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तालिथा कुम तालिथा कुम 

कार्डिनल चरनी : मानव तस्करी पर खुलकर बात करने के लिए 10 साल

कार्डिनल माईकेल चरनी ने एक साक्षात्कार में बतलाया कि कलीसिया ने किस प्रकार मानव तस्करी के शिकार लोगों का प्रत्युत्तर देने में 10 वर्षों के बाद अपनी प्रेरिताई का विकास किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बृहस्पतिवार, 30 जुलाई (वीएन)- 30 जुलाई को मानव तस्करी के खिलाफ विश्व दिवस मनाया जाता है। इस साल की विषयवस्तु पहली बार इसका प्रत्युत्तर देनेवालों पर अपना प्रकाश डालता है।

समग्र मानव विकास को प्रोत्साहन देने हेतु गठित परमधर्मपीठीय परिषद के विस्थापित एवं शरणार्थी विभाग के उप-सचिव कार्डिनल माईकेल चरनी ने विश्व दिवस के बारे वाटिकन रेडियो से बातें कीं। उन्होंने काथलिक कलीसिया में पहली बार मानव तस्करी के शिकार लोगों को प्रत्युत्तर देनेवालों के बारे बतलाया और अपराध की व्यापकता पर प्रकाश डाला।

कलीसिया द्वारा तस्करी का पहला जवाब

कार्डिनल चरनी ने कहा कि महिला धर्मसमाजी न केवल कलीसिया में मानव तस्करी का जवाब देनेवाले पहले व्यक्ति हैं बल्कि दूसरे, तीसरे, चौथे और पाँचवे जवाब देने वाले भी वे ही हैं। विश्वभर में महिला धर्मसमाजियों ने मानव तस्करी के शिकार लोगों को खोजा, खुलासा किया और उनके लिए एक प्रेरिताई विकसित की। आज वे मानव तस्करी को दूर करने, उससे बचाव, पुनर्वास, एकीकरण और जागरूकता बढ़ाने में संलग्न हैं, जो दर्शाता है कि "उनकी प्रेरिताई पहले से अधिक विकसित हो चुकी है।"

"तालिथा कुम" महिला धर्मसमाजियों के नेटवर्क का नाम है कार्डिनल चरनी ने उसका भी जिक्र किया है। यह नेटवर्क सुपीरियर जेनेरलों के विश्व संगठन (यूआईएसजी) के निर्देशन में संचालित है तथा इसकी स्थापना 10 साल पहले हुई है। नेटवर्क का नाम (तालिथा कुम) येसु के शब्द से लिया गया है जिसको उन्होंने मृत लड़की को जीवनदान देते हुए कहा था जिसका अर्थ है, "ओ लड़की मैं तुमसे कहती हूँ उठो।"

मानव तस्करी हर जगह 

कार्डिनल ने कहा कि संत पापा स्वीकार करते हैं कि मानव तस्करी एक बीमारी है। वे "इस तथ्य को पहचानते हैं कि यह एक गहरी जड़वाली और व्यापक घटना है" एवं एक "पापपूर्ण सामाजिक संरचना का परिणाम है जो वास्तव में मानव की वास्तविकता के माध्यम से चलता है। यह सभी ओर फैला है।"

कार्डिनल ने गौर किया है कि संत पापा संरचनाओं को बदलने में काफी धर्यशील हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि इन समस्याओं में से किसी का समाधान रातभर में संभव नहीं है। इसके लिए समय लगेगा और लम्बा समय लग सकता है।

10 वर्षों की प्रगति

कार्डिनल चरनी ने कहा कि इसलिए, मानव तस्करी के पीड़ितों को पहला उत्तर देनेवाले लोगों की दृढ़ता की सराहना की जानी चाहिए। केवल 10 वर्षों में, उनके प्रयासों ने इस तथ्य को जन्म दिया है कि इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र ने जागरूकता बढ़ाने के लिए एक दिन अलग रखा है। कार्डिनल ने जोर दिया कि "दस वर्षों पहले यह विचार किसी के मन में नहीं आया। इस मुद्दे पर बात करने के लिए 10 साल लग गये, तब इसे याद करने के लिए एक दिन निश्चित है और हम जानते हैं कि तस्करी का अर्थ क्या होता है।

कोविड-19 से सीख

कार्डिनल चरनी ने कहा कि कोविड-19 ने मानव तस्करी को अधिक मुश्किल बना दिया है। यह न केवल तस्करी की धुर्तता से संबंधित है बल्कि यह भारी, विशाल, मांग की अधिकता की शक्ति को बतलाता है। उन्होंने कहा कि यदि कोई इस मांग के बारे में कुछ नहीं जानता है तो वह "तस्करी को जारी रखने में मदद करता है"।

30 July 2020, 16:53