खोज

Vatican News
श्रीनगर के कोविड-19 स्वास्थ्य केंद्र के बेड पर बैठा एक मरीज श्रीनगर के कोविड-19 स्वास्थ्य केंद्र के बेड पर बैठा एक मरीज  (AFP or licensors)

भारत की कलीसिया ने कोविड-19 के कारण 160 पुरोहितों को खो दिया

जब भारत में कोविड -19 संक्रमण की दूसरी लहर जारी है, हर दिन औसतन 4,000 मौतें हो रही हैं, यह वायरस देश के काथलिक पुरोहितों पर भी भारी पड़ रहा है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, मंगलवार, 18 मई 2021 (ऊकान)- पिछले 5 सप्ताहों में कोविड-19 से भारत के करीब 160 काथलिक पुरोहितों की मौत हो चुकी है। कलीसिया द्वारा संचालित इंडियन कर्रेंटस पत्रिका के संपादक कपुचिन फादर सुरेश मैथ्यू ने चिंताजनक सूचना जारी की है जिसके अनुसार हर दिन करीब 4 पुरोहितों की मौत हो रही है। उन्होंने उन धर्मप्रांतीय पुरोहितों एवं धर्मसमाजी पुरोहितों की सूची तैयार की है जिनकी मृत्यु 10 अप्रैल से 17 मई के बीच हुई है।  

इस बीच कलीसिया ने अपने 3 धर्माध्यक्षों को भी खोया है- पांडिचेरी-कुड्डालोर के सेवानिवृत धर्माध्यक्ष अंतोनी अनन्दार्यार, झाबुआ के धर्माध्यक्ष बासिल भुरिया एवं सागर धर्मप्रांत के सिरो मलाबार रीति के सेवानिवृत धर्माध्यक्ष जोसेफ पास्टर निलांकविल।  

160 में से 60 धर्मसमाजी समुदायों के हैं और उनमें सबसे अधिक 24 जेस्विटों की मौत हुई है। फादर मैथ्यू के अनुसार सूची अधूरी है क्योंकि देश के सभी 174 धर्मप्रांतों से महामारी की दूसरी लहर में कई मौतों की सूचना नहीं मिली है।

एक दिन में 4 पुरोहितों की मौत

फादर मैथ्यू ने कहा, "यह प्रारंभिक सूची बहुत खतरनाक है, क्योंकि हमारे पास केवल 30,000 काथलिक पुरोहित हैं और यदि हर दिन 4 की मौत हो जाए, तो यह हम सभी के लिए बहुत चिंता का विषय है।"

मरनेवाले पुरोहितों की सूची में भारत की काथलिक कलीसिया के धर्मसमाजी एवं धर्मप्रांतीय पुरोहित शामिल हैं जिसमें लातीनी रीति और सिरोमलाबार एवं सिरो मलांकरा कलीसिया आते हैं। 

भारत में मध्य अप्रैल से ही हर दिन 3 लाख से अधिक नये मामले प्रतिदिन दर्ज किये जा रहे हैं। अस्पतालों में बेड, ऑक्सिजन एवं दवाओं की कमी के कारण विकट स्थिति है। मरीज अस्पताल के बरमदे और दरवाजे के आसपास जमीन पर पड़े देखे जा सकते हैं जबकि कई लोग एम्बुलेंस में अस्पताल के बाहर चिकित्सा देखभाल के इंतजार में मर रहे हैं।

श्मशान और कब्रिस्तान में भारी संख्या में शवों के ढेर से भर गए हैं। कई शवों को नदी में तैरते हुए देखना और नदी के तट पर बालू में दफनाया गया देखना, अत्यन्त हृदय विदारक है, क्योंकि कई गरीब लोग अपने प्रियजनों के अंतिम संस्कार के लिए खर्च वहन करने में असमर्थ हैं, और उन्हें नदियों में फेंक रहे हैं।

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने सोमवार को 281,386 नए संक्रमणों की सूचना दी, जो 21 अप्रैल के बाद पहली बार 300,000 से नीचे गिर गया। 24 घंटे के अंदर नये मौतों की संख्या 4,106 है। कुल मौतों की संख्या 274,390 बताया गया है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि सरकारी आंकड़े बहुत कम हैं।

समय के साथ सावधानी की कमी

जबलपुर के धर्माध्यक्ष जेराल्ड अलमेइदा ने कहा, "समय पर इलाज के अभाव में कई पुरोहितों की मौत हो रही है। मैं यह जानकर हैरान हूँ कि बहुत सारे पुरोहित मर गये हैं जबकि देश में पुरोहितीय बुलाहट की कमी है।" उन्होंने उन पुरोहितों एवं धर्मबहनों के बीच मृत्यु का बहुत अधिक भय देखा, जिनके समुदाय विश्वासियों और आम जनता के बीच अपनी प्रेरितिक सेवा देते हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि वे अकेले नहीं हैं। "हम उनके साथ हैं।"

क्वारेनटाईन केंद्र

कोविड-19 के कारण अपने एक पुरोहित को खोने के बाद, धर्माध्यक्ष अलमेइदा ने पुरोहितों एवं धर्मबहनों के लिए एक खास क्वारेनटाईन केंद्र की व्यवस्था की है। क्वारेनटाईन केंद्र में इस समय 26 धर्मबहनें एवं 14 पुरोहित चिकित्सा पा रहे हैं जहाँ 4 नर्स ड्यूटी पर हैं और एक डॉक्टर हर दिन मुलाकात करने आते हैं।

सभी पुरोहितों और धर्मबहनों को सलाह दी गई है कि स्वास्थ्य के मामले में हल्के लक्ष्ण होने पर भी वे तुरन्त रिपोर्ट करें। जिनमें कोविड-19 पोजेटिव पाया जाता है उन्हें क्वारेनटाईन केंद्र में रखा जाता है जहाँ बुनियादी चिकित्सा सुविधाएँ और ऑक्सीजन की व्यवस्था की गई हैं।  

धर्माध्यक्ष ने बतलाया, "हम केवल गंभीर रूप से बीमार मरीजों को अस्पताल में भर्ती करते हैं। हम उनके स्वस्थ होने तक उनकी मदद करते हैं। एक धर्मबहन ने केंद्र में रिपोर्ट नहीं किया और वायरस के कारण उसकी मौत हो गई। कई लोग इसलिए मर जाते हैं क्योंकि उन्हें आरम्भिक चिकित्सा ठीक से नहीं मिल पाती है।"   

खराब मानसिक स्वास्थ्य

नाम न छापने की शर्त पर एक वरिष्ठ काथलिक पुरोहित ने उका न्यूज को बतलाया  कि पुरोहितों के बीच खराब मानसिक स्वास्थ्य एक प्रमुख मुद्दा है, "हालांकि उनकी मृत्यु का कारण महामारी से संक्रमण है। ज्यादातर पुरोहित इस तरह की स्थितियों में एकाकीपन से अधिक पीड़ित होते हैं। लॉकडाउन की अवधि के दौरान उनका सार्वजनिक संपर्क प्रतिबंधित है। प्रेरितिक काम के लिए वर्षों के प्रशिक्षण के बावजूद, लोगों से संपर्क नहीं कर पाना कई पुरोहितों के लिए मुश्किल है।" उन्होंने कहा कि कई पुरोहितों ने पुण्य सप्ताह के दौरान अपनी प्रेरिताई के कर्तव्यों को निभाते हुए अपनी जान जोखिम में डाल दी, जब सरकारी प्रतिबंधों में ढील दी गई थी लेकिन तब महामारी फैल रही थी।

18 May 2021, 14:52