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अमरीकी कवित्री अमंदा गोरमन अमरीकी कवित्री अमंदा गोरमन   (AFP or licensors)

अमंदा गोरमन ˸ कविता बोलती है मेल-मिलाप की भाषा

युवा अमरीकी कवित्री अमंदा गोरमन जिन्होंने अमरीका के नये राष्ट्रपति जोसेफ बाइडेन के उद्घाटन समारोह में अपनी कविता से अमरीका का दिल जीत लिया, उन्होंने शिक्षा के महत्व, कविता की शक्ति एवं युवा महिलाओं के समर्पण द्वारा शुरू किए गए आंदोलनों पर वाटिकन न्यूज और ओस्सेरवातोरे रोमानो से अपना विचार साझा किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 13 फरवरी 2021 (रेई)- अमरीका की मीडिया इससे सहमत है ˸ कि अमंदा गोरमन ने राष्ट्रपति जो बाइडन के उद्धाटन में अपनी कविता से दर्शकों को मोह लिया है। सिर्फ 22 साल की उम्र में अमरीका में राष्ट्रपति उद्धाटन समारोह में कविता प्रस्तुत करनेवाली वे सबसे छोटी कवित्री बन गईं हैं। अफ्रीकी–अमरीकी काथलिक युवा ने "पर्वत जिसमें हम चढ़ते हैं" की अपनी प्रस्तुति से अमरीका और पूरे विश्व को प्रभावित किया है। उन्होंने "चंगाई" प्राप्त मानवता के स्वप्न को साकार किया, एक ऐसा स्वप्न जो पीड़ा में आशा प्राप्त करता तथा संघर्ष एवं विभाजन को प्रबल होने हेतु त्याग नहीं करता। वाटिकन न्यूज एवं ओस्सेरवातोरे रोमानो के साथ एक साक्षात्कार में अमंदा ने ध्रुवीकरण से भरे समय में  कविता की शक्ति को मेल-मिलाप का साधन बतलाया है। उन्होंने शिक्षा में निवेश करने की आवश्यकता को रेखांकित किया है क्योंकि इसके द्वारा दुनिया बदल सकती है तथा यह युवा पीढ़ी को बेहतर भविष्य प्रदान कर सकती है।     

संत पापा फ्राँसिस ने सेतु का निर्माण करने, वार्ता एवं मेल-मिलाप के लिए साहस के साथ कार्य करने के संबंध में कई अवसरों पर जोर दिया है। क्या आप सोचती हैं कि कविता घावों को चंगा कर सकती है जो हमारे विश्व को बांटता है?

निश्चय ही, कविता मेल-मिलाप की भाषा है। यह अक्सर हमारी उत्तम छवि एवं आम मूल्य की याद दिलाती है। यही विरासत है जिसको मैंने "पर्वत जिसपर हम चढ़ते हैं" उसे लिखते हुए सीखा। मैंने अपने आप से पूछा, "यह कविता यहाँ और अभी क्या कर सकती है जिसको गद्य नहीं कर सकती?" कविता में यही खास शक्ति है जो कलह के बीच भी शुद्ध, पवित्र एवं परिशुद्ध करती है।

कविता को अक्सर बुदधिजीवियों अथवा प्रौढ़ लोगों के साथ जोड़ा जाता है। आप युवाओं से क्या कहेंगी जो आपकी कविता से प्रभावित हैं और आपकी उम्र की सराहना करती हैं?  

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कविता को स्कूलों में ऐसा सिखाया जाता है कि यह बूढ़े, मृत, श्वेत और पुरूषों के बौद्धिक अभिजात वर्ग की रणभूमि है जबकि कविता लोगों की एक भाषा है। मैं युवाओं से कहना चाहूँगी कि कविता जीवंत और बदलनेवाली है और कला का एक रूप है जो चुनिंदा दल के लिए नहीं बल्कि सभी लोगों के लिए है। हमें आपकी आवाज की जरूरत है, आपकी कहानियों की जरूरत है इसलिए आप कलम उठाने से न डरें।  

मलाला, ग्रेटा थम्बर्ग और अब अमंदा गोरमन ˸ हाल के वर्षों में हमने कई युवा महिलाओं को आंदोलनों के नेता के रूप में उठते देखा है जो पृथ्वी के शक्तिशाली लोगों को चुनौति दे रही हैं। क्या आप सोचती हैं कि यह एक स्थायी परिवर्तन लायेगा?

मैं सोचती हूँ कि हम युवा महिलाओं ने एक वैश्विक मंच प्राप्त किया है क्योंकि यह वृहद वैश्विक परिस्थिति का प्रतिनिधित्व करता है ˸ युवा खासकर, विश्व की युवा महिलाएँ उठ रही हैं और इतिहास में अपना स्थान ले रही हैं, क्योंकि अमंदा में, मेरे समान असंख्य लोग हैं। मैं अनोखी हो सकती हूँ किन्तु किसी भी तरह से अकेली नहीं हूँ। दुनिया अगली पीढ़ी द्वारा हिलायी और बदली जानेवाली है और यह समय है कि हम उन्हें सुनें।  

एक बच्ची के रूप में आपको वाक् दोष थी जिससे आप ऊपर उठ गई हैं और आज दुनिया आपकी वाक्पटुता की प्रशंसा कर रही है। आपके विचार से, दुनिया को बदलने के लिए शिक्षा कितनी महत्वपूर्ण है?

शिक्षा सब कुछ है। मैं एक शिक्षक की बेटी हूँ, अतः मैंने अपनी शिक्षा को हमेशा गंभीरता से लिया है। मैंने छोटी उम्र में ही जाना कि ज्ञान शक्ति है। हाशिये के लोगों के लिए एक उपकरण बॉक्स में यह सबसे महत्वपूर्ण उपकरण है। दुनिया को बदलने के लिए इसपर सवाल किया जाना चाहिए, इसकी जाँच की जानी चाहिए, पूरे इतिहास को देखा जाना और देखा जाना चाहिए कि यह वर्तमान से किस तरह जुड़ा है। मुझे संदेह नहीं है कि कई महान सामाजिक आंदोलन की शुरूआत अध्ययनकक्ष से होगी।  

13 February 2021, 14:13