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संत पापा फ्राँसिस आमदर्शन समारोह के दौरान धर्मशिक्षा देते हुए संत पापा फ्राँसिस आमदर्शन समारोह के दौरान धर्मशिक्षा देते हुए  (ANSA)

चरनी पर संत पापा की धर्मशिक्षा

संत पापा फ्राँसिस ने बुधवारीय आमदर्शन समारोह के अवसर पर, वाटिकन के पौल षष्ठम सभागार में एकत्रित हज़ारों विश्वासियों और तीर्थयात्रियों को सम्बोधित कर, "चरनी, पारिवारिक सुसमाचार" विषय पर धर्मशिक्षा देते हुए कहा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार, 18 दिसम्बर 2019 (रेई)˸ सप्ताह भर में ख्रीस्त जयन्ती का पर्व आ जायेगा। इन दिनों जब पर्व की तैयारियाँ चल रही हैं, हम अपने आपसे पूछ सकते हैं, "मैं किस तरह ख्रीस्त जयन्ती पर्व मनाने की तैयारी कर रहा हूँ?" तैयारी करने का एक साधारण किन्तु प्रभावशाली तरीका है चरनी बनाना। संत पापा ने कहा कि इस साल भी मैंने इसी रास्ते को अपनाया है। मैं ग्रेचो गया जहाँ संत फ्राँसिस ने स्थानीय लोगों के साथ ख्रीस्त जयन्ती का पहला दृश्य बनाया था और इस परम्परा के अर्थ की याद दिलाने के लिए मैंने एक पत्र लिखा कि  क्रिसमस के समय में चरनी का क्या अर्थ है?

चरनी, एक जीवित सुसमाचार

चरनी वास्तव में "एक जीवित सुसमाचार के समान है"।( अदमिराबिले सेन्यूम -1) हम जहाँ रहते हैं, घरों, स्कूलों, कार्यालयों, सभा स्थलों, अस्पतालों और चिकित्सालयों, कैदखानों एवं चौराहों में सुसमाचार लायें। हम जहाँ रहते हैं यह एक विशेष बात की याद दिलाती है कि ईश्वर स्वर्ग में अदृश्य बनकर नहीं रहे किन्तु धरती पर आये, मनुष्य बने, एक बालक का रूप धारण किया। चरनी बनाना ईश्वर के सामीप्य को महसूस करना है। ईश्वर हमेशा अपने लोगों के करीब रहे किन्तु जब उन्होंने शरीर धारण किया और जन्म लिया तब वे अत्याधिक करीब आ गये। चरनी बनाने का अर्थ है उनकी करीबी को मनाना और इस बात को जानना कि ईश्वर सच्चे, यथार्थ, जीवित और उत्साह देने वाले हैं। ईश्वर दूर रहने वाले व्यक्ति नहीं है और न ही बेलगाव न्यायधीश, बल्कि वे दीन और प्रेमी बनकर हमारे पास आये। चरनी के बालक हमें अपनी कोमलता प्रदान करते हैं। कुछ प्रतिमाओं में बालक येसु को खुली बाहों के साथ दिखलाया जाता है यह बतलाने के लिए कि ईश्वर हमारी मानवता का आलिंगन करने आये हैं। अतः यह अच्छा है कि हम चरनी के सामने जाएँ तथा वहाँ प्रभु के जीवन पर भरोसा करें। लोगों के बारे उनसे बाते करें, उन्हें उन परिस्थितियों के बारे बतलायें जिसकी चिंता हम करते हैं, समाप्त होते साल का आवलोकन करें। अपनी आशाओं एवं चिंताओं को उन्हें सुनायें।

पारिवारिक सुसमाचार  

येसु के बगल में मरियम और संत जोसेफ को देखते हैं। हम उनकी सोच एवं अनुभवों की कल्पना कर सकते हैं जो खुश थे किन्तु बेचैन भी, जब इतनी गरीबी में बालक येसु का जन्म हुआ। हम भी पवित्र परिवार को अपने घर में निमंत्रण दें जहाँ आनन्द और चिंता है, जहाँ हम हर दिन उठते, भोजन करते और अपने प्रियजनों के करीब सोते हैं। यह एक पारिवारिक सुसमाचार है। चरनी का शाब्दिक अर्थ है "नाँद" जबकि चरनी का शहर बेतलेहेम का अर्थ है "रोटी का घर"।

घर में चरनी अक्सर उस जगह बनायी जाती है जहाँ हम भोजन करते और स्नेह बांटते हैं जो याद दिलाती है कि येसु हमारे आवश्यक भोजन एवं जीवन की रोटी हैं। (यो. 6:34) वे ही हमें प्रेम से पोषित करते तथा हमारे परिवारों को शक्ति प्रदान करते हैं कि हम आगे बढ़ें एवं क्षमा दें।

ईश्वर की आवाज सुने

चरनी हमें जीवन में एक दूसरी शिक्षा देती है। आज के इस उन्मत्त भाग दौड़ में यह हमें चिंतन करने का निमंत्रण देती है। यह हमें ठहरने के महत्व की याद दिलाती है। क्योंकि केवल जब हम अनुस्मरण करते हैं तभी जीवन के लिए महत्वपूर्ण बातों को स्वीकार कर सकते हैं। जब हम दुनिया की आवाजों को बाहर छोड़ते हैं तभी हम ईश्वर की आवाज को सुनने के लिए अपने आपको खोल सकते हैं जो एकांत में बोलते हैं।

चरनी वर्तमान की बात है और हरेक परिवार में प्रासंगिक है। संत पापा ने बतलाते हुए कहा, "कल मुझे उपहार में एक खास तरह की चरनी मिली, छोटी सी, जिसमें कहा गया था माँ को आराम करने दें। उसमें माता मरियम सो रही थीं और जोसेफ बालक के साथ वहाँ उपस्थित थे जो उन्हें सुलाने की कोशिश कर रहे थे।" संत पापा ने सवाल किया कि आप में से कितने पति-पत्नी अपने रोते बच्चों के लिए बारी-बारी से जागते हैं। मां को सोने देना, एक परिवार में विवाह की कोमलता है।  

चरनी सबसे अधिक प्रासंगिक है जो आकर्षित करती एवं हृदय में प्रवेश करती है जबकि दुनिया में हर दिन कई हथियार और कई हिंसक छवि बनाये जा रहे हैं। चरनी वास्तव में शांति का एक दस्तकारी छवि है जिसके कारण यह एक जीवित सुसमाचार है।

जीवन की सार्थकता

संत पापा ने कहा, "प्रिय भाइयो एवं बहनो, चरनी से हम जीवन की सार्थकता के लिए एक सीख लें। हम प्रतिदिन गड़ेरियों को भेड़ों के साथ देखते हैं, लोहार को लोहा पीटते, चक्की वाले को आटा पीसते, खेतों एवं विभिन्न परिस्थितियों को अपने जीवन में गुजरते देखते हैं। यह सही है क्योंकि चरनी हमें स्मरण दिलाती है कि येसु हमारे यथार्थ जीवन में आते हैं। घर में एक छोटी चरनी बनाएँ क्योंकि यह हमारे बीच ईश्वर के आने की यादगारी है।" वे हमारे बीच जन्म लिये, जीवन में हमारा साथ देते हैं, वे हमारे समान एक मनुष्य बने। जीवन की वास्तविकता में, बुराईयाँ भी हैं जो हेरोद के महल के समान हमें आकर्षित करते हैं। हर चीज सामान्य रूप से आगे बढ़ते हुए दिखाई पड़ता है। दुनिया में प्रगति नहीं दिखाई पड़ती किन्तु यथार्थ में नवीनता है। वह नवीनता हैं येसु। हम अपने दैनिक जीवन में अकेले नहीं है। वे हमारे साथ रहते हैं। वे जादू-मंत्र से चीजों को नहीं बदलते किन्तु यदि हम उनका स्वागत करते हैं तो सब कुछ बदल सकता है।  

चरनी बनाने का अवसर येसु को जीवन में निमंत्रण देने का अवसर बने

मैं शुभकामनाएँ देता हूँ कि चरनी बनाने के अवसर हमारे जीवन में येसु को निमंत्रण देने का अवसर हो। जब हम घरों में चरनी बनायेंगे, यह द्वार खोलने और यह कहने के समान हो, "येसु अंदर आइये"। अपने जीवन में येसु को दिया गया यह निमंत्रण हमें उनके अधिक नजदीक लायेगा क्योंकि यदि वे हमारे जीवन में रहेंगे तो हमारा नया जन्म होगा और यदि हमारा नया जन्म होगा तब यह सच्चा क्रिसमस होगा। सभी को ख्रीस्त जयन्ती मुबारक हो।

इतना कहने के बाद संत पापा ने अपनी धर्मशिक्षा माला समाप्त की और विश्व के विभिन्न देशों से आये सभी तीर्थयात्रियों और विश्वासियों का अभिवादन किया, खासकर, उन्होंने कनाडा एवं अमरीका के तीर्थयात्रियों का अभिवादन किया। तब संत पापा ने सभी को ख्रीस्त जयन्ती की शुभकामनाएँ दीं। उन्होंने अपने पुरोहिताभिषेक की 50वीं वर्षगाँठ एवं जन्म दिवस के अवसर पर शुभाकामनाओं एवं प्रार्थनाओं के लिए आभार प्रकट किया।

उन्होंने कलीसिया के लिए प्रार्थना करने हेतु धन्यवाद दिया और कहा कि इस ख्रीस्त जयन्ती में आप शांति के लिए प्रर्थना करें। अंत में, उन्होंने अपना प्रेरितिक आशीर्वाद दिया।

18 December 2019, 15:25