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अमरीका ˸ मतदान के बाद एकता की चुनौती

अमेरिका अब देश के हालिया इतिहास में सबसे विभाजनकारी राष्ट्रपति चुनावों के बाद सामंजस्य की परीक्षा का सामना कर रहा है। अब्राहम लिंकन से लेकर संत पापा फ्राँसिस तक ने विविधता में एकता के मूल्य की याद दिलायी है, जो सार्वजनिक हित के निर्माण और समाज की प्रगति के लिए एक आवश्यक शर्त है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

अमरीका, सोमवार, 9 नवम्बर 2020 (वीएन) - "यदि किसी घर में फूट पड़ गयी हो तो वह घर टिक नहीं सकता।"(मार. 3,25) संत मारकुस लिखित सुसमाचार के इस वाक्य से प्रेरित होकर अब्राहम लिंकन ने 16 जून 1858 को इसका उच्चारण किया था, जो उस समय के सीनेटर उम्मीदवार थे। उन्होंने अपने भाषण में इस बात पर जोर दिया था कि कैसे युवा अमेरिकी लोकतंत्र आधे राज्यों के साथ गुलामी की अनुमति नहीं दे सकता। अमेरीका के भावी राष्ट्रपति का यह भाषण, जो पिछली एक और आधी सदी में अनगिनत बार उद्धृत किया गया था, हमेशा के लिए अमरीकी लोगों के लिए एक हिदायत बन गया, जो संस्थापकों द्वारा चुने गए शब्दों के साथ उनकी मुहर पर भी खुदा हुआ है और जो एकता के सिद्धांत की याद दिलाता है: ई प्लुरिबस अनम। 

"एकता संघर्ष से महान है।" (एवंजेली गौदियुम) अमरीका में हाल के इतिहास में सबसे विभाजनकारी और अमेरिकी राष्ट्रपति चुनावों के ध्रुवीकरण के बाद, इस समय यह वाक्य दृढ़ता से उभरकर सामने आ रहा है।

अमरीका के नवनियुक्त राष्ट्रपति जोए बाईडन एवं नवनियुक्त उपराष्ट्रपति कमला हेर्रीस को बधाई देते हुए, अमरीका के काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के अध्यक्ष महाधर्माध्यक्ष जोश एच. गोम्स ने कहा है, "अब यह समय है हमारे नेताओं का राष्ट्रीय एकता की भावना से एक साथ आने का।" इसके अलावा, अमेरिकी मीडिया ने, लगभग सर्वसम्मति से, राष्ट्रीय सामंजस्य के विषय को सबसे जरूरी चुनौती के रूप में रखा है।

गौरतलब है कि विगत 30 जून को संत पापा फ्राँसिस ने काथलिक प्रेस एसोसियेशन  को प्रेषित एक संदेश में एकता के मुद्दे पर ध्यान केंद्रित किया था, जिसमें उत्तरी अमरीका के काथलिक संचार संगठन आते हैं। संत पापा ने अपने संदेश में ए प्लुरिबुस उनाम, अर्थात् विविधता में एकता के विचार पर प्रकाश डाला था और कहा था कि इससे जन कल्याण के लिए किये गये सेवा कार्यों को भी प्रेरित होना चाहिए। आज इसकी कितनी अधिक आवश्यकता है जो संघर्ष और ध्रुवीकरण से बहुत अधिक प्रभावित है जिससे काथलिक समुदाय भी मुक्त नहीं है। हमें उन पत्रकारों की जरूरत है जो सेतु का निर्माण कर सकें, जीवन की रक्षा कर सकें और उन दृश्य एवं अदृश्य दीवारों को तोड़ सके जो लोगों और समुदायों के बीच निष्कपट वार्ता एवं सच्चे संचार को रोकते हैं।" ये शब्द मीडिया जगत को कहे गये थे किन्तु अमरीकी समाज के दूसरे क्षेत्रों में भी लागू हो सकते हैं।          

निश्चय ही, संत पापा के लिए एकता का अर्थ एकरूपता नहीं है। संत पापा के दृष्टिकोण से इस खास पृष्टभूमि पर हम बहुतल की छवि को देख सकते हैं जो इसके सभी भागों के अभिसरण को दर्शाता है, जो इसकी प्रत्येक विशिष्टता को संरक्षित रख सकता है। यह मॉडल उन देशों के लिए अधिक मान्य है जो अपने जन्म से ही बहु-जातीय, बहुसांस्कृतिक और बहु-धार्मिक है। एकता की इस खोज में- फ्रातेल्ली तूत्ती को प्रतिध्वनित करने के लिए सामाजिक मित्रता हालांकि, अपने आप में अंत नहीं है, लेकिन यह व्यक्ति और समुदाय की भलाई के लिए है। इन्हीं बातों को संत पापा ने 24 सितम्बर 2015 को संयुक्त राष्ट्र के कॉन्ग्रेस के सामने अपने भाषण में रखा था।

अमरीकी कॉन्ग्रेस का आह्वान करते हुए संत पापा ने कहा था कि "यदि राजनीति मानव व्यक्ति की सचमुच सेवा करता है, तब यह अर्थव्यवस्था और वित्त का गुलाम नहीं बनेगा। इसके बजाय, राजनीति, हमारी उस तरह जीने की सम्मोहक आवश्यकता की अभिव्यक्ति है, कि यह एक सबसे बड़ी आम अच्छाई बन सके, एक ऐसा समुदाय जो न्याय और शांति, अपनी सम्पति, अपने हितों, अपने सामाजिक जीवन को साझा करने के लिए विशेष हितों का त्याग करता है।" संत पापा फ्राँसिस ने कहा था कि मैं इसमें शामिल कठिनाई को कम नहीं समझता, लेकिन मैं आपको इस प्रयास से प्रोत्साहित करता हूँ कि इस प्रबोधन की गूँज आज, संयुक्त राज्य अमेरिका के इतिहास के ऐसे नाजुक क्षण में, और भी अधिक दृढ़ता से गूँजे।

09 November 2020, 16:47