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मोगादिशु जेल में अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन मोगादिशु जेल में अत्याचार के खिलाफ प्रदर्शन 

अत्याचार करने वाले अपने अपराधों से बच नहीं सकते, संयुक्त राष्ट्र

अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अत्याचार एक अपराध है। संयुक्त राष्ट्र 26 जून को अत्याचार सह रहे पीड़ितों के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय दिवस को चिह्नित करता है, जिसमें हर जगह हर किसी से दुनिया भर में उन सैकड़ों हजारों लोगों का समर्थन करने का आग्रह किया जाता है जो आज भी यातना के शिकार हुए हैं और जिन्हें आज भी प्रताड़ित किया जाता है।

माग्रेट सुनीता मिंज- वाटिकन सिटी

न्यूयार्क, सोमवार 28 जून 2021 (वाटिकन न्यूज) : संयुक्त राष्ट्र प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आग्रह कर रहे हैं कि यातना देने वालों को उनके अपराधों से खारिज न होने दें, और उन प्रणालियों को नष्ट या परिवर्तित किया जाना चाहिए जो यातना की अनुमति देते हैं। संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने शनिवार को अत्याचार के पीड़ितों के समर्थन में अंतर्राष्ट्रीय दिवस के अवसर पर एक संक्षिप्त संदेश में कहा, "आइए हम यातना के पीड़ितों का सम्मान करें और एक ऐसी दुनिया को प्राप्त करने के लिए काम करने के लिए प्रतिबद्ध हैं जहां इस तरह का दुरुपयोग नहीं हो सकता है।"

12 दिसंबर, 1997 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 26 जून को यातना के पीड़ितों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में स्थापित करने का एक प्रस्ताव अपनाया। इसका उद्देश्य यातना को पूरी तरह से मिटाना और कन्वेंशन अगेंस्ट टॉर्चर (सीएटी) को प्रभावी ढंग से लागू करना है। संयुक्त राष्ट्र, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य देशों, नागरिक समाज और हर जगह व्यक्तियों सहित सभी हितधारकों से दुनिया भर में उन सैकड़ों हजारों लोगों के समर्थन में एकजुट होने का आग्रह करता है जो आज भी यातना के शिकार हुए हैं और जिन्हें आज भी प्रताड़ित किया जाता है।

यातना पर प्रतिबंध अनिवार्य है- हर परिस्थिति में

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि प्रत्येक दिन इस परम सिद्धांत का उल्लंघन होता है- यातना गृहों, जेलों, पुलिस स्टेशनों, मनोरोग संबंधी संस्थानों और अन्य स्थानों पर।

हम यातना के ख़िलाफ संयुक्त राष्ट्र संधि के सार्वभौमिक सत्यापन की ओर बढ़ रहे हैं। वर्तमान में 166 देशों ने इसे स्वीकार किया है। राष्ट्रीय क़ानून और नियम-पद्धतियां इस संधि के अनुरूप हैं, इसके जरिए ही यह सुनिश्चित किया जा सकता है कि हम कथनी को करनी में बदल रहे हैं। यातना को प्रतिबंधित करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।

अक्सर बंद दरवाजों के पीछे ही यातनापूर्ण कृत्यों को अंजाम दिया जाता है। इसलिए स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय और राष्ट्रीय मानवाधिकार संस्थानों के लिए यह जरूरी है कि वे इन बंद दरवाजो को खोलें। यातना की रोकथाम पर संयुक्त राष्ट्र उपसमिति यही करती है। वह राष्ट्रीय रोकथाम प्रणालियों के सहयोग से हर साल 100 से अधिक जेलों और अन्य संस्थानों का दौरा करती है और 1,000 से अधिक कैदियों, अधिकारियों, कानून प्रवर्तन कर्मचारियों और मेडिकल स्टाफ से बातचीत करती है।

न्याय, पुनर्वास

अपनी तरफ से हमें पीड़ितों का समर्थन करना चाहिए और उनके पुनर्वास एवं शिकायत निवारण के अधिकारों के प्रति सम्मान को सुनिश्चित करना चाहिए। पीड़ितों पर केंद्रित ये दृष्टिकोण, यातना के पीड़ितों के लिए संयुक्त राष्ट्र स्वैच्छिक कोष का मार्गदर्शन करता है जोकि हर वर्ष लगभग 80 देशों में 50,000 पीड़ितों की सहायता करता है। इसने यौन एवं लिंग आधारित हिंसा सहित यातना के भिन्न-भिन्न प्रकारों को समझने में हमारी मदद की है। साथ ही इस संबंध में भी हमारी समझदारी विकसित की है कि भिन्न-भिन्न पीड़ितों को किस प्रकार की विशेष सहायता की जरूरत होती है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने कहा कि यातना का दुष्चक्र व्यक्ति की इच्छा शक्ति को तोड़ता है। यातना के पीड़ितों के समर्थन में संयुक्त राष्ट्र अंतरराष्ट्रीय दिवस के अवसर पर मैं सभी राज्यों का आह्वान करता हूँ कि वे अपराधियों को क्षमा करना बंद करें और मानवता की अवहेलना करने वाले निंदनीय कृत्यों पर लगाम लगाएं।

28 June 2021, 15:41