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सिरिया के आल्लेपो में भोजन के पैकेट्स के लिये एकत्र लोग, तस्वीरः 13.03.21 सिरिया के आल्लेपो में भोजन के पैकेट्स के लिये एकत्र लोग, तस्वीरः 13.03.21  (© WFP/Hussam Al Saleh)

विश्व खाद्य दिवस: जलवायु संकट ही भूख संकट है

16 अक्टूबर को मनाये जानेवाले विश्व खाद्य दिवस के उपलक्ष्य में वाटिकन न्यूज़ को दी एक भेंटवार्ता में विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रवक्ता मार्टिन पेन्नर ने वैश्विक खाद्य असुरक्षा तथा कोविद 19 के नकारात्मक प्रभाव के कारण पहले से ही पीड़ित देशों की कठोर वास्तविकता पर प्रकाश डाला।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

रोम, शुक्रवार, 15 अक्तूबर 2021 (वाटिकन न्यूज़): 16 अक्टूबर को मनाये जानेवाले विश्व खाद्य दिवस के उपलक्ष्य में वाटिकन न्यूज़ को दी एक भेंटवार्ता में विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रवक्ता मार्टिन पेन्नर ने वैश्विक खाद्य असुरक्षा तथा कोविद 19 के नकारात्मक प्रभाव के कारण पहले से ही पीड़ित देशों की कठोर वास्तविकता पर प्रकाश डाला।

सन्त पापा फ्राँसिस के शब्दों का हवाला देते हुए विश्व खाद्य कार्यक्रम के प्रवक्ता मार्टिन पेन्नर ने कहा कि सन्त पापा ने भुखमरी को "बुनियादी मानवाधिकारों का उल्लंघन करनेवाला अपराध" कहा है, जिसे न तो अनदेखा किया जा सकता है और न ही उदासीन रहा जा सकता है।

विश्व खाद्य दिवस

विश्व खाद्य दिवस की तैयारी के मद्देनज़र श्री पेन्नर ने इस तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित कराया कि वर्षों की गिरावट के बाद, विश्व में भुखमरी की दर लगातार बढ़ रही है। उनके अनुसार, फिलहाल, "विश्व में लगभग 81 करोड़ लोग क्षुधा पीड़ित हैं"। उन्होंने कहा कि "यदि आप एक ग्राफ को देखते हैं" तो  2017 तक संख्याएं बहुत स्पष्ट रूप से नीचे जाती हैं, किन्तु इसके बाद वे धीरे-धीरे ऊपर जाने लगती हैं। हालांकि, हाल ही में "वृद्धि काफी महत्वपूर्ण रही है"।

हाल के आँकड़े

विश्व में व्याप्त भुखमरी पर सबसे हालिया रिपोर्ट जुलाई में जारी की गई थी और यह दर्शाती है कि 16 करोड़ दस लाख अधिक पुरुष, महिलाएं और बच्चे "संघर्ष, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक मंदी के कारण भुखमरी के शिकार हुए हैं"। दुर्भाग्यवश, भूख से सर्वाधिक पीड़ित देश हैं: यमन, दक्षिणी सूडान, अफगानिस्तान, हैती, सोमालिया और कांगो। उन्होंने कहा, "ये वे स्थान हैं जो दुर्भाग्यवश कई वर्षों से संघर्ष कर रहे हैं"।

कोविद महामारी के प्रभाव

यह स्थिति कोविद महामारी के कारण बद से बदत्तर हो गई है, जिसे श्री पेन्नर "एक दुखद गुणक" के रूप में वर्णित करते हैं। वे बताते हैं कि "यह उन चुनौतियों के शीर्ष पर एक और परत है जिसका सामना निर्धन लोग पहले से ही कर रहे हैं"। उन्होंने कहा कि हम कल्पना नहीं कर सकते कि इस महामारी का उन परिवारों पर क्या प्रभाव पड़ा होगा, जो  पहले से ही युद्ध, संघर्ष, राजनैतिक व आर्थिक उथल-पुथल तथा जलवायु परिवर्तन जैसी ससमस्याओं से जूझ रहे थे।

श्री पेन्नर ने कहा कि यह मुख्य रूप से नौकरी के नुकसान के सन्दर्भ में है, जिसमें वे लोग जो पहले से ही हाशिये पर जीवन यापन कर रहे थे, "अर्थव्यवस्था अनुबंध के रूप में अपना रोज़गार खो रहे हैं तथा भोजन खरीदने में असमर्थ हैं। कई लोग अपनी संपत्ति और सामान बेचने के लिये बाध्य हैं, जिससे उनकी स्थिति केवल बदत्तर होती जा रही है।

कॉप-26

पेन्नर ने चेतावनी दी कि जलवायु परिवर्तन वास्तव में तमाम विश्व में भुखमरी पैदा करने वाले मुख्य कारकों में से एक है। उन्होंने कहा कि यह सन्तोष का विषय है कि कॉप- 26 सम्मेलन के कारण लोगों में जलवायु संकट के विषय में जागरुकता बढ़ रही है।

जलवायु परिवर्तन पर वैश्विक संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन कॉप-26 के लिए नवंबर माह में विश्व के लगभग 200 नेता ग्लासगो में बैठक करेंगे, जहां देशों से यह बताने के लिए कहा जाएगा कि वे इससे निपटने की योजना कैसे बना रहे हैं और किस तरह नई प्रतिबद्धताओं को रेखांकित कर रहे हैं।

परमधर्मपीठ की ओर से भी एक प्रतिनिधिमण्डल कॉप 26 में उपस्थित रहेगा। इस सन्दर्भ में श्री पेनर ने कहा कि सन्त पापा फ्राँसिस की आवाज़ निर्णायक है। उन्होंने कहा,  "विश्व के भूखे और कमजोर लोगों पर सन्त पापा जो ध्यान देते हैं वह बहुत ही महत्वपूर्ण है।" उन्होंने कहा, "परमधर्मपीठ की उपस्थिति तथा सन्त पापा का सन्देश यह सुनिश्चित करने में मदद करता है कि ये मुद्दे विश्व नेताओं के एजेंडे पर मजबूती से बने रहें"।

15 October 2021, 11:23