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कॉक्स बाजार शहर के पास, बलूखली शिविर कॉक्स बाजार शहर के पास, बलूखली शिविर  

बांग्लादेश के शरणार्थी शिविर पर हमले में सात लोगों की मौत

बांग्लादेश म्यांमार की सीमा पर रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में दहशत का माहौल बढ़ता जा रहा है। 22 अक्टूबर को कॉक्स बाजार शहर के पास, बलूखली शिविर में एक इस्लामिक मदरसा पर हमले में सात लोग मारे गए और कम से कम 20 घायल हो गए।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

ढाका, बुधवार 27 अक्टूबर 2021 (वाटिकन न्यूज) : 29 सितंबर को कॉक्स बाजार में एक जातीय समुदाय के नेता, मानवाधिकार रक्षक और अराकान रोहिंग्या सोसाइटी फॉर पीस एंड ह्यूमन राइट्स (एआरएसपीएच) के संस्थापक मोहिब उल्लाह की हत्या के बाद शरणार्थी शिविरों में तनाव बढ़ रहा है। अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी के कार्यकर्ता (एआरएसए) रोहिंग्या मिलिशिया जो म्यांमार सेना से लड़ती है, हालांकि, हत्या में शामिल होने से इनकार करती है और असली अपराधियों को खोजने के लिए जांच की मांग करती है। नवीनतम गोलीबारी के कारणों की जांच कर रही पुलिस ने बताया कि शिविरों में जहां 900,000 से अधिक शरणार्थी रहते हैं, सुरक्षा को मजबूत किया गया है। कारितास बांग्लादेश और यूएनएचसीआर द्वारा प्रचारित विभिन्न सामाजिक सहायता कार्यक्रमों में  शरणार्थियों को सभ्य जीवन स्थितियों की ओर ले जाने के लिए बढ़ावा दिया गया है।

कारितास बांग्लादेश

कारितास बांग्लादेश आपात्कालीन प्रतिक्रिया प्रोग्राम के संचालक इम्मानुअल चयन बिस्वास ने फीदेस को बताया कि शरणार्थियों के स्वागत कार्यक्रम पर काम करते हुए बिताए तीन साल, ठोस एकजुटता और आशा की पेशकश करने की कोशिश में, शरणार्थियों को आश्रयों से गुजरते हुए देखा गया है, अस्थायी आश्रयों से अधिक स्थिर आश्रयों में और मनोवैज्ञानिक आघात के साथ यहां पहुंची महिलाएं और बच्चे सामान्य जीवन जीने के लिए वापस लौटते हैं।

कार्डिनल डी'रोज़ारियो दवारा कॉक्स बाजार का दौरा

हाल ही में कॉक्स बाजार में दुनिया के सबसे बड़े शरणार्थी शिविर का दौरा करने वाले ढाका के महाधर्माध्यक्ष सेवानिवृत कार्डिनल पैट्रिक डी'रोज़ारियो ने फीदेस को यह भी बताया कि कैसे कारितास बांग्लादेश जातीय अल्पसंख्यकों के "जीवन की कुछ बुनियादी जरूरतों को पूरा करने और एक अच्छी शरण देने में सक्षम है," और यह कैसे पहले से ही एक कदम आगे का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने समझाया कि कारितास के काम, "समर्पण, सहायता, अच्छी सहायता योजना ने वास्तव में पर्यावरण को एक मानवीय चेहरा दिया है।" शिविर के अपने पहले दौरे की याद करते हुए उन्होंने कहा, "जब मैं पहली बार यहां पहुंचा और देखा कि हर कोई दुखी था। नजदीक बुलाने पर भी वे पास नहीं आए। अब मैं सुव्यवस्थित शिविर देखता हूँ, जहां लोग मानवीय रूप से रहते हैं। हम उनके करीब हैं, लेकिन अन्य देशों की एकजुटता की भी जरूरत है।"

रोहिंग्या समुदाय के मानवाधिकारों की सुरक्षा

सभी की आशा यह है कि रोहिंग्या म्यांमार लौटने में सक्षम होंगे और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय यह सुनिश्चित करने के लिए काम कर रहा है। लेकिन अगर शरणार्थी नागरिकता सहित अपने अधिकारों में सुरक्षित महसूस नहीं करते हैं, तो वे वापस नहीं जाना चाहेंगे। उन्होंने कहा, "इन लोगों को अच्छी तरह से अपने देश में स्वीकार किया जाना चाहिए, उनकी रक्षा की जानी चाहिए, उन्हें मानव विकास और तरक्की में साथ दिया जाना चाहिए।"  स्थिति अभी भी बहुत जटिल है। वास्तव में, म्यांमार रोहिंग्या को नागरिकों के रूप में मान्यता नहीं देता है, जिससे विदेशों में शरण के लिए आवेदन करने की प्रक्रिया जटिल हो जाती है। कार्डिनल ने कहा, "हम उन लोगों के लिए अपना दिल खोलते हैं जिन्हें इस दुनिया में अस्तित्व की गारंटी देने के लिए हमारे समर्थन की आवश्यकता है।"

 रोहिंग्या बच्चों और किशोरों के मौलिक अधिकारों का उल्लंघन

विश्व शरणार्थी दिवस के अवसर पर जून में प्रकाशित ‘सेव द चिल्ड्रन’ की रिपोर्ट "नो सेफ हेवन" के अनुसार, एशिया भर में 700,000 से अधिक रोहिंग्या बच्चों और किशोरों को गंभीर भेदभाव और मौलिक अधिकारों के उल्लंघन का सामना करना पड़ता है। उनमें से ज्यादातर अपने मूल देश म्यांमार से बाहर रहते हैं। एशिया में सेव द चिल्ड्रन के क्षेत्रीय निदेशक हसन नूर ने कहा कि उन्हें म्यांमार में नागरिकता प्रदान करके "रोहिंग्याओं की सुरक्षा और सम्मान की गारंटी तुरंत दी जानी चाहिए, लेकिन यह भी सुनिश्चित करना है कि अन्य देशों में उनके शरणार्थी अधिकारों का सम्मान किया जाता है, जहाँ वे शरण लिये हुए हैं। बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार के बिना, रोहिंग्या नाबालिगों की एक पूरी पीढ़ी बेहतर जीवन नहीं जी पाएगी और उन देशों के विकास में योगदान नहीं दे पाएगी जिनमें वे रहते हैं।"

27 October 2021, 15:23