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यमन संघर्ष में बच्चे यमन संघर्ष में बच्चे  (ANSA)

विश्व शांति दिवसः हर युद्ध बच्चों के खिलाफ एक युद्ध है

युद्ध संघर्ष क्षेत्रों में 5 वर्ष से कम उम्र के 4.5 मिलियन बच्चे गंभीर कुपोषण से पीड़ित हैं, 27 मिलियन लोग शिक्षा से वंचित हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

रोम, मंगलवार 01 जनवरी 2019 (रेई) : अंतरराष्ट्रीय संगठन ‘सेव द चिल्ड्रन’ (बच्चों की रक्षा करें) वर्षों से युद्ध संघर्ष क्षेत्रों में बच्चों की रक्षा और उन्हें भविष्य की गारंटी देती आ रही है। यह संगठन 2019 विश्व शांति दिवस पर संत पापा फ्राँसिस के शब्दों को दृढ़ता से साझा करती हैं, जिसमें संत पापा ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान आकर्षित किया है, विशेष रूप से संघर्षों के शिकार बच्चों पर : “दुनिया में, छह बच्चों में से एक युद्ध या उसके परिणामों की हिंसा से प्रभावित होता है।" वास्तव में, उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध की आपदाओं के बाद, 1919 में, सेव द चिल्ड्रन संगठन के संस्थापक, एग्लेंटीन जेब की जोरदार पुष्टि की है,जिसने कहा था कि ‘हर युद्ध बच्चों के खिलाफ एक युद्ध है’।

संघर्ष क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे अपने परिवारों के साथ अन्य देशों में पलायन करने के लिए मजबूर होते हैं, या अकेले पड़ जाते हैं। उन्हें बीमारी और भूखमरी का सामना करना पड़ता है। छोटी उम्र में ही शिक्षा से वंचित हो जाते हैं और हिंसा या शोषण के जोखिम में पड़ जाते हैं और छोटी लड़कियों को कम उम्र में ही शादी करा दी जाती है।

गंभीर कुपोषण से पीड़ित तीन में से दो बच्चे उन देशों में हैं, जहां युद्ध होता है, जबकि संघर्ष से सबसे अधिक तबाह दस देश - गणराज्य कोंगो, सूडान, अफगानिस्तान, यमन, सोमालिया, दक्षिण सूडान, सीरिया, नाइजीरिया, मध्य अफ्रीका और इराक में पाँच वर्ष से कम आयु के 4.5 मिलियन से अधिक बच्चे गंभीर कुपोषण से प्रभावित हैं।

यमन से वर्षों से चल रहे संघर्ष की वजह वर्तमान में करीब 120,000 बच्चे गंभीर रुप से कुपोषण के शिकार हैं। 27 मिलयन बच्चे स्कूलों से वंचित हैं क्योंकि उनके स्कूल हमलों में ध्वस्त हो गये हैं या सशस्त्र समूहों द्वारा कब्जा कर लिया गया है या माता-पिता अपने बच्चों को स्कूल भेजने से डरते हैं।

‘सेव द चिल्ड्रन’ संगठन की स्थापना प्रथम विश्व युद्ध के विनाशकारी परिणामों से बच्चों को बचाने के लिए सन् 1919 ई. में इंग्लैंड में हुई थी और सौ वर्षों से यह अंतरराष्ट्रीय संगठन विश्व के युद्ध रत देशों में बच्चों के स्वास्थ्य,पोषण, शिक्षा और सुरक्षा में लगी हुई है।  

01 January 2019, 15:37