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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नादिया मुराद से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नादिया मुराद से मुलाकात करते संत पापा फ्राँसिस  (Vatican Media)

नादिया मुराद ˸ पोप की इराक यात्रा सभी अल्पसंख्यकों के लिए आशा का चिन्ह

नोबेल शांति पुरस्कार विजेता नादिया मुराद ने हाल में की गई, संत पापा फ्राँसिस की इराक यात्रा को देश के अल्पसंख्यकों, खासकर, यजीदियों के लिए आशा का चिन्ह कहा।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 20 मार्च 2021 (रेई)- नादिया मुराद का अत्याधिक साहस यजीदी लोगों एवं उन सभी महिलाओं के लिए एक मिसाल बन गया है जो हिंसा की शिकार हुई हैं।  

2014 में नादिया तथाकथित इस्लामिक स्टेट के आतंकियों द्वारा अपहृत होकर तीन महीनों तक उनकी गुलाम रहीं। आतंकवादी उस समय अल्पसंख्यक आबादी को भगाने के लिए एक क्रूर अभियान कर रहे थे।  

अकथनीय हिंसा की शिकार होने के बावजूद, नादिया ने हार नहीं मानी और अब वह जर्मनी में अपने दत्तक गृह से हिंसा के हर रूप के खिलाफ बोलती हैं।

उन्होंने 2018 में संत पापा फ्राँसिस से मुलाकात की थी और उन्हें आत्मकथा की पुस्तक "द लास्ट गर्ल" भेंट की थी। पोप ने इराक की प्रेरितिक यात्रा से वापस लौटते हुए विमान में पत्रकारों से कहा था कि इसने उन्हें गहराई से प्रभावित किया।

वाटिकन मीडिया को दिए एक साक्षात्कार में नादिया मुराद ने इराक में संत पापा की प्रेरितिक यात्रा के फलों की उम्मीद को बतलाया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से एक हार्दिक अपील भी की कि वह उन याजिदी महिलाओं को मुक्त होने में मदद दे, जो अब भी जिहादियों के चंगुल में हैं।

सवाल- दुनिया भर के मीडिया ने सर्वसम्मति से पोप फ्रांसिस की इराक यात्रा को ऐतिहासिक बताया है। आपकी राय में, इस यात्रा पर इराकी लोगों के दिलों में क्या है?

उत्तर - न केवल पोप फ्रांसिस की इराक यात्रा अपने आप में ऐतिहासिक है, बल्कि यह इराकी लोगों के लिए एक ऐतिहासिक समय भी है, क्योंकि वे नरसंहार, धार्मिक उत्पीड़न और दशकों के संघर्ष से पुनर्निर्माण कर रहे हैं। पोप की यात्रा ने शांति और धार्मिक स्वतंत्रता की क्षमता पर प्रकाश डाला। यह प्रतीक है कि सभी इराकी – चाहे उनका विश्वास जो भी हो- समान रूप से गरिमा और मानव अधिकारों के योग्य हैं। संत पापा ने एक स्पष्ट संदेश दिया है कि इराक की अंतरधार्मिक संरचना में सुधार लाने के लिए समाज को अल्पसंख्यकों की चंगाई को समर्थन देते हुए शुरू करना चाहिए, खासकर, यजीदियों के जिन्हें हिंसा एवं भेदभाव का सामना करना पड़ा है।

सवाल – विमान में पत्रकारों से बोलते हुए संत पापा फ्राँसिस ने कहा था कि उनकी इराक यात्रा का एक प्रमुख कारण था आपकी किताब "द लास्ट गर्ल" को पढ़ना। अपने पहले भाषण में, जिसे उन्होंने देश के अधिकारियों को संबोधित किया था, उन्होंने यज़ीदियों की पीड़ा को याद किया था। पोप के लिए आपकी यह प्रेरणा कितना महत्वपूर्ण है?

उत्तर- 2018 में पोप फ्रांसिस के साथ मेरी मुलाकात के दौरान, हमने यजीदी समुदाय के नरसंहार के अनुभव के बारे में गहन चर्चा की थी, विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों द्वारा सहन की गई हिंसा की। मुझे खुशी है कि मेरी कहानी उनके साथ रही और इस संदेश ने उन्हें इराक जाने के लिए प्रेरित किया।

सवाल- आज आप एक नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, संयुक्त राष्ट्र सद्भावना राजदूत हैं, और आपने नादिया की पहल की स्थापना की है, जो हिंसा की शिकार महिलाओं की मदद करने के लिए एक संगठन है। जितने दर्द झेले हैं, उन सभी को अच्छाई में बदलने  की ताकत आपको कहां से मिली?

उत्तर - सभी यज़ीदियों ने अपने अस्तित्व और लचीलापन में बहुत ताकत दिखाई है। पूरे समुदाय को भारी आघात लगा है। हम अपने दम पर अपने जीवन को पुनः प्राप्त और पुनर्निर्माण नहीं कर पाएंगे। समुदाय को समर्थन और संसाधनों की सख्त जरूरत है। नादिया की पहल मूर्त और स्थायी समर्थन प्रदान करके समुदाय को उनकी वसूली में सशक्त बनाने का प्रयास कर रही है।

20 March 2021, 16:42