माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी
रोम, शनिवार, 20 अप्रैल 2019 (वाटिकन न्यूज) : संत पापा फ्राँसिस ने पवित्र शुक्रवार को हजारों शहीदों की यादगारी में रोम के कोलोसेयुम में किये जाने वाले पारंपरिक क्रूस रास्ता की प्रार्थना की अगुवाई की। क्रूस रास्ता के समापन प्रार्थना में संत पापा ने बच्चों, बुजुर्गों, गरीबों, परिवारों, प्रवासियों, अन्य लोगों और हमारी पृथ्वी को याद करते हुए प्रार्थना की कि हम मसीह के क्रूस में वर्तमान दुःखों को देखें और पीड़ितों के लिए प्रार्थना करें।
संत पापा ने प्रार्थना में कहा, “प्रभु येसु, हमें आपके क्रूस में दुनिया के सभी क्रूस को देखने में हमारी मदद कीजिएः रोटी और प्यार के भूखों का क्रूस,
उन लोगों का क्रूस जो अकेले हैं या अपने बच्चों और परिवार के सदस्यों द्वारा छोड़ दिए गए हैं,
न्याय और शांति की खोज करने वालों का क्रूस,
उन लोगों का क्रूस जिनके पास विश्वास को प्रकट करने की सुविधा नहीं है,
बुढ़ापे और अकेलेपन के बोझ से दबे हुए बुजुर्गों का क्रूस,
उन प्रवासियों का क्रूस जो उनके भय से अपने देश में प्रवेश न करने देने के लिए अपने दरवाजे बंद कर देते हैं,
उन बच्चों का क्रूस, जो अपनी मासूमियत और पवित्रता में घायल हुए हैं,
अनिश्चितता के अंधेरे और क्षणभंगुरता की संस्कृति के अंधेरे में भटकने वाली मानवता का क्रूस,
स्वार्थ, बुराई के बहकावे और विश्वासघात से टूटे परिवारों का क्रूस,
आपको समर्पित लोगों का क्रूस जो अथक प्रयास कर आपके प्रकाश को दुनिया में लाना चाहते हैं, पर अस्वीकृत और अपमानित होते हैं,
उन धर्मसंघियों का क्रूस, जो जीवन की राह में, अपने पहले प्यार को भूल गए हैं,
आपके बच्चों का क्रूस, जो आप पर विश्वास करते हैं और आपके शब्द के अनुसार जीने की कोशिश करते हैं, खुद को अकेला पाते हैं और अपने परिवार और अपने साथियों द्वारा भी त्याग दिये जाते हैं,
हमारी कमजोरियों, हमारे पाखंडों, हमारे विश्वासघात, हमारे पापों और हमारे कई टूटे वादों का क्रूस,
आपकी कलीसिया का क्रूस, जो आपके सुसमाचार के प्रति वफादार है और आपके प्रेम को बपतिस्मा प्राप्त लोगों के बीच भी ले जाने हेतु संघर्ष करती है,
आपकी दुल्हन, कलीसिया का क्रूस, जो लगातार भीतर और बाहर से हमले का अनुभव करती है,
हमारे आमघर का क्रूस जिसे स्वार्थी लोगों के लालच और शक्ति से सामने दुःख झेलता पड़ता है,
प्रभु येसु, हममें पुनरुत्थान की आशा और हमारी बुराई एवं मृत्यु के खिलाफ आपकी निश्चित जीत की आशा जगा। आमेन!”
