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महाधर्माध्यक्ष इवान यूर्कोविच महाधर्माध्यक्ष इवान यूर्कोविच  

परस्पर संवाद शांति, स्वतंत्रता का मार्ग है, परमधर्मपीठ

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के लिए परमधर्मपीठ के प्रतिनिधि ने परस्पर संवाद पर एक पुस्तक प्रकाशन में भाग लिया। उनका कहना है कि शांति और सच्ची स्वतंत्रता केवल संवाद के आधार पर ही संभव है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

जेद्दाह, गुरुवार 26 नवम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज) : महाधर्माध्यक्ष इवान यूर्कोविच ने हाल ही में "शांति और बंधुत्व के एक साधन के रूप में अंतरधार्मिक और अंतरसांस्कृतिक संवाद को बढ़ावा" नामक पुस्तक की प्रस्तुति में भाग लिया।

यह कार्यक्रम सऊदी अरब के जेद्दाह में हुआ और विश्व मुस्लिम लीग और संयुक्त राष्ट्र विश्वविद्यालय द्वारा शांति के लिए आयोजित किया था।

जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र के संगठनों के लिए वाटिकन के स्थायी पर्यवेक्षक ने पुस्तक के तीन "सुनहरे धागे" को रेखांकित किया : मानव भाईचारा, न्याय, तथा शांति के लिए एक उपकरण के रूप में संवाद।

भ्रातृत्व से अहिंसात्मक मार्ग खुलता है

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा कि मानव भाईचारा एक विचार है, जो राष्ट्रों से विचारधारा, राष्ट्रीय स्वार्थ और जातिवाद के सभी रूपों को दूर करने की क्षमता रखता है।

उन्होंने संत पापा फ्राँसिस को पिछले साल मानव भाईचारे के दस्तावेज़ पर हस्ताक्षर करने और लोगों के बीच "सामंजस्य और बंधुत्व" पर ध्यान देने की याद दिलाई।

यह देखते हुए कि कोई भी समाज पूरी तरह से धार्मिक रूप से समरूप नहीं है, महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा कि धर्म एक "बहुरंगा प्रकाश" का उत्सर्जन करते हैं जो प्रत्येक को "एक अहिंसात्मक दृष्टि में" रोशनी देता है।

उन्होंने "संवाद की सभ्यता" और "संघर्ष की असभ्यता" के बीच एक तीव्र विषमता की ओर इशारा किया, जो इनके बीच का रास्ता पेश नहीं करता है।

उन्होंने कहा, "संघर्ष से बचने के लिए, ईमानदारी से आदान-प्रदान और खुले संवाद की एक भ्रातृत्व संस्कृति विकसित करना अनिवार्य है।"

न्याय के लिए सहिष्णुता और स्वतंत्रता की आवश्यकता

न्याय के विषय की ओर मुड़ते हुए, महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा, "जब न्याय जीतता है, तो शांति वापस आ जाती है।"

 शांति और न्याय साथ-साथ जाते हैं और प्रत्येक व्यक्ति के मानव अधिकारों और समान गरिमा की रक्षा करने की आवश्यकता है।

"जब मानव गरिमा की रक्षा की जाती है, तो पुरुष और महिलाएं सत्य की तलाश के लिए खुद को एक निर्विवाद विवेक के साथ समर्पित करने के लिए स्वतंत्र होते हैं।"

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा कि धार्मिक स्वतंत्रता, मानवाधिकारों की सूची में सबसे ऊपर है, क्योंकि यह लोगों की "अंतर्निहित आवश्यकता" पर आधारित है ताकि उनकी आत्मा को पोषण मिले।

उन्होंने धार्मिक सहिष्णुता और धार्मिक स्वतंत्रता के बीच अंतर के बारे में भी बताया। "यह आपसी भाईचारे की अधिक गतिशील अवधारणा पर धार्मिक परंपराओं के बीच बेहतर संबंधों को सुविधाजनक बनाने के लिए अधिक फलदायी हो सकता है," उन्होंने कहा, "क्योंकि यह न केवल किए गए कार्यों के लिए, बल्कि उन लोगों के लिए भी एक खाता सौंपने की क्षमता देता है।"

संवाद शांति को संभव बनाता है

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने तब वर्णन किया कि कैसे संवाद शांति की खोज के लिए आधार प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि पारस्परिक रूप से समृद्ध संवाद का मतलब है कि सभी पक्षों को बोलने का अधिकार है और सुनना उनका कर्तव्य है।

"किसी भी प्रामाणिक संवाद के ये आवश्यक घटक दो आंतरिक विशेषताओं से उत्पन्न होते हैं, जो प्रत्येक मनुष्य के पास होती हैं,  अर्थात्  प्रत्येक व्यक्ति मानवीय गरिमा का वाहक होता है और "उस सत्य की एक किरण के साथ चमकता है जो सभी मानव को मंत्रमुग्ध करता है।"

उन्होंने कहा कि ख्रीस्तीय इस सार्वभौमिक वास्तविकता का वर्णन करते हैं कि मनुष्य ईश्वर की छवि और समानता में बनाया गया है। मानव गरिमा संवाद की अनुमति देती है, जबकि सत्य की खोज "विभिन्न धार्मिक बयानों के बीच एक प्रामाणिक संवाद" के लिए रास्ता बनाती है।

महाधर्माध्यक्ष यूर्कोविच ने कहा, संवाद, इसलिए शांति और बंधुत्व को प्राप्त करने का मुख्य साधन है और अंततः ईश्वर को किसी भी मानव संवाद में प्रस्तुत करता है।

26 November 2020, 14:51