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रोम के कोलोसेयुम में क्रूस रास्ता रोम के कोलोसेयुम में क्रूस रास्ता  (Vatican Media)

क्रूस रास्ता ˸ परिवारों के युद्ध में खोने और तबाही का दर्द

वाटिकन ने रोम के ऐतिहासिक स्थल कोलोसेयुम में पुण्य शुक्रवार के क्रूस रास्ता के लिए चिंतन प्रकाशित किया, जिसमें 15 परिवारों ने युद्ध की तबाही और जीवन की पीड़ा के प्रति अपना दष्टिकोण साझा किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

शिकायतें, अनिश्चितताएँ, आवश्यकताएँ, घाव, लेकिन साहस, क्षमाशीलता, प्रार्थना और उम्मीदें भी। ये विषयवस्तु विश्व के सभी परिवारों के जीवन से संबंधित हैं जो पुण्य शुक्रवार के क्रूस रास्ता में चिंतन के आधार हैं जिसका संचालन संत पापा फ्राँसिस रोम के कोलोसेयुम में करेंगे।  

ये 15 परिवार, काथलिक स्वयंसेवक संघ एवं समुदायों से जुड़े हैं जिन्होंने चिंतन लिखा है चूँकि इस साल को संत पापा फ्राँसिस के प्रेरितिक प्रबोधन अमोरिस लेतित्सिया की प्रकाशना की पाँचवीं वर्षगाँठ मनाने हेतु परिवार वर्ष घोषित किया गया है।  

पारिवारिक जीवन में उतार-चढ़ाव

चिंतन के क्रम में कुछ भाग में पारिवारिक जीवन के उतार-चढ़ाव को दर्शाया गया है जो युवा दम्पति की आर्थिक परेशानी से लेकर माता-पिता बनने की समस्या एवं असाधारण परिस्थितियों, जैसे- युद्ध में खोने के दर्द आदि के साथ आगे बढ़ता है।  

एक युवा दम्पति अपनी कठिनाइयों पर चिंतन करते हुए क्रूस रास्ता की शुरुआत करता है, जिसमें उनके, अपने मित्रों को देखने, विवाह की असफलता, दृढ़ प्रेम संबंध और लक्ष्य प्राप्ति हेतु संघर्ष शामिल हैं। वे कहते हैं, "विवाह सिर्फ एक रोमांचक घटना नहीं है, यह गेतसेमनी बारी भी है, जहाँ एक-दूसरे के लिए शरीर को तोड़े जाने का भी एहसास होता है।"

एक मिशनरी परिवार ने दिव्य करुणा पर भरोसा की मुश्किलता साझा किया है। जब वे युद्ध की भयावहता देखते हैं तो उन्हें भी हिंसा का जवाब हिंसा से देने की इच्छा होती है। किन्तु वे हर रोज ख्रीस्त के साथ उनके भाई-बहनों से विश्वासघात नहीं करने के प्रलोभन से बचने के लिए संघर्ष करते हैं।

बच्चों के साथ और बिना बच्चों के प्रेम

एक बुजूर्ग दम्पति जो निःसंतान है, तीसरे स्थान के चिंतन में वे बतलाते हैं कि किस तरह उन्होंने कई बार दूसरों के तिरस्कार का सामना करना पड़ा है जो उनके बांझपन के लिए उनका न्याय करते हैं। वे कहते हैं कि प्रेम उनके परिवार को भर देता है जब वे एक-दूसरे का हाथ थामकर चलते हैं।  

एक परिवार जिसमें कई बच्चे हैं अपना विपरीत अनुभव साझा करता है। वे गौर करते हैं कि व्यक्तिगत परियोजनाएं और करियर के लक्ष्य अक्सर पारिवारिक कर्तव्यों का मार्ग प्रशस्त करते हैं, भले ही उन्हें मना न किया गया हो। वे कहते हैं, "हमारी चिंताओं एवं दिनभर की व्यस्तता के बावजूद हम वापस चले जाना नहीं चाहते हैं।"  

न्याय और बीमारी

एक अन्य दम्पति जिसका बेटा विकलांग है, उसका न्याय लोग उसके जन्म से पहले से कर रहे हैं। डॉक्टर कह रहे थे कि वह उनके और समाज के लिए भार के समान होगा। उसे क्रूस पर चढ़ाने की बात कही जा रही थी, यद्यपि उसने कुछ गलती नहीं की है। इस तरह उन्होंने जीवन को चुना।   

एक परिवार जिसने अपने घर को बहुतों का घर बनाया है बतलाते हैं कि दर्द में बदलने की शक्ति होती है और मानव प्रतिष्ठा की सरलता की याद दिलाती है।

एक व्यक्ति जिसकी पत्नी एक गंभीर बीमारी से पीड़ित है, 7वें स्थान के लिए चिंतन प्रस्तुत करते हैं। वे कहते हैं, अनापेक्षित बीमारी ने उसे और उसकी पत्नी को क्रूस पर चढ़ा दिया है किन्तु यह उनके परिवार के लिए एक आधार बन गया है।

असफलता, परित्याग, खोना

दादा-दादी अपनी परिस्थितियों की तुलना, विवाह में असफल अपनी बेटी और पाँच पोते पोतियों के साथ करते हैं जो उनके साथ रह रहे हैं। सिरिनी सिमोन ने येसु को क्रूस ढोने में मदद दिया, "हमारे कदम लड़खड़ा जाते हैं और रात में हंसी के बाद, हम अपने को सहानुभूति में रोते हुए पाते हैं।"

एक दम्पति जिसने दो बच्चों को गोद लिया है कहती है कि यह बच्चों को त्याग दिये जाने का परिणाम है। यह स्थिति घाव छोड़ जाती है जिससे हमेशा खून बहता है। "पर यह क्रूस यदि पीड़ादायक है तो यह खुशी के रहस्य को छिपा देता है।"

दो बच्चों के साथ एक विधवा माँ ने 10वें स्थान पर अपना दर्द साझा किया है। वे दुःखी होकर कहती हैं, येसु यदि ईश्वर के बेटे हैं तो उन्होंने क्यों मेरे पति को नहीं बचाया। हालांकि वे यह भी स्वीकार करती हैं कि उनका "प्रेम सच्चा है क्योंकि हमारी खाई और बेचैनी में भी हम त्याग नहीं दिये जाते।"

दो माता-पिता जिनके बेटे ने समर्पित जीवन अपनाया है, बतलाते हैं कि उन्हें अपने बेटे की बुलाहट को स्वीकार करने में कितनी कठिनाई हुई। वे स्वीकार करते हैं कि उन्होंने उसे अपने निर्णय पर छोड़ दिया था। यद्यपि उनका मनोभाव बदला है, वे अब भी येसु से याचना करते हैं कि जब वे अपने राज्य में होंगे तो उन्हें भी याद करें।

क्रूस पर अपने बेटे येसु को देखती मरियम के समान एक अन्य माता अपनी जवान बेटी और अपने पति की मत्यु पर चुपचाप खड़ी रही। वह अपने परिवार के बदलाव के दुःख को साझा करती है तथा उन शब्दों को याद करती है जो उन्हें शक्ति और दिलासा देते हैं, "ईश्वर उन्हें नहीं बुलाते जो मजबूत हैं बल्कि वे उन्हें मजबूत बनाते हैं जिन्हें वे बुलाते।"

युद्ध का विनाश

13वें स्थान के चिंतन को उन दो परिवारों ने प्रस्तुत किया है जिनका वर्तमान राजनीतिक दृष्टिकोण से कोई लेना-देना नहीं है: एक यूक्रेन से है और दूसरा रूस से।

दोनों ने मिलकर मौत और विनाश के दुःख के बारे लिखा है – कैसे जीवन अर्थहीन प्रतीत हो रहा है और घृणा ने निराशा एवं चुप्पी को रास्ता दिया है। उस स्थान के लिए वे दोनों एक साथ ख्रीस्त का क्रूस ढोते हैं जो उनकी मत्यु का प्रतीक है।

वे कहते हैं, "हम सुबह जागते और क्षणभर के लिए खुश होते हैं किन्तु तुरन्त याद करते हैं कि हमें इन सब से खुद का मेल-मिलाप करना कितना कठिन होगा। प्रभु आप कहाँ हैं? मौत और विभाजन के बीच हमसे बातें कर और हमें शांति-निर्माता, भाई-बहन और उन सबका पुनःनिर्माण करना सिखा, जिसको बम द्वारा नष्ट कर दिया गया है।  

दिन के प्रकाश देखने हेतु अप्रवासियों की आशा

क्रूस रास्ते के 14वें और अंतिम स्थान का चिंतन एक ऐसे परिवार से आता है जो युद्ध के कारण आप्रवासी बन गया है।

घर में वे महत्वपूर्ण थे, अब वे केवल संख्या और क्षेणी रह गये हैं। यहां तक कि काथलिक होने के कारण उन्हें आप्रवासी होने के बाद दूसरा स्थान प्राप्त हो रहा है, अतः वे हर दिन मरते हैं ताकि उनके बच्चों को बम, रक्त और उत्पीड़न से रहित जीवन जीने का मौका मिले।

"यदि हम नहीं छोड़ते हैं, तो यह इसलिए क्योंकि हम जानते हैं कि कब्र के द्वार पर लगे बड़े पत्थर को एक दिन अवश्य हटाया जाएगा।"

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14 April 2022, 10:48