खोज

Vatican News
नई दिल्ली में बैंक्वेट हॉल को अस्थायी अस्पताल में परिणत किया गया है नई दिल्ली में बैंक्वेट हॉल को अस्थायी अस्पताल में परिणत किया गया है  (AFP or licensors)

भारत के धर्माध्यक्षों ने की सरकार से अपील

भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय ने मंगलवार को कोविड-19 के 3,23,144 नये मामले दर्ज किये तथा 2,771 लोगों की मौत हो गई।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, मंगलवार, 27 अप्रैल 2021 (वीएनएस)- कार्डिनल जॉर्ज अलेनचेरी ने सरकार से अपील की है कि वह ऑक्सिजन को मानव अधिकार के रूप में घोषित करे, जब देश को जीवन रक्षक गैस की अत्यधिक कमी का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सैकड़ों कोविड -19 रोगियों की मृत्यु हो रही है।  

संघीय सरकार से अपील करते हुए कार्डिनल ने कहा, "चिकित्सा ऑक्सीजन की उपलब्धता को एक बुनियादी मानवीय अधिकार मानते हुए, जीवन के लिए कठिन संघर्ष कर रहे लोगों को इसे उपलब्ध कराने का शीघ्र उपाय करे जो अस्पतालों एवं स्वास्थ्य सेवा केंद्रों की सुविधा पाने की कोशिश कर रहे हैं।"

कार्डिलन अलेंचेरी की यह अपील तब आयी है जब राजधानी दिल्ली और राज्यों के सभी सरकारी एवं निजी अस्पतालों की स्थिति कोविड-19 मरीजों को जीवन रक्षा हेतु ऑक्सीजन की आवश्यकता के कारण अत्यन्त बिगड़ गई है।     

अप्रैल माह के शुरू से ही भारत के कई शहरों के अस्पतालों ने बेड और ऑक्सीजन आपूर्ति में कमी महसूस किया है जब महामारी बेकाबू होने लगा।  

महामारी की दूसरी लहर ने कहर बरपाया है, देश में सभी चिकित्सा सुविधाओं को कमजोर कर दिया है और लोगों को ऑक्सीजन के अभाव में अस्पतालों के अंदर भी मरने के लिए मजबूर किया है।

पिछले कुछ दिनों से हर दिन कोरोना वायरस के 3 लाख से अधिक नये मामले सामने आ रहे हैं, जिसके कारण बहुत सारे लोगों को अस्पतालों में बेड नहीं मिल पा रहा है और अपने ही घरों में उनकी मौत हो रही है।  

उन्होंने कहा कि यह सरकार की बड़ी जिम्मेदारी है कि वह सभी अस्पतालों एवं स्वास्थ्य केंद्रों में ऑक्सीजन उपलब्ध कराये। सोशल मीडिया में ऑक्सीजन और चिकित्सा देखभाल के बिना अस्पतालों के सामने एम्बुलेंस में मरनेवाले लोगों का भयावह दृश्य, चिकित्सा के बुनियादी ढांचे के पतन को उजागर करता है।

कार्डिनल अलेनचेरी चाहते हैं कि संघ एवं राज्य सरकारें ऑक्सीजन को मानव अधिकार घोषित करें जब इसपर काला बाजारी हो रहा है एवं लाचार लोगों से बहुत अधिक कीमत लिये जा रहे हैं।

25 अप्रैल को उन्होंने कहा, "हम वास्तव में भोजन, कपड़ा और मकान को मानव की मौलिक आवश्यकता मानते हैं जिसकी आपूर्ति सरकार को करना चाहिए, अब कोविड-19 प्रकोप बढ़ने के साथ लोगों का जीवन अत्यधिक खतरे में है तथा जान बचाने के लिए ऑक्सीजन की अति आवश्यकता है।"  

पूर्वी रीति की सिरो मलाबार काथलिक कलीसिया के शीर्ष एवं केरल के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष कार्डिनल अलेनचेरी ने कहा है कि मेडिकल ऑक्सीजन को भी भोजन, कपड़े एवं आवास के समान उपलब्ध किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, "कई लोग हैं जो अत्यधिक कीमत के कारण खुले बाजार में मेडिकल ऑक्सीजन नहीं खरीद सकते। महत्वपूर्ण बात ये है कि हमारे देश में इस संकट की घड़ी में, हमारे सभी नागरिकों के लिए यह उपलब्ध होना चाहिए।"

इसे इस मौलिक आवश्यकता के रूप में देखते हुए देश के नागरिकों के लिए मुफ्त में उपलब्ध कराया जाना चाहिए, न कि फायदा पाने का जरिया बनाना चाहिए।  

इस बीच, चीन, अमेरिका, ब्रिटेन, यूएई, सऊदी अरब, सिंगापुर, भूटान से भारत के लिए मदद भेजी जा रही है।  

26 अप्रैल को भारत में कोविड-19 से 2,812 लोगों की मौत हुई और 3,52,991 नये मामले दर्ज हुए। अब तक कोविड-19 संक्रमण के कुल 17 मिलियन केस दर्ज हुए हैं एवं करीब 1,98,000 लोगों की मौत हो गई है।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने उका न्यूज से कहा कि मृतकों की संख्या "बस एक हिमशैल का सिरा है। यह केवल सकारात्मक परीक्षण के बाद सरकारी अस्पतालों में मरने वालों की गिनती है।”

उन्होंने कहा कि "इसमें घर एवं निजी अस्पतालों में मरने वालों की संख्या नहीं है। जबकि लोग बिना जाँच और चिकित्सा सुविधा के गाँवों में मर रहे हैं। यदि सभी को गिना जाता तो यह हमारी कल्पना के परे होता।"

27 April 2021, 16:43