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"फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था" का ऑनलाईन कार्यक्रम असीसी में "फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था" का ऑनलाईन कार्यक्रम असीसी में  (ANSA)

फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था: महामारी के राख से एकात्मता उत्पन्न करना

"फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था" के ऑनलाईन कार्यक्रम के दूसरे दिन शुक्रवार को प्रतिभागियों ने वित्त, अर्थव्यवस्था, समाजशास्त्र, और पारिस्थितिकी किस तरह एक दूसरे से जुड़े हैं के सवाल पर प्रकाश डाला।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शनिवार, 21 नवम्बर 2020 (रेई)- इटली के असीसी शहर से शुक्रवार को जब ऑनलाईन कार्यक्रम शुरू हुआ आयोजकों ने आश्चर्य व्यक्त किया कि किस तरह पहले दिन के कार्यक्रम ने यूट्यूब में 48,000 से अधिक व्यूस प्राप्त किये। करीब 2,000 युवा अर्थशास्त्रियों और उद्यमियों ने सीधे भाग लेने के लिए साईन-अप किया था।

"फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था" के पहले सत्र में वैश्विक अर्थव्यवस्था एवं उन्हें किस तरह बेहतर किया जा सकता है उन सामाजिक आयामों पर विचार किया गया, साथ ही संत फ्राँसिस असीसी से प्रेरणा प्राप्त करने की कोशिश की गई।

उत्पादन से देखभाल तक

सम्मेलन का शीर्षक था "उत्पादकता", संबंधित संसाधन और सामाजिक अर्थव्यवस्था"। सत्र को प्रोफेसर मौरो मगात्ती के साथ शुरू किया गया जो इटली के मिलान में पवित्र हृदय काथलिक विश्व विद्यालय में एक समाजशास्त्री एवं अर्थशास्त्री हैं।

प्रोफेसर मगत्ती ने कहा कि वर्तमान अर्थव्यवस्था प्रणाली उत्पादकता पर आधारित है तथा व्यक्ति की हैसियत मानव व्यक्ति के रूप में न होकर एक उपभोक्ता के रूप में है।

उन्होंने युवा पीढ़ी से अपील की कि वे आर्थिक संकेतकों के निर्माण की दिशा में उस मानक से दूर जाएँ जो उत्पादकता के विचार पर ध्यान देते हैं। इस विस्तृत पारामीटर के साथ यह अर्थव्यवस्था उत्पादन और सम्पूर्ण मानव जाति पर इसके प्रभाव पर भी ध्यान देगा।  

खुली अर्थव्यवस्था की ओर

प्रोफेसर मगत्ती ने कहा कि यह चार परिवर्तन कालों की मांग करता है- एक विकास परिवर्तन काल जो लोगों को बढ़ने में मदद दे; एक संगठनात्मक परिवर्तन काल जो विवश किये बिना लोगों की क्षमताओं और विचारों को पहचान सके; सामुदायिक परिवर्तन काल – जिसको कलीसिया में सहयोग के सिद्धांत के रूप में जाना जाता है ताकि खुले समुदायों का निर्माण किया जा सके जो भविष्य के रास्तों की खोज करता है; और चौथा, पर्यावर्णीय परिवर्तनकाल जो पीढ़ियों और सृष्टि को एक साथ जोड़ता है।

उन्होंने अंत में कहा, "उत्पादक अर्थव्यवस्था एक ऐसे भविष्य को पुनः खोल देता है जो बंद हो चुका था।"

अर्थ की खोज

दूसरे वक्ता लेओनार्दो बेकेत्ती जो रोम के तोर वेरगाता विश्वविद्यालय के अर्थशास्त्री हैं उन्होंने राजनीतिक आर्थव्यवस्था पर इसके प्रभाव पर अपना विचार पेश किया।

उन्होंने कहा, "एक उत्पादक अर्थव्यवस्था का अर्थ है अर्थशास्त्र के दो-आयामी दृष्टिकोण से आगे बढ़ना जिसका केंद्र बाजार और संस्थान है जो "हमारी पॉकेटबुक के साथ मतदान की सक्रिय नागरिकता" और जिम्मेदार पूर्ण व्यावसायिक गतिविधि पर ध्यान देता है। इस तरह की पहल व्यक्ति को अर्थव्यवस्था प्रणाली में अर्थ पाने में मदद देगा।

प्रोफेसर बेकेत्ती ने कहा कि उत्पादकता, व्यक्तिगत जीवन में सार्थकता उत्पन्न करने  और उसे विकसित करने का एक उत्तम रास्ता है।

सिर्फ लाभ के लिए नहीं

कार्यक्रम में दूसरे दिन के प्रमुख वक्ता थे मोहम्मद युनुस जो बंगलादेशी अर्थशास्त्री और सामाजिक उद्यमी हैं। उन्हें 2006 में नोवेल शांति पुरस्कार से नवाजा गया था। उन्होंने लघु वित्त के विचार पर प्रकाश डाला, जो कम आय वाले व्यक्तियों को अपने सपनों को आगे बढ़ाने के लिए छोटे व्यवसाय ऋणों तक पहुंच प्रदान करता है।

फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था में प्रतिभागियों से बात करते हुए फ्रोफेसर युनुस ने कहा कि लघु वित्त का लक्ष्य अपने लिए धनराशि जमा करना नहीं बल्कि लोगों की समस्याओं का समाधान होना चाहिए। उन्होंने वैश्विक आर्थिक प्रणाली पर कई टिप्पणियाँ कीं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी ने इसकी प्रमुख त्रुटि को प्रकाश में लाया है कि यह शीर्ष के लोगों के लिए अधिकतम लाभ कमाने के लिए था।  

उनहोंने कहा, "हमने एक ऐसी दुनिया बनायी है जिसमें 1 प्रतिशत लोगों के पास सारी सम्पति का 99 प्रतिशत है।"  

गरीबों की दुर्दशा

फ्रोफेसर युनुस ने गौर किया कि महामारी काल में जो लोग अपने लिए किसी तरह जीविका अर्जित करते थे वे अचानक गरीब बन गये। उनके पास न भोजन है और न आय। यह स्थिति सम्पूर्ण विश्व की आधी आबादी की है।

प्रोफेसर ने बतलाया कि बहुत सारे लोग महामारी के पहले की स्थिति में लौटना चाहते हैं। उन्होंने फ्राँसिस की अर्थव्यवस्था में भाग लेने वाले युवा अर्थशास्त्री, उद्यामी और परिवर्तन लाने वालों से सवाल किया, "वे क्यों लौटना चाहते हैं?  

यूगांडा का एक ठोस उदाहरण

दूसरे दिन के कार्यक्रम में यूगांडा में एक सामाजिक मिशन पर एक विडीयो प्रस्तुत किया गया जिसमें दर्शाया गया कि किस तरह एकात्मता पर आधारित देखभाल करने वाली अर्थव्यवस्था विकसित की जा सकती है।  

"राहत महिला फाऊँडेशन", लघु वित्त योजना द्वारा यौन दुराचार की शिकार किशोरी माताओं की उम्मीदों को आगे बढ़ाने में मदद देता है।

फाऊँडेशन की संस्थापक एवं निदेशक मीरियम किओमुलो क्यालिमपा ने कहा कि संगठन महिलाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए छोटा लोन प्रदान करता है।   

चूँकि कई महिलाएँ अकेले जोखिम नहीं उठा पातीं उन्हें छोटे दल का निर्माण करने की सलाह दी जाती है जिससे कि वे गरीबी और निराशा से ऊपर उठ सकें।

उन्होंने कहा, "हम उन्हें सिखाना चाहते हैं कि किस तरह से काम किया जाता है। उनमें क्षमता है। उनके लिए चाहिए कि उनके पास पूंजी का स्रोत हो।"

 

21 November 2020, 13:55