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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (Vatican Media)

देवदूत प्रार्थना: सेवा के जीवन से येसु का साक्ष्य दें

संत पापा फ्रांँसिस ने रविवार 21 मार्च को वाटिकन के प्रेरितिक आवास की लाईब्रेरी से देवदूत प्रार्थना का पाठ किया, जहाँ से विश्वासियों को सम्बोधित करते हुए उन्होंने चालीसा काल के पाँचवें रविवार के सुसमाचार पाठ पर चिंतन किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, रविवार, 21 मार्च 2021 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने रविवार 21 मार्च को वाटिकन के प्रेरितिक आवास की लाईब्रेरी से लाईव प्रसारण के माध्यम से देवदूत प्रार्थना का पाठ किया जिसके पूर्व उन्होंने विश्वासियों को सम्बोधित कर कहा, अति प्रिय भाइयो एवं बहनो, सुप्रभात।

चालीसाकाल के इस पाँचवें रविवार की धर्मविधि उस सुसमाचार पाठ की घोषणा करता है, जिसमें संत योहन ख्रीस्त के जीवन के अंतिम दिनों, ठीक दुःखभोग के पहले की घटना को प्रस्तुत करता है। (यो.12,20-33)   

जब येसु पास्का पर्व मनाने येरूसालेम गये हुए थे, कुछ यूनानी, उनके कार्यों के प्रति जिज्ञासा के कारण उन्हें देखना चाहते थे। उन्होंने प्रेरित फिलिप के पास आकर निवेदन किया, "महाशय, हम ईसा से मिलना चाहते हैं।" (पद. 21) संत पापा ने कहा, "येसु को देखना चाहते हैं, इस अभिलाषा को हम याद रखें : येसु को देखना चाहते हैं।"

क्रूस, ख्रीस्तियों का सर्वश्रेष्ठ प्रतीक

फिलिप ने अंद्रेया से बात की और दोनों ने मिलकर गुरूजी को इसकी सूचना दी। इन यूनानियों के निवेदन में हम हर स्थान और हर युग के सभी स्त्रियों एवं पुरूषों के निवेदन में कलीसिया और हम प्रत्येकजन के आग्रह को देख सकते हैं कि हम "येसु को देखना चाहते हैं।" और उस आग्रह का येसु किस तरह जवाब देते हैं? यह तरीका सोचने के लिए प्रेरित करता है। वे कहते हैं, "वह समय आ गया है जब मानव पुत्र महिमान्वित किया जाएगा [...] जब तक गेहूँ का दाना मिट्टी में गिरकर मर नहीं जाता, तब तक वह अकेला ही रहता है; परन्तु यदि वह मर जाता है, तो बहुत फल देता है।" (पद. 23-24) ये शब्द यूनानी लोगों द्वारा किये गये आग्रह के जवाब के समान नहीं लगते हैं। वास्तव में, वे और आगे जाते हैं। येसु प्रकट करते हैं कि वे, हर व्यक्ति जो उन्हें ढूँढ़ना चाहता है, उसके लिए एक छिपे बीज हैं, जो मरने के लिए तैयार हैं ताकि प्रचुर फल ला सकें। यह ऐसा कहने के समान है, यदि आपलोग मुझे जानना चाहते हैं, यदि हमें समझना चाहते हैं तो गेहूँ के दानों को देखें जो भूमि में मर जाता है अर्थात् क्रूस पर देखें।

मन में क्रूस का चिन्ह उभरता है जो सदियों से ख्रीस्तियों का सर्वश्रेष्ठ चिन्ह बना हुआ है। आज भी, जो येसु को देखना चाहते हैं, शायद वे उन देशों एवं संस्कृतियों से हों जहाँ ख्रीस्तीय धर्म को कम लोग जानते हैं। वहाँ कौन सी चीज है जिसको वे सबसे पहले देखते हैं? कौन सा चिन्ह है जिसको आमतौर पर जाना जाता है? क्रूस। गिरजाघरों, ख्रीस्तियों के घरों और अपने शरीर में भी इसे धारण किया जाता है। महत्वपूर्ण बात ये है कि चिन्ह सुसमाचार के अनुकूल हो : तभी केवल यह सचमुच "जीवन का वृक्ष", प्रचुर जीवन देने वाला हो सकता है।

येसु को जानना

संत पापा ने कहा, "आज भी कई लोग, अक्सर बिना कहे, अप्रत्यक्ष रूप में "येसु को देखना" चाहते हैं, उनसे मुलाकात करना, उन्हें जानना चाहते हैं। इसी से हम समझ सकते हैं कि हम ख्रीस्तियों की, हमारे समुदायों में कितनी बड़ी जिम्मेदारी है। हमें भी सेवा में अर्पित जीवन के साक्ष्य से जवाब देना है, एक ऐसे जीवन से जो अपने में ईश्वर के तरीके – सामीप्य, करुणा और कोमलता को अपनाता और उसे सेवा में अर्पित करता है। इसका अर्थ है प्रेम का बीज बोना, न केवल शब्दों से बल्कि ठोस, सरल एवं साहसी उदाहरणों से। संत पापा ने कहा, "सैद्धांतिक प्रतिबद्धता से नहीं बल्कि प्रेम के हावभाव से। तब प्रभु अपनी कृपा से हमें फलप्रद बनायेंगे, ऐसे समय में भी जब भूमि नसमझदारी, कठिनाई एवं अत्याचार के कारण सूख गई हो, अथवा याजकीय कानूनवाद या नैतिकवाद के दावों से भूमि सूख गई हो, खासकर, उस समय जब परीक्षा एवं अकेलापन की घड़ी में जब बीज मर रहा हो, यह वह समय है जब जीवन प्रस्फूटित होता है ताकि उपयुक्त समय में पके फल ला सके। इस मौत और जीवन के बीच हम आनन्द एवं प्रेम के सच्चे उपजाऊपन को महसूस करेंगे, जिसको संत पापा ने कहा कि मैं फिर दुहराता हूँ, वह ईश्वर के तरीकों सामीप्य, सहानुभूति, कोमलता में अपने आपको अर्पित करता है।

कुँवारी मरियम हमें येसु का अनुसरण करने की कृपा दे, सेवा के रास्ते पर दृढ़ता एवं आनन्द से चल सकें, जिससे कि ख्रीस्त का प्रेम हमारे हर मनोभाव में प्रकट हो एवं यह अधिक से अधिक हमारे दैनिक जीवन की शैली बन जाए।

इतना कहने के बाद संत पापा ने देवदूत प्रार्थना का पाठ किया तथा सभी विश्वासियों को अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

21 March 2021, 13:50

दूत-संवाद की प्रार्थना एक ऐसी प्रार्थना है जिसको शरीरधारण के रहस्य की स्मृति में दिन में तीन बार की जाती है : सुबह 6.00 बजे, मध्याह्न एवं संध्या 6.00 बजे, और इस समय देवदूत प्रार्थना की घंटी बजायी जाती है। दूत-संवाद शब्द "प्रभु के दूत ने मरियम को संदेश दिया" से आता है जिसमें तीन छोटे पाठ होते हैं जो प्रभु येसु के शरीरधारण पर प्रकाश डालते हैं और साथ ही साथ तीन प्रणाम मरियम की विन्ती दुहरायी जाती है।

यह प्रार्थना संत पापा द्वारा रविवारों एवं महापर्वों के अवसरों पर संत पेत्रुस महागिरजाघर के प्राँगण में किया जाता है। देवदूत प्रार्थना के पूर्व संत पापा एक छोटा संदेश प्रस्तुत करते हैं जो उस दिन के पाठ पर आधारित होता है, जिसके बाद वे तीर्थयात्रियों का अभिवादन करते हैं। पास्का से लेकर पेंतेकोस्त तक देवदूत प्रार्थना के स्थान पर "स्वर्ग की रानी" प्रार्थना की जाती है जो येसु ख्रीस्त के पुनरूत्थान की यादगारी में की जाने वाली प्रार्थना है। इसके अंत में "पिता और पुत्र और पवित्र आत्मा की महिमा हो..." तीन बार की जाती है।

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