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म्यानमार से भाग निकले रोहिंग्या शरणार्थी, फाईल तस्वीर म्यानमार से भाग निकले रोहिंग्या शरणार्थी, फाईल तस्वीर  (AFP or licensors)

रोहिंग्या शरणार्थियों की जबरन वापसी को रोके भारत सरकार

ह्यूमन राईट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठन ने भारत सरकार से रोहिंग्या शरणार्थियों के म्यांमार निर्वासन को रोकने का आग्रह किया है क्योंकि वे उत्पीड़न के गंभीर जोखिम का सामना कर रहे हैं।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

न्यूयॉर्क, शुक्रवार, 1 अप्रैल 2022 (ऊका समाचार): ह्यूमन राईट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) अंतरराष्ट्रीय अधिकार संगठन ने भारत सरकार से रोहिंग्या शरणार्थियों के म्यांमार निर्वासन को रोकने का आग्रह किया है क्योंकि वे उत्पीड़न के गंभीर जोखिम का सामना कर रहे हैं।

ह्यूमन राईट्स वॉच (एचआरडब्ल्यू) ने कहा कि 22 मार्च को भारत द्वारा एक रोहिंग्या महिला की म्यानमार जबरन वापसी भारत में रोहिंग्या शरणार्थियों के सामने आने वाले जीवन के लिए ख़तरनाक जोखिमों को उजागर करती है। संगठन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून शरणार्थियों की जबरन वापसी को उन जगहों पर प्रतिबंधित करता है जहां उनके जीवन या स्वतंत्रता पर ख़तरा बना रहता है।

अन्तरराष्ट्रीय कानून की अवहेलना

31 मार्च को जारी एक वकतव्य में ह्यूमन राईट्स वॉच की दक्षिण एशियाई शाखा की निर्देशिका मीनाक्षी गाँगूली ने कहा, "भारत सरकार को एक रोहिंग्या महिला को जबरन म्यांमार लौटाने से कुछ हासिल नहीं हुआ है, फिर भी  वह अपने बच्चों से अलग होने और स्वतः को गंभीर जोखिम में डालने के लिये बाध्य की गई है।"

वकतव्य में कहा गया कि म्यांमार में रोहिंग्या शरणार्थियों के जीवन और स्वतंत्रता पर बने ख़तरों के सबूतों के बावजूद भारतीय सरकार का निर्णय मानव जीवन और अंतर्राष्ट्रीय कानून के प्रति क्रूर अवहेलना को दर्शाता है।

आरोप 

भारत में कम से कम 240 रोहिंग्या शरणार्थियों को अवैध प्रवेश के आरोप में हिरासत में रखा जा रहा है। इसके अलावा, संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के अनुसार, 39 शरणार्थियों को दिल्ली के एक आश्रय में हिरासत में रखा गया है, जबकि 235 अन्य शरणार्थी जम्मू के एक होल्डिंग सेंटर में हिरासत में हैं।

यह आरोप भी लगाये गये हैं कि "भारतीय अधिकारी धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से, मुसलमानों के खिलाफ भेदभावपूर्ण नीतियों को अपना रहे हैं, और रोहिंग्या शरणार्थियों के प्रति उनकी नीति उस कट्टरता का स्पष्ट प्रमाण है।"

ह्यूमन राईट्स वॉच का यह भी आरोप है कि भारत में रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को कड़े प्रतिबंधों, मनमानी नजरबंदी, अक्सर राजनीतिक नेताओं द्वारा उकसाए गए हिंसक हमलों और जबरन वापसी के बढ़ते जोखिम का सामना करना पड़ता है। यह भी कहा गया कि 2016 के बाद से, हिंदू चरमपंथी समूहों ने भारत में मुसलमानों पर बढ़ते हमलों के हिस्से के रूप में जम्मू में रोहिंग्या शरणार्थियों को निशाना बनाया है और देश से उनके निष्कासन का आह्वान किया है।

अनुमानित 40,000 रोहिंग्या शरणार्थी भारत में हैं, जिनमें से कम से कम 20,000 शरणार्थी संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (यूएनएचसीआर) के साथ पंजीकृत हैं।

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01 April 2022, 11:52