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स्कूल में तोड़-फोड़ स्कूल में तोड़-फोड़ 

गरीबों को शिक्षा से वंजित करने के लिए स्कूल घर को क्षति पहुँचाया

झारखंड में जेस्विट स्कूल को बड़े पैमाने पर हिन्दू चरमपंथियों द्वारा क्षति पहुँचायी गयी है ताकि गरीबों को शिक्षा से वंजित किया जाए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, बृहस्पतिवार, 19 सितम्बर 19 (वीआर आई)˸ झारखंड में जेस्विट स्कूल को बड़े पैमाने पर हिन्दू चरमपंथियों द्वारा क्षति पहुँचायी गयी है ताकि गरीबों को शिक्षा से वंचित किया जाए।

भारत के झारखंड राज्य में साहेबगंज के निकट जेस्विट पुरोहितों द्वारा संचालित संत जॉन बर्कमन्स इंडर कॉलेज मुंडली में 3 सितम्बर को करीब 500 हिन्दू चरमपंथियों ने स्कूल में जमकर तोड़-फोड़ की और कुछ समान भी ले गये जिसके बाद से स्कूल बंद पड़ा है। झगड़े की शुरूआत एक विद्यार्थी द्वारा दूसरे विद्यार्थी को अपमानित करने से हुई थी।

16 सितम्बर को आदिवासी समुदाय के करीब 3,000 लोगों ने एक मौन जूलुस में भाग लेकर, झारखंड में हो रहे ख्रीस्तीय विरोधी हिंसा का विरोध करते हुए न्याय की मांग की।

फादर बिजु एस. जे. ने कहा

दुमका रायगंज प्रोविंस के फादर बिजु सेबास्तियन येसु समाजी ने वाटिकन रेडियो से कहा कि इस बार जो हमला किया गया, इसका उद्देश्य स्कूल के स्टाफ या छात्रों को हानि पहुँचाना नहीं था बल्कि स्कूल घर को क्षति पहुँचायी गयी है। उन्होंने उन सभी चीजों को नष्ट किया, जिनको नष्ट किया जा सकता था। खिड़की के शीशे, कुर्सियाँ, बिजली के तार इत्यादि सभी को नष्ट करने का प्रयास किया गया। स्कूल में तोड़-फोड़ करने के बाद वे छात्रवास की ओर मुड़े और वहाँ भी उन्होंने जिस किसी चीजों को पाया नष्ट कर दिया। उन्होंने गाड़ी को क्षति पहुँचायी, लैपटॉप, मोबाईल फोन और रूपये जो कुछ भी पाया सब अपने साथ ले गये। वे पूरी तरह की तैयारी के साथ अर्थात हथियार से लैस होकर आये थे।

फादर बिजु से पूछे जाने पर कि क्या अंतरधार्मिक वार्ता के द्वारा शांति पूर्ण सह-अस्तित्व कायम किया जा सकता है अथवा क्या यह राजनीतिक मामला है?

उन्होंने कहा कि असल समस्या धार्मिक मामला नहीं है, यानी एक धर्म दूसरे धर्म के लोगों के साथ संघर्ष नहीं कर रहा है क्योंकि विभिन्न धर्मों जैसे हिन्दू, ईसाई और मुसलमानों के बीच अच्छा संबंध है। समस्या तब होती है जब राजनीतिक अधिकारियों द्वारा उन्हें विभाजित करने का प्रयास किया जाता है। वास्तव में, राजनीतिज्ञों का मुख्य मुद्दा धर्म नहीं है क्योंकि उनमें से अधिकतर लोग गिरजा नहीं जाते हैं, मंदिर भी नहीं जाते और न ही मस्जिद जाते हैं। समस्या यह है कि वे लोगों को धर्म के आधार पर बांटना चाहते हैं। वे धर्म के नाम पर अपने लिए फायदा उठाते हैं।   

19 September 2019, 17:35