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'लौदातो सी' अर्थशास्त्री: फादर गेल जिराउड

धरती का रोना और गरीबों का रोना आपस में जुड़े हुए हैं और हमें उत्तेजित करते हैं। 2015 में प्रकाशित संत पापा फ्राँसिस का विश्वपत्र, "लौदातो सी", इसे स्पष्ट करता है। गेल जिराउड चौदह साल पहले से ही इस बारे में सजग हो गए थे। येसु समाजी अर्थशास्त्री,फादर जिराउड ने अर्थव्यवस्था, वित्त और पारिस्थितिकी के बीच संबंधों के बारे में वर्षों से चिंतन किया और एक आर्थिक मॉडल का प्रस्ताव दिया, जो लोगों का सम्मान करता है और ग्लोबल वार्मिंग के परिणामों से पर्यावरण का संरक्षण करता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

फ्रांस, मंगलवार 2 फरवरी 2021 (वाटिकन न्यूज) :  चाड का तीसरा सबसे बड़ा शहर सारह है जो दक्षिण में स्थित चारी नदी के किनारे बसा हुआ। आज, यह शहर 100 हजार से अधिक निवासियों का घर है। इस शहर में पच्चीस साल पहले, फादर गेल जिराउद दो साल की सिविल सेवा करने के लिए पहुंचे। उन्होंने जेसुइट कॉलेज संत चार्ल्स लवांगा में गणित और भौतिकी पढ़ाया। एक शानदार विश्वविद्यालय कैरियर के साथ इस युवा के लिए एक रहस्योद्घाटन था, जो बाद में सीएनआरएस (फ्रेंच नेशनल सेंटर फॉर साइंटिफिक रिसर्च), फ्रांसीसी वैज्ञानिक अनुसंधान के मुख्यालय में एक शोधकर्ता बन गया।

जेसुइट गेल जिराउड
जेसुइट गेल जिराउड

जेसुइट अर्थशास्त्री कहते हैं, "वर्षों पहले, मैंने इस क्षेत्र में पानी की कमी को देखा जो अभी भी एक सवाना और रेगिस्तान में तेजी से तबदील हो रहा है।" "इसने मुझे, पेरिस के फ्रांसीसी विश्वविद्यालय के संभ्रांत व्यक्ति को जागरूक किया। मरुस्थलीकरण का सवाल, ग्लोबल वार्मिंग, पानी की कमी, मिट्टी के कटाव और जैव विविधता आदि मुद्दों ने मूर्त रुप से मुझे छू लिया।”

गली के बच्चे - गरीबों का रोना

दो साल तक ऐसे शहर में रहना, जहां बिजली भी नहीं थी, इस परिस्थिति  ने जिराउद को इस बार सड़क पर जीने वाले बच्चों की एक और वास्तविकता को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। एक साल साहर में जेसुइट कॉलेज में स्वयंसेवक के रूप में बिताने के बाद, उन्होंने फिर लोगों के बीच दूसरा साल बिताने का फैसला किया, जो बहुत ही गरीबी में जी रहे थे।

हर सुबह जिराउड पानी लाने के लिए कुएं पर जाता था,  एक प्रकार का चूल्हा, कानौने पर चाय तैयार करता था। दिन ब दिन वह सड़क पर रहने वाले बच्चों के साथ धुल मिल गया। उन बच्चों के साथ नहीं जो भीख माँगते थे, जैसा कि  मदरसों (इस्लामिक स्कूल) में पढ़ने के लिए ऐसा करना पड़ता था। जिराउड उन बच्चों के साथ रहते थे जिनके पास अब अपना परिवार नहीं था या वे अपने परिवार को छोड़ने के लिए मजबूर थे क्योंकि वे अपनी माताओं के लिए बहुत अधिक बोझ थे।

 गेल जिराउड ने इन बच्चों के साथ सोने के लिए रेक्स सिनेमा के खंडहरों को चुना। इस प्रकार, बलीम्बा केंद्र का जन्म हुआ। आज यह शहर से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहाँ करीब 40 यहाँ रहते हैं। यहां उन्हें रहने के लिए घर, भोजन और शिक्षा मिलती है। जो लोग हिंसा का प्रदर्शन करते हैं वे स्कूल नहीं जाते हैं, लेकिन साइट पर ही शिक्षक आकर पढ़ा जाते हैं। इसके लिए विशेष रूप से शिक्षकों को धन्यवाद।

सब कुछ जुड़ा हुआ होने का एहसास

जिराउड बताते हैं, "इस अनुभव ने मुझे अपनी आँखों से देखने की अनुमति दी कि जिनके पास कुछ भी नहीं है वे ग्लोबल वार्मिंग के शिकार हैं। अनिवार्य रूप से, जब संत पापा अपने विश्वपत्र लौदातो सी में कहते हैं कि पृथ्वी का रोना और गरीबों का रोना, एक ही तरह का रोना है, मुझे याद है कि बीस साल पहले सड़क के बच्चों ने मुझे चाड में सड़क पर जाने का अनुभव दिया था।"

फ्रांस लौटने के बाद, गेल जिराउड ने एक अर्थशास्त्री के रूप में अपना काम जारी रखते हुए, जेसुइट पुरोहित बनने के लिए धर्मशास्त्रीय अध्ययन किया। "थोड़ा-थोड़ा करके, चाड में रहने का अनुभव और मैंने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में जो कुछ सीखा था, उससे मुझे एहसास हुआ कि एक अर्थशास्त्री के रूप में मेरा काम लोगों पर जलवायु परिवर्तन के असाधारण प्रभाव को समझना था।"

प्रदूषण
प्रदूषण

विश्वास: प्रश्न का और पुष्टि का

फादर गेल जिराउड के विश्वास ने उसके चिंतन और कार्य को प्रभावित किया है। "ख्रीस्तीय धर्म का अनुभव मुझमें एक 'आशा के विरुद्ध आशा' को पोषित करता है। इसका मतलब यह है कि इनकार के पीछे छुपकर "पर्यावरण की स्थिति और विनाशकारी विनाश के बारे में मैंने कोई प्रतिक्रिया नहीं की है - या कि मैंने तुरंत प्रतिक्रिया नहीं दी है - "। साथ ही, वहे कहते हैं, उनका विश्वास बढ़ा है।

जेसुइट बताते हैं, "आज मैं सृष्टि की नाजुकता को और अधिक दृढ़ता से अनुभव करता हूँ, साथ ही तथ्य यह भी है कि सृष्टि को हमारे हाथों में रखा गया है और कार्यवाहकों के रूप में इसकी देखभाल करना हमारी जिम्मेदारी है। यह वही है जिसे संत पापा फ्राँसिस ने ‘लौदैतो सी’ में लिखा था। ये सृष्टि हमारी अपनी खुद की रचना नहीं है: केवल ईश्वर ही सृष्टि के मालिक हैं।”

लेकिन वे खुद "दुनिया का मालिक नहीं, बल्कि उसका सेवक बनना चाहते हैं।"


लौदातो सी, एक घटना

फादर गेल जिराउड ने विश्वपत्र लौदातो सी को "बड़े आश्चर्य के साथ" स्वागत किया। अर्थशास्त्री के अनुसार, यह पाठ " ट्वितीय वेटिकन महासभा  के बाद सबसे महत्वपूर्ण कलीसियाई घटना है"। कई लोगों ने तुरंत महसूस किया कि यह "पहली बार एक अंतर्राष्ट्रीय संस्थान, इस मामले में काथलिक कलीसिया, पारिस्थितिक संकट के मूल मुद्दे के बारे में इतने स्पष्ट, तैयार, सही, वैश्विक तरीके से ले रहा था, जिसका सामना हमारी पीढ़ी कर रही है।”

फादर गेल जिराउड आश्वस्त हैं कि "हम ख्रीस्तियों की एक भूमिका है, इस गंभीर संकट को हल करने की एक जिम्मेदारी हमपर है। मौजूदा स्थिति के मानवशास्त्रीय कारणों में से एक यह अवधारणा है जो यूरोप में 16वीं और 17वीं शताब्दी में दिखाई दिया कि मनुष्य प्रकृति का स्वामी और मालिक है। ख्रीस्तीय मानवविज्ञान इन अवधारणाओं के बीच अंतर करता है। हमें उत्पत्ति की पुस्तक में अभिव्यक्ति "पृथ्वी को अधीन करने" के अर्थ के साथ "सृष्टि के विस्तार" को समझना चाहिए।

इसलिए बाइबिल और आध्यात्मिक परंपरा और विशेष रूप से असीसी के संत फ्रांसिस द्वारा दिखाये गये विश्व बंधुत्व को ध्यान में रखते हुए ख्रीस्तियों को "पारिस्थितिक संकट के समाधान के लिए एक साथ आविष्कार करने की जरुरत है। इसी वजह से येसु धर्मसंघ द्वारा सौंपे गये एक नए मिशन में फादर गेल जिराउड खुद को समर्पित करेंगे: वे संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित वाशिंगटन डीसी के जॉर्ज टाउन विश्वविद्यालय में पर्यावरण न्याय के लिए एक केंद्र बनायेंगे और उसे विकसित करेंगे।

02 March 2021, 15:18