जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी
वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 6 अगस्त 2021 (रेई, वाटिकन न्यूज़): अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठनों एवं व्यापार अधिकारियों से गठित ख्रीस्तीय संगठन (यूनियापाक) के प्रतिनिधि, मानवीय मूल्यों पर आधारित समाज के निर्माण हेतु सन्त पापा फ्राँसिस के आह्वान में शामिल होते हुए, यूरोपीय अर्थव्यवस्था पर पुनर्विचार हेतु एकजुट हुए हैं।
ख्रीस्तीय व्यापारियों का संघ श्रम संगठनों के साथ मिलकर उचित मज़दूरी की मांग कर रहा है जो सामाजिक एवं न्यायिक स्तर पर विकास के लिये उपयोगी हो और साथ ही मांग और उत्पादकता के लिये भी लाभकर हो।
अर्थव्यवस्था मानवीय मूल्यों पर हो आधारित
अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठनों एवं व्यापार अधिकारियों से गठित ख्रीस्तीय संगठन, (यूनियापाक), काथलिक एवं विभिन्न ख्रीस्तीय सम्प्रदायों का एक संयुक्त संगठन है, जो विश्व के लगभग 45,000 कारोबारी नेताओं का प्रतिनिधित्व करता है।
यूरोपीय ट्रेड यूनियन कन्फेडरेशन, (ईटीयूसी) के साथ जारी एक बयान में, उन्होंने "कम मजदूरी, असुरक्षित नौकरियां, खराब काम करने की स्थिति और नकली स्व-रोज़गार अनुबंधों पर शोक व्यक्त किया जो यूरोपीय संघ की अर्थव्यवस्था के कुछ हिस्सों में विकास का मॉडल बन गए हैं तथा जिसके परिणास्वरूप, दस में से एक यूरोपीय मज़दूर पर निर्धनता का ख़तरा बना हुआ है।"
ईटीयूसी एवं यूनियापाक के लिए, "यह स्थिति अस्वीकार्य है।" इन संगठनों ने यूरोपीय संघ से यह सुनिश्चित करने का आह्वान किया है कि पूर्णकालिक श्रमिकों को उनके परिवारों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त भुगतान किया जाए। "वे यूरोपीय संघ से यह सुनिश्चित करने का आह्वान करते हैं कि पूर्णकालिक श्रमिकों को उनके परिवारों का समर्थन करने के लिए पर्याप्त भुगतान किया जाए। उचित वेतन, काम की गरिमा, श्रमिकों की गरिमा और हर कामगार को अभाव से मुक्त जीवन जीने का अधिकार दिया जाये।"
क्रान्तिकारी रूपान्तरण
सन्त पापा फ्राँसिस की अपील में आवाज़ मिलाते हुए उक्त संगठनों ने कहा कोविद-19 महामारी से उभरने का अर्थ होना चाहिये, यूरोप की अर्थव्यवस्था पर पुनर्विचार। उन्होंने स्मरण दिलाया कि सन्त पापा फ्राँसिस ने रचनात्मक परिवर्तन का आह्वान किया है तथा एक अलग तरह की अर्थव्यवस्था के निर्माण की चुनौती दी है। सन्त पापा ने सभी की खुशहाली का ख़्याल रखते हुए और अधिक मानवीय समाज के निर्माण की दिशा में एक क्रान्तिकारी रूपान्तरण का आह्वान किया है।
यूरोप की सरकारों का उक्त संगठनों ने आह्वान किया कि वे ज़िम्मेदारी के साथ नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने के लिये काम करें ताकि प्रत्येक मज़दूर और कामगार अपने परिवार का भरण-पोषण करने, मकान का किराया देने तथा अपने बच्चों को शिक्षा एवं स्वास्थ्य जैसी सुविधाएँ उपलब्ध कराने में समर्थ बन सके।