हम इसे याद रखें: प्यार कभी दम नहीं तोड़ता, प्यार दूसरे के लिए जगह बनाता और बढ़ाता है।”

जीवनदायी प्रेम

नये साल में जब ईश माता मरियम का त्योहार मनाया जाता है संत पापा ने कहा, “ भाइयो एवं बहनो, नये साल की शुरूआत में हम माता मरियम की ओर देखें और कृतज्ञतापूर्ण हृदय से हम माताओं की भी याद करते एवं उनकी ओर देखते हैं ताकि हम उनसे सीख सकें कि प्रेम को सबसे बढ़कर मौन में सिखा जा सकता है जो दूसरों के लिए स्थान बनाना, अपनी गरिमा का सम्मान करना, स्वयं को व्यक्त करने की आजादी देना, हर प्रकार के कब्जे, उत्पीड़न और हिंसा को अस्वीकार करना जानती हैं। आज इसकी बड़ी आवश्यकता है! जैसा कि आज के विश्व शांति दिवस के संदेश में याद दिलाया गया है: "स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व तब खतरे में पड़ जाता है जब मनुष्य स्वार्थ, व्यक्तिगत हित, लाभ की इच्छा और सत्ता की प्यास के प्रलोभन में पड़ जाता है।" दूसरी ओर, प्यार, सम्मान और दयालुता से बना है: इस तरह यह बाधाओं को तोड़ता है और भाईचारे के रिश्ते को जीने, अधिक न्यायपूर्ण और मानवीय, अधिक शांतिपूर्ण समाज बनाने में मदद करता है।

तब संत पापा ने माता मरियम से प्रार्थना करते हुए कहा, “आइये हम ईश्वर की माँ एवं हमारी माँ से प्रार्थना करें, ताकि नए साल में हम इस सौम्य, मौन और विवेकशील प्रेम में बढ़ सकें जो जीवन उत्पन्न करता है, और दुनिया में शांति और मेल-मिलाप के रास्ते खोल देता है।”

इतना कहने के बाद संत पापा ने भक्त समुदाय के साथ देवदूतप्रार्थना का पाठ किया तथा सभी को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

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01 January 2024, 15:50

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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