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अफगानिस्तान का मूसा काला अस्पताल अफगानिस्तान का मूसा काला अस्पताल   (AFP or licensors)

सेव द चिल्ड्रेन : 'अफगानिस्तान में बच्चों के लिए जीवन कठिन'

कलीसिया के उदार संगठन 'सेव द चिल्ड्रेन' (बच्चे बचाओ) द्वारा जारी एक नये रिपोर्ट में दर्शाया गया है कि एक साल पहले जब तालिबान ने अफगानिस्तान को अपने कब्जे में लिया तब से बच्चे पीड़ित हैं, खासकर, बालिकाएँ भूख एवं एकाकीपन झेल रही हैं।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

पिछले साल, दुनियाभर के लोगों ने देखा कि अफगानिस्तान की राजधानी पर तालिबान का कब्जा हो जाने पर अफगानिस्तान छोड़ने के लिए किस तरह लोग बाढ़ के समान कबुल के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे की ओर बढ़ रहे थे।   

उस अराजकता से बारह महीने बाद और अमेरिका के देश से बाहर निकलने के फैसले के उपरांत, परोपकारी संगठन सेव द चिल्ड्रन ने बच्चों के लिए जीवन का विवरण देनेवाली एक नई रिपोर्ट जारी की है।

रिपोर्ट बतलाता है कि तालीबान ने जब से सत्ता पर कब्जा किया है, आर्थिक संकट, गंभीर सूखे और नए प्रतिबंधों ने लड़कियों के जीवन को बिखेर दिया है, उन्हें समाज से बाहर कर दिया है और उन्हें भूखा छोड़ दिया है, जिसमें से एक चौथाई में अवसाद के लक्षण दिखाई दे रही है।

रिपोर्ट से पता चलता है कि 97% परिवार अपने बच्चों के लिए पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने हेतु संघर्ष कर रहे हैं, और लड़कियाँ लड़कों की तुलना में कम खा रही हैं और संकट का बालिकाओं के मानसिक एवं मनोवैज्ञानिक सेहत पर भी प्रभाव पड़ रहा है।

शिक्षा

पिछले अगस्त को तालिबान के कब्जे के बाद, माध्यमिक विद्यालय की हजारों छात्राओं को घर में रहने के आदेश ने लैंगिक समानता में वर्षों की प्रगति को पीछे छोड़ दिया।   

रिपोर्ट दिखलाता है कि स्कूल नहीं जा पाने के कारण लड़कियाँ निराशा और गुस्से में हैं, वे अपने भविष्य के लिए आशाहीन महसूस कर रही हैं क्योंकि पहले जो अधिकार और स्वतंत्रता उन्हें प्राप्त थीं अब वे उनसे वंचित हैं।  

आर्थिक संकट

संकट का दूसरा क्षेत्र है आर्थिक संकट जिसने देश को पंगु बना दिया है। सेव द चिल्ड्रन का कहना है कि "पिछले साल अंतरराष्ट्रीय बलों की वापसी के बाद, अरबों डॉलर की अंतरराष्ट्रीय सहायता एजेंसियाँ वापस ले लिये गए, अफगानिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार जमा हो गये और बैंकिंग प्रणाली ध्वस्त हो गई। उसके बाद के आर्थिक संकट और देश के 30 वर्षों में सबसे भीषण सूखे ने परिवारों को गरीबी में डुबो दिया है।"

रिपोर्ट से पता चलता है कि आर्थिक स्थिति के कारण घरों में न खाने के लिए भोजन है और न बुनियादी वस्तुएँ हैं।

बच्चों पर प्रभाव

देश में बच्चों की वर्तमान स्थिति के बारे बोलते हुए अफगानिस्तान में सेव द चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय निदेशक क्रिस न्यामंदी ने कहा, "तालिबान के कब्जे के एक साल बाद अफगानिस्तान में बच्चों का जीवन संकटपूर्ण है। बच्चे कई रातें भूखे सो रहे हैं। वे थके हुए हैं और बर्बाद हो रहे हैं, खेलने और अध्ययन करने में असमर्थ हैं, जैसे वे करते थे। वे अपना जीवन ईंट की फैक्टरी में बिता रहे हैं, कूड़ा बिन रहे हैं और स्कूल जाने के बदले घर की सफाई कर रहे हैं।"

उन्होंने जोर दिया है कि "बालिकाएँ स्थिति बिगड़ने का खामियाजा झेल रही हैं।" उन्हें भूखे रहना पड़ रहा है, एकाकीपन का सामना कर रही हैं एवं घर में रह रही हैं जबकि लड़के स्कूल जा रहे हैं। यह मानवीय संकट है किन्तु एक बच्चे के अधिकारों का हनन है।"

मानवीय समर्थन

अगस्त 2021 में जब तालिबान ने अफगानिस्तान पर कब्जा किया तभी से सेव द चिल्ड्रेन बच्चों की आवश्यकताओं पर ध्यान देते हुए उनकी मदद हेतु अपना प्रयुत्तर दे रही है।  

संगठन बच्चों को स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, बाल संरक्षण, आश्रय, पानी, स्वच्छता और खाद्य सुरक्षा एवं आजीविका सहायता प्रदान करता है।

सितंबर 2021 से अब तक, यह 2.5 मिलियन से अधिक लोगों तक पहुंच चुका है, जिसमें 1.4 मिलियन बच्चे भी शामिल हैं।

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11 August 2022, 18:11