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बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख श्री मुहम्मद यूनुस बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख श्री मुहम्मद यूनुस  (AFP or licensors)

मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली

2006 के नोबेल पुरस्कार विजेता और ग्रामीण बैंक के संस्थापक, बांग्लादेश के अंतरिम नेता के रूप में कार्यभार संभाला। वे देश को उथल-पुथल से बचाएंगे और प्रधानमंत्री शेख हसीना के जबरन इस्तीफे के बाद नए चुनाव आयोजित करेंगे।

वाटिकन न्यूज़

ढाका, शनिवार 10 अगस्त 2024 : नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने बांग्लादेश की नई अंतरिम सरकार के प्रमुख के रूप में शपथ ली है, जिससे दक्षिण एशियाई राष्ट्र में सुधार और लोकतांत्रिक बदलाव की उम्मीदें बढ़ गई हैं, जो कई सप्ताह से चल रहे सरकार विरोधी प्रदर्शनों से जूझ रहा है।

माइक्रोफाइनेंस के क्षेत्र में अग्रणी और पूर्व प्रधानमंत्री हसीना के लंबे समय से आलोचक रहे 84 वर्षीय प्रसिद्ध अर्थशास्त्री और ग्रामीण बैंक के संस्थापक श्री मुहम्मद यूनुस ने गुरुवार शाम को ढाका में राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति मुख्य सलाहकार (प्रधानमंत्री के समान पद) के रूप में शपथ ली।

गुरुवार शाम को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ लेते हुए श्री मुहम्मद यूनुस
गुरुवार शाम को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति के मुख्य सलाहकार के रूप में शपथ लेते हुए श्री मुहम्मद यूनुस   (ANSA)

उनकी नियुक्ति प्रधानमंत्री शेख हसीना को नौकरी कोटा को लेकर छात्रों के विरोध प्रदर्शन के कारण इस्तीफा देने और पड़ोसी भारत भागने के लिए मजबूर होने के तीन दिन बाद हुई, जो उनके निरंकुश 15-वर्षीय शासन के खिलाफ विद्रोह में बदल गया था


अपने अग्रणी माइक्रोफाइनेंसिंग कार्य के लिए दुनिया भर में "गरीबों के बैंकर" के रूप में जाने जाने वाले और हसीना के लंबे समय से विरोधी, यूनुस को भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के समन्वयकों द्वारा प्रस्तावित किया गया था, जिन्होंने श्रीमति हसीना की अवामी लीग सरकार के खिलाफ बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया था।

छात्रों का विरोध हसीना के निरंकुश शासन के खिलाफ 

उन्होंने बांग्लादेश के इतिहास के सबसे घातक विरोध प्रदर्शनों में से एक के बाद पद संभाला, जिसमें पुलिस अधिकारियों सहित सैकड़ों लोग मारे गए और हजारों लोग गिरफ्तार हुए।

जुलाई में सरकारी नौकरियों के लिए कोटा प्रणाली के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू हुआ, जिसके बारे में आलोचकों का कहना था कि यह श्रीमति हसीना की अवामी लीग से जुड़े लोगों के पक्ष में है।

श्रीमति हसीना पर जनवरी में हुए चुनावों में धांधली करने और व्यापक मानवाधिकार हनन का आरोप था, उन्होंने प्रदर्शनकारियों पर नकेल कसने के लिए सुरक्षा बलों को तैनात किया था। हालांकि, सोमवार को सेना द्वारा उनके खिलाफ़ रुख़ अपनाने और विरोध प्रदर्शनों को दबाने से इनकार करने के बाद उन्हें इस्तीफ़ा देने और देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा।

राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के नेतृत्व में शपथ ग्रहण समारोह में 1,500 से ज़्यादा राजनेता, छात्र, विरोध समन्वयक और सेना और नागरिक समाज के प्रतिनिधि शामिल हुए। अंतरिम सरकार के अन्य 17 सदस्यों ने भी शपथ ली। इनमें प्रमुख मानवाधिकार कार्यकर्ता आदिलुर रहमान खान शामिल थे, जिन्हें अपदस्थ शासन ने जेल में डाल दिया था और दो छात्र नेता भी शामिल थे।

आगे की चुनौतियां

यूनुस की कार्यवाहक सरकार के सामने आगे की चुनौतियां हैं। उसे कानून और व्यवस्था स्थापित करनी है, अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनावों का मार्ग प्रशस्त करना है।

मुस्लिम बहुल देश के राजनीतिक उथल-पुथल में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं के खिलाफ हमलों में वृद्धि देखी गई है, जो बांग्लादेश में दूसरा सबसे बड़ा धार्मिक समुदाय है और श्रीमति हसीना की धर्मनिरपेक्ष अवामी लीग के समर्थकों के रूप में देखा जाता है।

धार्मिक अल्पसंख्यकों के खिलाफ बढ़ती हिंसा की चिंता

अल्पसंख्यकों के एक मंच, बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के अनुसार, 4 अगस्त से उपद्रव करने वालों ने कम से कम दस हिंदू मंदिरों और धार्मिक अल्पसंख्यकों के सैकड़ों घरों और संपत्तियों को निशाना बनाया है।

हिंदुओं के अलावा, मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा विधर्मी माने जाने वाले अहमदिया मुस्लिम संप्रदाय पर भी हमला किया गया है।

परिषद के नेता और बांग्लादेश क्रिश्चियन एसोसिएशन के अध्यक्ष निर्मोल रोजारियो ने उका न्यूज एजेंसी से पुष्टि की कि वर्तमान परिस्थितियों में ख्रीस्तीय और अन्य अल्पसंख्यक समूह असुरक्षित महसूस करते हैं।

बांग्लादेश के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के उपाध्यक्ष और राजशाही धर्मप्रांत के धर्माध्यक्ष जेर्वास रोजारियो ने उका न्यूज को बताया कि अधिकारियों को "हिंसा और विनाश को रोकने के लिए तत्काल उपाय करने चाहिए।" उन्होंने कहा, "इस महत्वपूर्ण क्षण में सभी को शांत रहने और संयम बरतने की जरूरत है।"

अपनी ओर से, भेदभाव विरोधी छात्र आंदोलन के आयोजकों ने हिंसा और बर्बरता को समाप्त करने का आह्वान किया है और वे विपक्षी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और इस्लामिस्ट जमात-ए-इस्लामी से खुद को दूर करने की कोशिश कर रहे हैं।

2023 की नवीनतम जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में 170 मिलियन की कुल आबादी का 90 प्रतिशत मुस्लिम हैं, हिंदू अभी भी 8 प्रतिशत के साथ सबसे बड़ा अल्पसंख्यक समूह बना हुआ है, जबकि ख्रीस्तीय 1% से भी कम का प्रतिनिधित्व करते हैं, जिसमें 0.3 प्रतिशत काथलिक हैं।

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10 अगस्त 2024, 15:05
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