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स्लोवाकिया रोम समुदाय के लोगों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस स्लोवाकिया रोम समुदाय के लोगों से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  

कलीसिया, भाई-बहनों के साथ एक पिता का परिवार है, रोम समुदाय से पोप

संत पापा फ्राँसिस ने स्लोवाकिया में प्रेरितिक यात्रा के दौरान 14 सितम्बर को कोशिज़े के लुनिक 9वें प्रांगण में रोम समुदाय (यायावर) से मुलाकात की।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

स्लोवाकिया, मंगलवार, 14 सितम्बर 2021 (रेई)- उन्हें सम्बोधित कर संत पापा ने कहा, "आपके स्वागत एवं स्नेही शब्दों के लिए धन्यवाद। जान हमें संत पापा पौल छटवें के शब्दों का स्मरण दिलाते हैं, 'कलीसिया में आप हाशिये पर नहीं हैं...आप कलीसिया के हृदय में हैं।' (उपदेश 26 सितम्बर 1965) कलीसिया में कोई भी बाहर रहना या बाहर कर दिया जाना नहीं चाहता है। यह न सिर्फ सत्यवाद है बल्कि कलीसिया की सच्चाई है। जिसमें हम ईश्वर द्वारा बुलाये गये, एक ही टीम के सदस्य के रूप में जीते हैं। ईश्वर हमसे ऐसा ही चाहते हैं कि हम सभी अलग रहते हुए भी उनके चारों ओर एक हों। ईश्वर हमें एक साथ देखते हैं।"'

कलीसिया एक परिवार

वे हमें पुत्र-पुत्रियों के रूप में देखते हैं। एक पिता के रूप में वे स्नेह से अपने बच्चों पर नजर डालते हैं। यदि मैं उन्हें इस तरह देखने देता हूँ तो मैं भी दूसरों को इसी तरह देखने सिखूँगा। मैं महसूस करूँगा कि मैं ईश्वर के दूसरे बेटे-बेटियों से घिरा हुआ हूँ। और उन्हें अपना भाई-बहन मानूंगा। कलीसिया, भाई-बहनों के साथ एक पिता का परिवार है जिन्होंने हमें येसु हमारा भाई प्रदान किया ताकि हमें बतला सकें कि वे हमें कितना प्रेम करते हैं। वास्तव में, वे मानवता को चाहते है कि यह एक विश्वव्यापी परिवार बन जाए। परिवार के प्रति आपका महान प्रेम और आदर की भावना है और आप कलीसिया को उसी अनुभव से देखते हैं। कलीसिया निश्चय ही एक घर है यह आपका घर है। इसलिए मैं सारे हृदय से कहता हूँ ˸ आपका हमेशा स्वागत है। कलीसिया में आप हमेशा अपना घर महसूस करें और इसकी चिंता न करें कि क्या आप अपना घर सा महसूस कर पायेंगे। कोई भी आपको अथवा किसी और को कलीसिया के बाहर रखना चाहता है।

  

किसी का न्याय न करें

जान आपने अपनी पत्नी के साथ मेरा अभिवादन किया। आप दोनों ने अलग संस्कृति एवं परम्परा की पृष्टभूमि के होते हुए भी परिवार के सपने को साकार किया। शब्दों से अधिक, आपका विवाह स्वयं दिखाता है कि कैसे एक साथ रहने का ठोस अनुभव कई रूढ़ियों को दूर कर सकता है जो अन्यथा असंभव लग सकते हैं। पूर्वाग्रह को दूर करना सहज नहीं है यहाँ तक कि ख्रीस्तीयों के लिए भी। दूसरों को महत्व देना आसान नहीं है खासकर, जब हम उन्हें समस्या यह शत्रु के रूप में देखते हैं। हम उन्हें जानने का प्रयास किये बिना और उनकी कहानी सुने बिना उनका न्याय करते हैं।

ईश्वर के बेटे-बेटियों की सुन्दरता

आइये हम सुनें कि येसु हमें सुसमाचार में क्या बतलाते हैं, किसी का न्याय मत करो। (मती.7,1) ख्रीस्त हमें न्याय नहीं करने के लिए कहते हैं जबकि हम कई बार न केवल गपशप करते बल्कि अपने आपको न्यायसंगत ठहराते हैं और दूसरों का कठोर न्याय करते हैं। हम अपने प्रति दयालु होते जबकि दूसरे के लिए कठोर। कितनी बार हमारा न्याय पूर्वाग्रह पूर्ण होता है? इस तरह हम ईश्वर के बेटे-बेटियों की सुन्दरता को अपने शब्दों से कुरूप बनाते हैं जो हमारे ही भाई-बहन हैं। हमारा ज्ञान और दूसरों के प्रति हमारी सराहना इस अंगीकार पर आधारित हो कि हरेक व्यक्ति में ईश्वर के बेटे-बेटियाँ होने का अनुल्लंघनीय सौंदर्य है, सृष्टिकर्ता की छवि का प्रतिबिम्ब है।

संत पापा ने कहा कि वे बहुधा पूर्वाग्रह और कठोर निर्णय, भेदभावपूर्ण रूढ़िवादिता, मानहानिकारक शब्द एवं दुर्विचार के शिकार होते हैं। जिसके कारण हम सभी मानवता में कमजोर हैं। प्रतिष्ठा को बचाये रखने का अर्थ है पूर्वाग्रह से वार्ता की ओर बढ़ना, आत्मकेंद्रित से एकीकरण की ओर जाना। पर हम इसे किस तरह कर सकते हैं?

शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का मार्ग है समन्वय

जहाँ हरेक व्यक्ति की चिंता होती है, प्रेरितिक देखभाल होती है, जहाँ धीरज एवं ठोस प्रयास होते हैं ये सभी फल लाते हैं। ये फल शीघ्र नहीं किन्तु उपयुक्त समय में दिखाई पड़ते हैं। न्याय और पूर्वाग्रह दूरी बढ़ाते हैं। बैर और तीखे शब्द मददगार नहीं होते। दूसरों को हाशिये पर रखने से कुछ हासिल नहीं होता। अपने आपको दूसरों से अलग करना कई बार गुस्सा बढ़ाता है जबकि शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का मार्ग है समन्वय। बच्चे जो हमारे भविष्य होते हैं वे दूसरों के साथ बिना बाधा और बहिष्कार के बढ़ना चाहते हैं।

वे एक अच्छी तरह से एकीकृत और मुक्त जीवन के पात्र हैं। वे ही हैं जो हमें जल्दबाजी में सर्वसम्मति के आधार पर दूरदर्शी निर्णय लेने के लिए प्रेरित नहीं करते, बल्कि हमारे आम भविष्य की चिंता पर आधारित होने के लिए प्रेरित करते हैं। हमारे बच्चों की ओर से साहसी निर्णय लेने की जरूरत है ताकि उनकी प्रतिष्ठा को बढ़ावा दिया जा सके। उन्हें इस तरह से शिक्षित किया जाए कि वे अपनी पहचान के साथ एक ठोस आधार पर बढ़ सकें और उन्हें अपनी इच्छा के हर अवसर प्राप्त हो सकें।

रोम समुदाय की सेवा करनेवालों के प्रति संत पापा का आभार

संत पापा ने एकीकरण की क्रिया में लगे सभी लोगों को धन्यवाद दिया किन्तु गौर किया कि इसके लिए बड़े प्रयास की आवश्यकता है, कई बार कलीसिया में भी गलतफहमी एवं कृतघ्नता आ जाती है। उन्होंने उन सभी धर्मसमाजियों एवं लोकधर्मियों के प्रति अपना आभार प्रकट किया जो रोम समुदाय के समग्र विकास के लिए समर्पित हैं। संत पापा ने कहा, "हाशिये पर जीवनयापन करनेवाले लोगों के प्रति आपके सभी कार्यों के लिए धन्यवाद।" उन्होंने शरणार्थियों एवं कैदियों के प्रति अपना सामीप्य व्यक्त किया।  

संत पापा ने उन्हें प्रोत्साहन देते हुए कहा, "मैं आप सभी से अपने डर को दूर करने और पिछली चोटों को पीछे छोड़ने, आत्मविश्वास से, कदम दर कदम: ईमानदारी से काम करने के लिए, अपनी दैनिक रोटी कमाने से पैदा हुई गरिमा में, आपसी विश्वास को बढ़ावा देने और एक-दूसरे के लिए प्रार्थना करने की सलाह देता हूँ। वही हमारे कदमों का मार्गदर्शन करता है और हमें ताकत देता है। मैं आपको प्रोत्साहित करता हूँ, मैं आपको आशीर्वाद देता हूँ और मैं पूरी कलीसिया की ओर से आप सभी का आलिंगन करता हूँ। धन्यवाद।"

 

 

 

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संत पापा ने स्लोवाकिया के रोम (यायावर) समुदाय से मुलाकात की
14 September 2021, 15:18