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श्रीलंका में प्रदर्शन करते लोग श्रीलंका में प्रदर्शन करते लोग  (AFP or licensors)

श्रीलंका ˸ राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के चुनाव पर धर्माध्यक्षों द्वारा दलों से अपील

श्रीलंका के काथलिक धर्माध्यक्षों ने राजनीतियों से अपील की है कि वे अपनी भिन्नताओं को दरकिनार कर, एक राष्ट्रपति और एक प्रधानमंत्री पर सहमत हों जो लोगों का भरोसा जीत सकें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

कोलम्बो, मंगलवार 19 जुलाई 2022 (मैटर्स इंडिया) ˸ कोलम्बो पेज के रिपोर्ट अनुसार, श्रीलंका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि सभी दल अपनी राजनीतिक भिन्नता और एजेंडा को दरकिनार करते हुए, इस समय एक अंतरिम राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री नियुक्त करने के लिए एक समझौता करें जो ईमानदार हो और सभी का विश्वास जीत सके।

अन्यथा, स्थिति बिगड़ती जाएगी और राजनीतिक पार्टियों से लोगों का विश्वास उठ जाएगा।

श्रीलंका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष धर्माध्यक्ष हरोल्ड अंतोनी पेरेरा ने बयान जारी करते हुए देश के राजनीतिक नेताओं से अपील की है कि वे लोगों को अपनी स्वतंत्रता और देश को आगे ले जानेवाले प्रतिनिधियों को चुनने के अधिकार का प्रयोग करने हेतु, आम चुनाव कराने के लिए एक समय सीमा निर्धारित करें।

इससे पहले 13 जुलाई को श्रीलंका के कार्डिनल मालकोम रंजित ने शांति की अपील की थी एवं सभी पार्टियों से आग्रह किया था कि वे संयम बरतें तथा चेतावनी दी थी कि इस नाजुक स्थिति में बाहरी ताकतें देश के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकते हैं।  

कार्डिनल रंजित ने लोगों से अनुरोध किया था कि वे जैसे हैं वैसे ही रहें एवं वर्तमान के संघर्ष का समर्थन करें।

श्रीलंका इस समय सबसे बुरे संकट का सामना कर रहा है। श्रीलंका की राजधानी कोलंबो में हजारों प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रपति आवास पर कब्जा कर लिया है।

पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आँसू गैस छोड़े जो प्रधानमंत्री के कार्यालय के निकट प्रदर्शन कर रहे हैं। आंसू गैस के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने एक बैरिकेड्स तोड़ दिया और प्रधानमंत्री कार्यालय पर भी धावा बोलकर उनके इस्तीफे की मांग की।

प्रदर्शनकारियों ने राजधानी में तीन मुख्य आवासों ˸ राष्ट्रपति आवास, राष्ट्रपति सचिवालय और प्रधानमंत्री के आधिकारिक आवास, मंदिर वृक्ष पर कब्जा जारी रखा है और उनके इस्तीफे की मांग की है।  

एक बयान में कार्डिनल ने कहा है कि जारी संघर्ष ने कुछ मील के पत्थर हासिल किए हैं, और यह सुनिश्चित करने का एकमात्र तरीका है कि उन मील के पत्थरों को मजबूत किया जाए, किसी भी नागरिक पर हमला न किया जाए, और कोई नुकसान न पहुँचाया जाए।

अतः उन्होंने सभी दलों से आग्रह किया है कि वे संयम बरतें, जिससे कि देश की नाजुक स्थिति का बाहरी ताकतें फायदा न उठायें।

श्रीलंका में कुल 22 मिलियन लोग हैं जो एक अभूतपूर्व आर्थिक उथल-पुथल की चपेट में है, जो सात दशकों में सबसे खराब है, जिसमें लाखों लोग भोजन, दवा, ईंधन और अन्य आवश्यक चीजें खरीदने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

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19 July 2022, 15:23