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मानडाले में लोग ऑक्सीजन की  खाली सिलेंडर भराने के इन्तजार में मानडाले में लोग ऑक्सीजन की खाली सिलेंडर भराने के इन्तजार में  (AFP or licensors)

यूएन: तख्तापलट के छह महीने बाद भी म्यांमार का हालात बदतर

म्यांमार की बिगड़ती मानवीय स्थिति के बीच, विस्थापित लोगों की बढ़ती संख्या, खाद्य संकट और कोविड -19 संक्रमणों में वृद्धि के साथ, संयुक्त राष्ट्र ने लोगों के साथ अपनी निरंतर एकजुटता और उपस्थिति का वादा किया है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन न्यूज

यांगून, सोमवार 2 अगस्त 2021 (वाटिकन न्यूज) : म्यांमार में सैन्य तख्तापलट के 6 महीने बाद, गरीब राष्ट्र को गंभीर राजनीतिक, सामाजिक-आर्थिक, मानवाधिकारों के एक बढ़ते संकट में डाल दिया है।

म्याँमार में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष सहायता अधिकारी, कार्यवाहक मानवीय सहायता व रैज़िडैण्ट कॉर्डिनेटर रामनाथन बालकृष्णन ने बताया कि 1 फरवरी को म्यांमार की नेता आंग सान सू की और उनकी चुनी हुई सरकार को उखाड़ फेंकने के बाद से सेना ने देश भर में लोगों को बुरी तरह प्रभावित किया है। तब से, जुंटा सुरक्षा बल प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों पर भारी कार्रवाई कर रहा है। बालकृष्णन ने यूएन न्यूज को बताया, "देश में अब अस्थिरता और बिगड़ती सामाजिक-आर्थिक और असुरक्षा स्थिति है और इसके अलावा, हमारे पास कोविद ​​-19 की एक उग्र तीसरी लहर है।"

देश में संयुक्त राष्ट्र के शीर्ष अधिकारी ने, अनेक नस्लीय अल्पसंख्यकों के बहुमत वाले प्रान्तों में, देश की सैन्य सत्ता के विरोध में जारी सशस्त्र प्रतिरोध को रेखांकित करते हुए कहा कि अभी तक 2 लाख से भी ज़्यादा लोगों को अपने घर छोड़ने के लिये मजबूर होना पड़ा है। इनमें शान, चिन और काचिन प्रान्त शामिल हैं।

बढ़ता विस्थापन

रामनाथन बालाकृष्णन ने कहा कि सैन्य तख़्तापलट से पहले, राख़ीन प्रान्त में संयुक्त राष्ट्र के मानवीय सहायता कार्यक्रम के तहत, लगभग एक लाख लोगों तक पहुँचने का लक्ष्य था, जिनमें देश के भीतर ही विस्थापित हुए ऐसे लोग भी शामिल थे जिन्हें आपात सहायता की ज़रूरत थी, लेकिन इस संख्या में काफ़ी बढ़ोत्तरी हो गई है।

उन्होंने कहा कि सैन्य तख़्तापलट के बाद, अतिरिक्त 2 लाख लोगों की, मानवीय सहायता के तुरन्त ज़रूरतमन्दों के रूप में पहचान की गई है, और ऐसे ज़्यादातर लोग यांगून व मण्डाले के शहरी इलाक़ों में थे।

गहराते संकट और बिगड़ती सामाजिक-आर्थिक स्थिति के कारण, हर दिन हज़ारों लोग मानवीय सहायता के दायरे में धकेले जा रहे हैं।

रामनाथन बालाकृष्णन ने भी संयुक्त राष्ट्र बाल कोष – यूनीसेफ़ द्वारा बच्चों के ख़राब हालात पर व्यक्त की गई चिन्ता दोहराते हुए, सेना द्वारा नागरिक विरोध प्रदर्शनों पर, बड़े पैमाने पर किये जा रहे घातक बल प्रयोग की तीखी भर्त्सना की।

बढ़ती भुखमरी

उन्होंने बताया कि निकट भविष्य पर नज़र डालें तो म्याँमार में, संयुक्त राष्ट्र की प्राथमिकताओं में एक ये भी है कि देश में लाखों लोग, भुखमरी के दायरे में ना धकेल दिये जाएँ।

“दैनिक जीवन में काम आने वाली उपभोक्ता वस्तुओं के दामों में काफ़ी बढ़ोत्तरी देखी गई है जो बहुत से लोगों के लिये काफ़ी ज़्यादा है... इसके कारण, बहुत से लोग सस्ती और आसानी से उपलब्ध होने वाली भोजन वस्तुएँ ख़रीदने को मजबूर हैं और परिणामस्वरूप उनकी ख़ुराकों में पोषण की मात्रा कम हो गई है।”

उन्होंने चेतावनी भरे शब्दों में कहा कि म्याँमार में, स्वास्थ्य व्यवस्था, कोरोनावायरस स्वास्थ्य संकट और चिकित्सा कर्मचारियों व सुविधाओं पर हो रहे हमलों के कारण, बहुत दबाव का सामना कर रही है। इसके साथ-साथ कुछ स्वास्थ्यकर्मियों द्वारा सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाए जाने के कारण भी, देश भर में बुनियादी सेवाएँ बाधित हुई हैं।

म्याँमार के लोगों का साथ देना

म्याँमार में, शीर्ष यूएन अधिकारी रामनाथन बालाकृष्णन ने, देश के लोगों के साथ एकजुटता प्रकट करते हुए ज़ोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र, देश के लोगों की इच्छा का सम्मान करने के लिये संकल्पबद्ध है।

उन्होंने कहा, “संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार हनन के मामलों पर आवाज़ उठाने और म्याँमार के लोगों तक, जीवनदायी मानवीय सहायता पहुँचाते रहने के लिये संकल्पबद्ध है। साथ ही कोविड-19 महामारी का मुक़ाबला करने के लिये भी आवश्यक सहायता मुहैया कराई जाती रहेगी।”

02 August 2021, 15:18