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ग्वादालुपे की माता मरियम के सम्मान में संत पापा का ख्रीस्तयाग

ग्वादालुपे की माता मरियम के पर्व दिवस 12 दिसम्बर को, संत पापा फ्राँसिस ने वाटिकन के संत पेत्रुस महागिरजाघर में ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 12 दिसम्बर 2020 (रेई)- संत पापा फ्रांसिस ने ग्वादालुपे की माता मरियम के पर्व दिवस पर शनिवार 12 दिसम्बर को संत पेत्रुस महागिरजाघर में समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित किया।

ग्वादालुपे की माता मरियम को, अमरीका की महारानी, ​​संरक्षिका और माता आदि से सम्बोधित किया जाता है, खासकर, लातीनी अमरीका एवं फिलीपींस में उन्हें विशेष सम्मान दिया जाता है। शनिवार को संत पापा के समारोही ख्रीस्तयाग में लातीनी अमरीका के गुरूकुल छात्रों एवं राजदूत प्रतिनिधिमंडल ने भाग लिया जहाँ कोविड-19 के कारण सीमित संख्या में लोगों को भाग लेना था।

ईश्वर प्रचुर मात्रा में देते हैं

अपने उपदेश में संत पापा ने तीन बिन्दुओं पर प्रकाश डाल- प्रचुर, आशीष और उपहार- जो ग्वादालुपे की माता मरियम में प्रतिबिम्बित होती हैं।

संत पापा ने कहा, "ईश्वर अपने आपको हमेशा प्रचुर मात्रा में देते हैं।" ईश्वर खुद को एक खुराक के रूप में नहीं देते, फिर भी, वे हमारी कमजोरियों, जरूरतों एवं आरामदायक हिस्सों के प्रति धैर्यशील हैं। वास्तव में, उन्होंने अपने आपको पूरी तरह दे दिया है क्योंकि ऐसा करना उनके लिए संभव है।  

ईश्वर खुद को देकर हमें आशीष प्रदान करते हैं

दूसरा विन्दु है आशीष, जिसको धर्मग्रंथ के पहले पन्ने, उत्पति ग्रंथ में सृष्टि के इतिहास में पाया जा सकता है। सृष्टि को देखकर ईश्वर कहते हैं, यह अच्छा है और यह बहुत अच्छा है। संत पापा ने कहा कि ईश्वर हमेशा अच्छी चीजों के बारे बोलते हैं जबकि शैतान बुराई की बातें करता, दुश्मन की तरह बातें करता है।

"ईश्वर हमेशा अच्छा बोलते एवं खुशी से बोलते हैं। वे अपने आपको देकर एवं प्रचुर मात्रा में देकर ऐसा बोलते हैं।"  

प्रचुरता एवं आशीर्वाद के उपहार

प्रचुरता एवं आशीर्वाद, ये हमारे लिए उपहार हैं जिसमें सभी कृपायें हैं, उनका ईश्वरत्व है, जो येसु,  ईश्वर के एकलौते पुत्र, मरियम के बेटे में हमें प्रदान किया गया है।

येसु जो अपने आप में धन्य हैं वे हमारे लिए ईश्वर के उपहार हैं। वे मरियम के द्वारा हमारे लिए प्रदान किये गये हैं जो स्वयं ईश्वर की कृपा द्वारा नारियों में धन्य हैं। यह कृपा ईश्वर हमें प्रदान करते हैं और जिसको उन्होंने लगातार हमें प्रदान किया है, आप नारियों में धन्य हैं क्योंकि आपने धन्यताओं से पूर्ण व्यक्ति को हमें दिया।

ईश्वर के तरीके की नकल

संत पापा ने कहा, "आज जब हम माता मरियम, ग्वादालुपे की हमारी माता मरियम की छवि पर चिंतन कर रहे हैं, आइये, हम थोड़ा ईश्वर की नकल करें- उदारता, प्रचुरता, आशीर्वाद, अभिशाप नहीं देने, हमारे जीवन को उपहार बनाने और सभी के लिए इसे उपहार बनाने के द्वारा।" ख्रीस्तयाग के अंत में संत पापा ने ग्वादालुपे की माता मरियम से प्रार्थना की।  

माता मरिया के दिव्यदर्शन

सन् 1531 ई. में मेक्सिको शहर के एक साधारण व्यक्ति को स्वर्ग से माता मरिया के दिव्यदर्शन प्राप्त हुए थे। उन्होंने अपना परिचय पवित्र कुँवारी मरियम रूप में दिया था तथा बतलाया था कि वे सच्चे ईश्वर की माता हैं जिसके लिए हम सभी जीते हैं और जो स्वर्ग और पृथ्वी की सभी चीजों के सृष्टिकर्ता हैं।

दिव्य दर्शन में माता मरिया ने उस स्थान पर एक गिरजाघर बनवाने का आग्रह भी किया था। कहा जाता है कि जब स्थानीय धर्माध्यक्ष ने इस बात पर विश्वास नहीं किया तथा उसे मानने से इनकार किया और चिन्ह की मांग की तो माता मरिया ने चिन्ह रूप में मध्य दिसम्बर में पर्वत की चोटी पर से गुलाब के फूल बटोरने के लिए कहा। इसी घटना के बाद मेक्सिको में ग्वादालुपे की माता मरिया की भक्ति शुरू हुई।

ग्वादालूपे की माता मरियम को आधिकारिक रूप से मुकुट प्रदान किये जाने की 125वी. वर्षगाँठ पर संत पापा फ्रांसिस ने 12 दिसम्बर को विश्व के सभी काथलिक विश्वासियों को, घर से ही पूर्ण दण्डमोचन प्राप्त करने का अवसर प्रदान किया है।

12 December 2020, 15:46