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संत पापा फ्राँसिस संत पापा फ्राँसिस   (Vatican Media)

कोविड-19 के खिलाफ संघर्षरत भारत के प्रति पोप फ्राँसिस का सामीप्य

भारत के कोविड-19 पीड़ितों के प्रति संत पापा फ्राँसिस ने अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त किया है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 6 मई 2021 (रेई)- संत पापा फ्राँसिस ने 6 मई को कार्डिनल ऑस्वल्ड ग्रेसियस को एक संदेश भेजकर भारत में कोरोना वायरस से पीड़ित सभी लोगों के प्रति अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त किया है।  

भारत इन दिनों कोविड-19 की दूसरी लहर के चपेट में है जिसमें हर दिन करीब 4 लाख लोग संक्रमित हो रहे हैं और 3 हजार से अधिक लोगों की मौत हो रही है। अस्पतालों में भीड़ के कारण स्वास्थ्य प्रणाली अस्तव्यस्त है।

भारत के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष एवं मुम्बई महाधर्माध्यक्ष को संत पापा ने लिखा, "ऐसे समय में जब वर्तमान स्वास्थ्य संकट के कारण भारत में बहुत सारे लोग पीड़ित हैं, मैं सभी भारतीयों के प्रति अपनी हार्दिक संवेदना एवं अपना आध्यात्मिक सामीप्य व्यक्त करने के लिए लिख रहा हूँ तथा अपनी प्रार्थनाओं का आश्वासन देता हूँ कि ईश्वर चंगाई प्रदान करें और इस भयंकर महामारी से प्रभावित सभी लोगों को सांत्वना दें।"

संत पापा ने अपने संदेश में बीमार लोगों एवं उनके परिवारवालों तथा उनकी देखभाल करनेवालों, खासकर, उन लोगों के प्रति जो अपने प्रियजनों को खोने के कारण शोकित हैं अपनी विशेष संवेदना प्रकट की है।   

संत पापा ने लिखा, "मैं उन डॉक्टरों, नर्सों, अस्पताल में काम करनेवालों, अम्बुलेंस ड्राईवर और उन भाई-बहनों की याद करता हूँ जो लगातार लोगों की आवश्यकताओं को पूरा करने की कोशिश में लगे हैं। उनकी सराहना करते हुए मैं उनपर ईश्वर की धैर्य, शक्ति और शांति के आशीष की कामना करता हूँ।"

संत पापा ने भारत की काथलिक कलीसिया के प्रति भी अपना आभार प्रकट किया है जो सभी लोगों के लिए उदार एवं भ्रातृत्व पूर्ण कार्य कर रहे हैं।

उनहोंने कहा, "मैं उन सभी समर्पित युवाओं की उदारता की विशेष याद करता हूँ। मैं ईश्वर की असीम दया को समर्पित करने हेतु आप लोगों के साथ हूँ जिन्होंने अपना जीवन खो दिया है जिनमें कई पुरोहित एवं धर्मसमाजी पुरूष और स्त्री हैं।"  

अपनी आशीष देते हुए संत पापा ने कहा, "इन दुःख भरे दिनों में हम पास्का की आशा तथा पुनरूत्थान एवं जीवन की प्रतिज्ञा पर दृढ़ विश्वास से सांत्वना प्राप्त करें।"

भारत का संघर्ष

संत पापा का यह संदेश ऐसे समय में आया है जब भारत की काथलिक कलीसिया समेत पूरे देश में कोरोना वायरस का संक्रमण बढ़ता जा रहा है। बृहस्पतिवार को करीब 412,262 नये मामले दर्ज किये गये। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 24 घंटे में 3,980 मौतों की पुष्टि की है और इसके साथ मौतों की कुल संख्या 2,30,168 हो गई है। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि संकमण एवं मौतों की संख्या इससे भी अधिक हो सकती है।  

पिछले महीने से अस्पतालों में ऑक्सीजन की मांग सात गुना बढ़ गई है, जबकि सरकार ने उन खबरों का खंडन किया है, जिसमें कहा गया है कि यह विदेशों में जीवन रक्षक आपूर्ति वितरित करने में धीमी है। अस्पताल के बिस्तरों, दवाओं, टीकों और श्मशान सुविधाओं की भी भारी कमी है, जो देश की नाजुक स्वास्थ्य सेवा प्रणाली को गंभीर रूप से तनाव में डाल रहे हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक साप्ताहिक रिपोर्ट में कहा कि भारत में पिछले सप्ताह दुनिया भर में हुए लगभग आधे कोरोनोवायरस मामलों और एक चौथाई मौतें हुईं। देश में 3.45 मिलियन सक्रिय मामले हैं।

भारत की काथलिक कलीसिया ने अपनी कई सुविधाओं को महामारी के खिलाफ लड़ाई में उपलब्ध कराया है, कोई अपवाद नहीं है। इस वायरस ने पुरोहितों, धर्मसमाजियों और लोकधर्मियों को अपना शिकार बनाया है, जो संकट के बीच, स्कूलों, स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सेवा के कार्यों में लगे हुए थे। गुरुवार को पोप के संदेश आने से पहले, मध्य प्रदेश स्थित झाबुआ के बिशप बासिल भूरिया ने वायरस के कारण दम तोड़ दिया। दक्षिणी भारत के पांडिचेरी-कुड्डालोर के सेवानिवृत्त आर्कबिशप एंटनी आनंदारयार का पिछले दिन निधन हो गया। मैटर्स इंडिया द्वारा पिछले महीने की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि एक महीने के अंतराल में कम से कम 20 पुरोहितों की मृत्यु हो गई थी और कई संक्रमित हैं एवं मर रहे हैं।

06 May 2021, 18:47