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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (AFP or licensors)

पर्यावरण: यूएन द्वारा पृथ्वी के युवा चैम्पियनों का सम्मान

हर साल, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनइपी) 7 वैज्ञानिकों, इंजीनियरों, उद्यमियों और कार्यकर्ताओं को पृथ्वी के युवा पुरस्कारों से सम्मानित करता है, जो स्थायी पर्यावरण परिवर्तन के लिए साहसिक विचारों और समाधानों के साथ काम करते हैं।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार16 दिसम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज) : मंगलवार को, यूएन पर्यावरण कार्यक्रम के पृथ्वी के युवा चैम्पियनों 2020 में, संयुक्त राष्ट्र के पर्यावरण चैम्पियनों के रूप में 7 युवाओं के नाम घोषित किये गए।  दुनिया भर के सात देशों से 30 से कम उम्र वाले युवाओं को दुनिया की पर्यावरणीय समस्याओं से निपटने के लिए उनकी प्रतिबद्धता के लिए मान्यता दी गई।

सात पुरस्कार विजेताओं को एक सार्वजनिक नामांकन प्रक्रिया के बाद विशेषज्ञों की एक वैश्विक जूरी द्वारा चुना गया था। पृथ्वी के युवा चैंपियनों 2020 के विजोताओं को इस सप्ताह की शुरुआत में संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण सम्मान दिया गया है, जिनके कार्यों का पर्यावरण पर परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ रहा है।

इस साल के युवा चैंपियनों में केन्या के नजांबी मेटी, चीन के शियाओयुआन रेन, भारत के विद्युत मोहन, ग्रीस के लेपरिस अरापकिस, पेरू के मैक्स हिडाल्गो क्विंटो, संयुक्त राज्य अमेरिका के निरिया एलिसिया गार्सिया और कुवैत के फतेमा अल्जेलजेला हैं। प्रत्येक को बीज वित्त पोषण में  10,000 अमेरिकी डॉलर प्राप्त होगा और उनके विचारों को बढ़ाने में मदद करने के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा।

केन्या के नजांबी मेटी

अफ्रीका में केन्या के इंजीनियर नजांबी मेटी ने अपनी नौकरी छोड़ दी और अपनी जीवन को एक प्रणाली विकसित करने में लगा कर दिया ताकि प्लास्टिक के कचरे को पक्के पत्थरों में बदल दिया जा सके।

अमेरिका की निरिया एलिसिया गार्सिया

 संयुक्त राज्य अमेरिका में गार्सिया ने चिनूक सामन प्रजातियों को बचाने के लिए अपने कई साल समर्पित किए हैं, जिनकी संख्या लंबे समय से पश्चिम अमेरिका में लुप्तप्राय हो रही है।

पेरू के मैक्स हिडाल्गो क्विंटो

दक्षिण अमेरिका में पेरू के मैक्स हिडाल्गो क्विंटो एक आविष्कारक ने एक ऐसी मशीन विकसित की है जो हवा से पानी को बाहर निकालने में सक्षम है, एक ऐसा आविष्कार जो सूखाग्रस्त समुदायों के लिए एक जीवन रेखा के रूप में है।

ग्रीस के लेपरिस अरापकिस

भूमध्यसागरीय जल में भारी मात्रा में प्लास्टिक के कचरे के कारण चिंतित, अरापकिस ने ग्रीस के पहले पेशेवर मछली पकड़ने के स्कूल की शुरुआत की, जिसमें मछली पकड़ने के लिए स्थानीय मछुआरों को समुद्र से प्लास्टिक इकट्ठा करने की शिक्षा दी गई, जिससे मछली स्टॉक और पारिस्थितिक तंत्र दोनों ठीक हो सके।

कुवैत की फतेमा अल्जेलजेला

कुवैत की फतेमा अल्जेलजेला ने एक गैर-लाभकारी रीसाइक्लिंग पहल शुरू की जो घरों, स्कूलों और व्यवसायों के कचरे के लिए पेड़ों और पौधों का आदान-प्रदान करती है। 2019 में इसकी शुरुआत के बाद से, उसके उद्यम ने 130 टन धातु, कागज और प्लास्टिक का पुनर्नीवीनीकरण किया है।

चीन के शियाओयुआन रेन

रेन एक डेटा प्लेटफ़ॉर्म का नेतृत्व करता है, जो ग्रामीण चीन के एक हज़ार गाँवों में भूजल की गुणवत्ता का परीक्षण और रिकॉर्ड करता है, ताकि निवासियों को पता चले कि स्वच्छ पानी कहाँ मिलेगा।

भारत के इंजीनियर विद्युत मोहन

एशिया में भारत के एक इंजीनियर विद्युत मोहन ने अपशिष्ट बायोमास को ईंधन, उर्वरक और रसायनों में बदलने की एक सुरक्षित विधि विकसित की है, जिससे ना केवल ऊर्जा पैदा होती है, बल्कि हवा को भी साफ़-सुथरा रखने में मदद मिलती है और अन्ततः जलवायु परिवर्तन में भी कमी होती है।

विद्युत मोहन ने एक ऐसी सचल मशीन बनाई है जो खेतीबाड़ी के कूड़े-कचरे को इस तरह जलाती है कि उससे ना तो वातावरण में हानिकारक ग्रीनहाउस गैसें फैलती हैं, बल्कि वो ऐसे चारकोल और खाद में तब्दील हो जाता है जिसे किसान बाद में इस्तेमाल कर सकते हैं.

भारत में, किसान, आमतौर पर अपने खेतों में फ़सलों की उपज लेने के बाद बचे कूड़े, मसलन धान और गेहूँ की उपज के बाद बची पुआल को वहीं पर जलाते रहे हैं। इससे ना केवल वातावरण में ख़तरनाक प्रदूषण फैलता है, जिससे अस्थमा और दिल की बीमारियाँ जैसी स्वास्थ्य समस्याएँ पैदा होती हैं, बल्कि उस आग से वातावरण में काले कार्बन के छोटे-छोटे कण भी फैलते हैं जिनसे अन्ततः जलवायु परिवर्तन को बढ़ावा मिलता है।

पिछले कई वर्षों के दौरान, भारत की राजधानी दिल्ली के आसपास के प्रान्तों में, किसानों द्वारा इसी तरह से कूड़ा-कचरा अपने खेतों में जलाए जाने के कारण, दिल्ली में सर्दियों में गहरा और विषैला कोहरा छा जाने से आबादी को बहुत सी स्वास्थ्य परेशानियाँ होती रही हैं।

16 December 2020, 14:01