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वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन 

पोप हमसे कलीसिया के साक्षी, दुनिया के लिए खुला होने का आह्वान करते हैं

बुढ्डापेस्ट एवं स्लोवाकिया पोप फ्राँसिस के इंतजार में हैं। वाटिकन न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में वाटिकन राज्य सचिव कार्डिनल पीयेत्रो परोलिन ने रेखांकित किया कि शसतिन में संत पापा उन सभी लोगों को माता मरियम को सिपूर्द करेंगे जो कमजोर परिस्थितियों में हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 11 सितम्बर 2021 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस अपनी 34वीं प्रेरितिक यात्रा की तैयारी कर रहे हैं जिसमें वे बुढ्डापेस्ट में यूखरीस्तीय सम्मेलन का समापन मिस्सा सम्पन्न करेंगे, उसके बाद स्लोवाकिया जाएँगे। संत पेत्रुस के उत्तराधिकारी के आगमन का लोग बड़ी बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे हैं। कार्डिनल परोलिन ने कहा कि यह एक दोहरी प्रेरितिक यात्रा है जिसकी घोषणा खुद संत पापा फ्राँसिस ने इराक की प्रेरितिक यात्रा से वापसी के दौरान की थी। वाटिकन न्यूज से बातें करते हुए कार्डिनल ने रेखांकित किया कि "स्लोवाकिया के शसतिन स्थित राष्ट्रीय तीर्थ पर तीर्थयात्रा संत पापा की सर्जरी के बाद की तीर्थयात्रा होगी इसलिए कुछ अर्थ में यह ऑपरेशन की सफलता के लिए माता मरियम को धन्यवाद देने के लिए भी है।

अपनी इस यात्रा के बारे संत पापा फ्रांसिस ने इराक की प्रेरितिक यात्रा से लौटते समय कहा था कि यह प्रार्थना की ऊपज है। उन्होंने बुडापेस्ट में अंतर्राष्ट्रीय यूखरीस्तीय कांग्रेस के समापन मिस्सा में जाने और उसकी अध्यक्षता करने की इच्छा और इरादा व्यक्त की थी, जिसे पहले ही कोविड -19 के कारण स्थगित कर दिया गया था, और फिर स्लोवाकिया जाकर देश का दौरा करने एवं अपनी निकटता व्यक्त करने की अभिलाषा प्रकट की थी।

बुढ्डापेस्ट के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल एरदो ने कहा कि हंगरी के सभी लोगों को एक दूसरे के साथ भ्रातृत्व में बढ़ने एवं उसका एहसास करने के लिए विश्वास के प्रकाश की जरूरत है। यूखरीस्तीय कॉन्ग्रेस से आप क्या उम्मीद करते हैं?

उत्तर- यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस उत्सव, चिंतन, अध्ययन, यूखरीस्त के रहस्य की गहराई में जाने का अवसर है और बुढ्डापेस्ट में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का भी यही उद्देश्य है। वास्तव में, इन दिनों के सभी कार्यक्रमों में समारोह और शैक्षणिक का गहनीकरण हो रहा है। उसके बाद यूखरिस्तीय कॉन्ग्रेस जीवन की ओर बढ़ेगा जो यूखरीस्त है। कार्डिनल ने कहा, "कुछ दिनों पहले मैंने 2018 में मोलफेत्ता में डॉन तोनिनो बेल्लो की मौत की 25वीं वर्षगाँठ के अवसर पर संत पापा के उपदेश को पुनः पढ़ा। जिसमें एक बात कही गई थी, 'हर पल्ली में, हर गिरजाघर में यह लिखा होना चाहिए, ख्रीस्तयाग के बाद आप अपने लिए नहीं जीते बल्कि दूसरों के लिए जीते हैं।'" उन्होंने कहा, "मैं मानता हूँ कि कार्डिनल एरदो जो कह रहे थे उसका अर्थ यही है। यूखरिस्त हमें ख्रीस्त के प्रेम से सराबोर कर देता है, ख्रीस्त के जीवन से मिला देता है जो सार्वभौमिक आयाम के साथ एक प्रेम है, अतः हमें हरेक स्त्री और पुरूष में, हरेक व्यक्ति में एक भाई अथवा बहन को देख सकना चाहिए जिनका भार हमें वाहन करना है।"  

स्लोवाकिया में पोप का स्वागत एक ऐसी जनता के द्वारा किया जाएगा जिनमें संत सिरिल एवं संत मेथोडियस की याद ताजी है। क्या यह मुलाकात पूर्व और पश्चिम के बीच वार्ता के आध्यात्मिक सेतु को पुष्ट करेगा...

उत्तर – निश्चय ही, संत सिरिल एवं संत मेथोडियुस को स्लोवाकिया के पूरे इतिहास में गहराई से याद किया जाता है। उन्हें देश के आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक पिता माना जाता है। संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने स्लोवोरूम अपोस्तोली में उन्हें पूर्व एवं पश्चिम का सेतु कहा है। कार्डिनल ने कहा कि हम इन संतों से जो सीख सकते हैं – और मैं मानता हूँ कि उनका संदेश वर्तमान, चिरस्थायी है, एवं अन्य चीजों के अलावा, वे यूरोप के संरक्षक भी हैं। संत पापा जॉन पौल द्वितीय ने सबसे पहले सुसमाचार का सांस्कृतिक समायोजन करने की अपील की थी। वे अपने समय के लोगों से बात करना जानते थे, वे अपने पास जो उपलब्ध था उससे सुसमाचार की घोषणा करना जानते थे, और ऐसा ही करने का निमंत्रण संत पापा फ्रांसिस हमें देते हैं कि हम बाहर जानेवाली कलीसिया बनें, एक ऐसी कलीसिया जो पूरे विश्व में सुसमाचार प्रचार करने के लिए अग्रसर हो। विश्व में सुसमाचार प्रचार करने का अर्थ है सही भाषा की पकड़, ताकि लोग सुसमाचार की घोषणा को स्वीकार कर सकें। इस तरह एक ओर यह सांस्कृतिक समायोजन, मिशनरी भरोसा है तो दूसरी ओर यह जानना कि आध्यात्मिकता की इस विविधता को आध्यात्मिकता की अभिव्यक्ति के रूपों, भाषा की संस्कृति की काथलिक एकता में कैसे सम्मिलित किया जाए, कि यह एकता का प्रतीक बन जाए न कि एकरूपता।

प्रेरितिक यात्रा का कार्यक्रम काफी व्यस्त है जिसमें रोमा समुदाय से मिलना भी शामिल है इस वास्तविकता पर पोप के ध्यान का संकेत...क्या है?

उत्तर – मुझे ऐसा लगता है कि यह मुलाकात संत पापा द्वारा दो वर्षों पहले रोमानिया में रोमा समुदाय (आदिवासी) से मुलाकात के समान है जहाँ उन्होंने इस समुदाय की पीड़ा के प्रति अपने दिल में दुःख व्यक्त की थी। अतः लोगों के दुःख में संत पापा की गहरी सहभागिता, क्षमाशीलता की अपील है, जिसकी जिम्मेदारी कलीसिया को है। साथ ही साथ उनके प्रति सम्मान की भी बात है बल्कि उनके मूल्यों की सराहना करना है, पारिवारिक मूल्यों – एकात्मता, आतिथ्य, बुजूगों की देखभाल आदि, उन्हें समाज में पूरी तरह एकीकृत करने का प्रयास भी है।   

संत पापा फ्राँसिस राष्ट्रीय तीर्थस्थल शसतिन में स्लोवाकिया की संरक्षिका सात दुःखों की माता मरिया के पर्व के दिन ख्रीस्तयाग अर्पित करेंगे। क्या इस पड़ाव को संत पापा खोना नहीं चाहते हैं?

उत्तर- निश्चय ही, कुछ मायने में उन्होंने यात्रा को बढ़ा दिया है ताकि स्लोवाकिया की संरक्षिका के पर्व की इस महान भक्ति में भाग ले सकें। मैं मानता हूँ कि एक ओर संत पापा लोकप्रिय धार्मिकता और भक्ति को बड़ा महत्व देते हैं वहीँ सबसे बढ़कर वे माता मरियम की भक्ति को विशेष महत्व देते हैं जिसको उन्होंने लातिनी अमरीका में ही महसूस किया था। यह भक्ति यूरोप में भी पायी जाती है और इसका अच्छा उदाहरण है शसतिन का तीर्थस्थल। कार्डिनल ने कहा कि मैं यहाँ इस बात को रेखांकित करना चाहता हूँ कि यह तीर्थयात्रा संत पापा की सर्जरी के बाद हो रही है अतः कुछ हद तक ऑपरेशन की सफलता के लिए माता मरियम को धन्यवाद देने का एक तरीका है। इसके साथ ही उन सभी लोगों को भी माता मरियम को समर्पित करना है जो कमजोर परिस्थिति में हैं और विभिन्न प्रकार से पीड़ा सह रहे हैं, खासकर, महामारी के कारण।

संत पापा किस भावना से यात्रा पर जा रहे हैं?

उत्तर- उन्होंने स्वयं पिछले रविवार 5 सितम्बर को देवदूत प्रार्थना के उपरांत कहा था कि उनकी बड़ी इच्छा है इन विश्वासियों से, इन कलीसियाओं से मिलने की, इस बात पर गौर करते हुए कि कोविड-19 के कारण प्रेरितिक यात्रा की संभावना कम हो गई है। पोप एक परमाध्यक्ष के रूप में लोगों के साथ संपर्क की इस संभावना को फिर से शुरू करने की आवश्यकता महसूस करते हैं, जो उनकी शैली और उनके होने के तरीके की विशेषता है।

11 September 2021, 16:03