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मुम्बई के झुग्गियों में रहने वाले बच्चे मुम्बई के झुग्गियों में रहने वाले बच्चे 

यूनिसेफ : कोविड-19 का दक्षिणी एशिया के बच्चों पर बुरा असर

संयुक्त राष्ट्र अंतर्राष्ट्रीय बाल आपात निधि फंड ने कहा है कि कोविड-19 की पहली लहर ने दक्षिण एशिया में करीब 2,28,000 बच्चों और कुछ ही महीनों के अंदर 11,000 बच्चों की जान ले ली है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

यूनिसेफ, बृहस्पतिवार, 6 मई 2021 (रेई)- संयुक्त राष्ट्र के बाल आपात निधि फंड (यूनिसेफ) ने दक्षिणी एशिया के सरकारों से अपील की है कि वे कोविड-19 की तबाही को रोकने के लिए हर संभव प्रयास करें, क्योंकि यह बच्चों पर बहुत बुरा असर डाल रहा है।

दक्षिणी एशिया के लिए यूनिसेफ के क्षेत्रीय निदेशक जॉर्ज लारेया अदजेई ने मंगलवार को चेतावनी देते हुए कहा, "दक्षिण एशिया में घातक नए उछाल से हम सभी को खतरा है। यदि इसे जल्द से जल्द न रोका जाए तो यह महामारी पर कड़ी मेहनत से अर्जित वैश्विक नियंत्रण को उलटने की क्षमता रखता है।”

उन्होंने सरकारों से अपील की कि जहाँ तक बन पड़े वे इस विनाश को रोकने की कोशिश करें और जितने लोग मदद भेज सकते हैं वे तत्काल मदद भेजें। अंतरराष्ट्रीय समुदाय को तुरन्त कदम उठाना चाहिए। यह केवल नैतिक कर्तव्य नहीं है।"  

लारेया ने व्यक्तिगत जिम्मेदारी के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, "हम जो भी निर्णय लेते हैं, उसमें इस उछाल को बदलने की - और हमारे आसपास के लोगों के जीवन को सुरक्षित रखने या खतरे में डालने की क्षमता होती है। हम थक सकते हैं, लेकिन वायरस नहीं।”

यूनिसेफ के अधिकारी ने सभी लोगों को उनकी व्यक्तिगत जिम्मेदारी की याद दिलायी है कि सभी को मास्क लगाना है, साबून से अच्छी तरह हाथ धोना है, दूरी रखना है और यदि अवसर मिले तो वैक्सिन लेना है।

बच्चे

जब विभिन्न देश सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल का सामना करने की कोशिश कर रहे हैं, यूनिसेफ अधिकारी ने कहा है कि "हम बच्चों पर महामारी के गहरे असर को नहीं भूल सकते। बच्चे पहले की अपेक्षा अधिक संख्या में सीधे संक्रमित हो रहे हैं। वे अपने माता-पिता और अभिभावकों को खो रहे हैं, ऐसी परिस्थिति में पड़ रहे हैं कि कभी किसी बच्चे को उसमें नहीं पड़ना चाहिए। वे अपने स्कूल एवं सहायता नेटवर्क से भी कट जा रहे हैं।"

उन्होंने खेद प्रकट करते हुए कहा कि चूंकि उन संसाधनों और सेवाओं को मोड़ दिया जा रहा है जिनपर आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए बहुत भरोसा किया जाता है – इसमें नियमित टीकाकरण कार्यक्रम भी शामिल है – यह अब पूरी तरह बंद न भी हो, पर समझौता होने का खतरा जरूर है। "यदि ऐसा हुआ तो इसके सबसे अधिक शिकार, सबसे कमजोर बच्चे एवं परिवार होंगे।"

लारेया ने बताया कि महामारी की पहली लहर ने दक्षिण एशिया में आवश्यक सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और उपयोग में भारी कटौती की, जिससे अनुमानतः 2,28,000 बच्चों और 11,000 माताओं का जीवन खतरे में पड़ गया। उन्होंने कहा कि आवश्यक स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण सेवाओं को जारी रखने और महिलाओं एवं बच्चों के लिए इन सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए।

पूरे दक्षिण एशिया में संक्रमण बढ़ रहा है

संयुक्त राष्ट्र के विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दक्षिण एशिया में संक्रमणों में खतरनाक वृद्धि की ओर इशारा किया है। इसके अनुसार  इस क्षेत्र में 90 प्रतिशत से अधिक संक्रमण और मौतें भारत में हो रही हैं।

विश्व स्तर पर भारत में संक्रमण दर 46 प्रतिशत एवं मृत्यु दर 25 प्रतिशत है।

कोविड -19 मामलों की भारत की आधिकारिक गणना मंगलवार को 20 मिलियन पार कर गई, जबकि मौतों की संख्या 2,20,000 है।

मालदीव, नेपाल, पाकिस्तान और श्रीलंका में भी मामले बढ़ रहे हैं। नेपाल में स्थिति विशेष रूप से भयावह है, जहां इस सप्ताह मामलों में 137 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।

 

06 May 2021, 16:14