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नाईजिरिया के आबूजा में सुरक्षा हेतु काथलिक धर्माध्यक्षों के नेतृत्व में शांति प्रदर्शन, तस्वीरः 01.03.2020 नाईजिरिया के आबूजा में सुरक्षा हेतु काथलिक धर्माध्यक्षों के नेतृत्व में शांति प्रदर्शन, तस्वीरः 01.03.2020  (AFP or licensors)

विश्वास के ख़ातिर ख्रीस्तीयों के अपहरण एवं उत्पीड़न में वृद्धि

अन्तरराष्ट्रीय काथलिक कल्याणकारी, परमधर्मपीठीय न्यास ",एड टू द चर्च इन नीड" (एसीएन) ने बुधवार को प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि विश्वास के ख़ातिर विश्व के 50 देशों में प्रति माह 300 से अधिक ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों का या तो अपहरण कर लिया जाता है या फिर उन्हें अन्यायपूर्ण रूप से जेल में डाल दिया जाता है।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, शुक्रवार, 27 नवम्बर 2020 (वाटिकन न्यूज़): अन्तरराष्ट्रीय काथलिक कल्याणकारी, परमधर्मपीठीय न्यास ",एड टू द चर्च इन नीड" (एसीएन) ने बुधवार को प्रकाशित अपनी एक रिपोर्ट में बताया कि विश्वास के ख़ातिर विश्व के 50 देशों में प्रति माह 300 से अधिक ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों का या तो अपहरण कर लिया जाता है या फिर उन्हें अन्यायपूर्ण रूप से जेल में डाल दिया जाता है।  

विश्व के कई गिरजाघरों और ख्रीस्तीयों इमारतों में लाल बत्ती जलाकर 25 नवम्बर को सम्पूर्ण विश्व में उत्पीड़ित ख्रीस्तीयों एवं शहीदों की स्मृति में रेड वेडनसडे यानि लाल बुधवार मनाया जाता है।

"बंदियों को मुक्त करो"

25 नवम्बर को ही "अपने बंदियों को मुक्त करो", शीर्षक से प्रकाशित रिपोर्ट में 50 देशों के नाम गिनाये गये जहाँ ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों को को उत्पीड़ित किया जाता है। कहा गया कि अपहरण और बन्दी बनाये जाने के मामले प्रमुख रूप से नाईजिरिया, एरित्रेया, पाकिस्तान तथा चीन में सामने आये हैं।  

रिपोर्ट में कहा गया कि इन देशों में अंतरात्मा के कारणों से, अन्धाधुन्ध कारावास से, अन्यायपूर्ण मुकद्दमों के द्वारा तथा कारावासों में उत्पीड़न, यातना और दबाव देकर लोगों को अपने विश्वास के परित्याग हेतु प्रेरित किया जाता है।

अफ्रीका

रिपोर्ट में कहा गया कि नाईजिरिया में जिहादियों द्वारा प्रति वर्ष कम से कम 200 ख्रीस्तीय धर्मानुयायियों का या तो अपहरण किया जाता है, या पिर उन्हें अकारण जेल में भेज दिया जाता है। कई बार फिरौती राशि लेने के लिये पुरोहितों का अपहरण किया जाता है। इसी प्रकार, मिस्र में ख्रीस्तीय युवतियों का अपहरण कर उन्हें ग़ैर ख्रीस्तीयों से विवाह करने के लिये बाध्य किया जाता है।  

एशिया

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान में प्रतिवर्ष कम से कम एक हज़ार ख्रीस्तीय एवं हिन्दू युवतियों का बलात धर्मान्तरण कर उन्हें मुसलमान बनने के लिये मजबूर किया जाता है। उत्तरी कोरिया में कम से कम पचास हज़ार ख्रीस्तीय श्रम शिविरों में हैं। अनुमान है कि म्यानमार में 2018 से अब तक सेना ने कम से कम 100 पादरियों एवं काथलिक छात्रों को गिरफ्तार किया है।  

एसीएन के अनुसार, कई रिपोर्टें बताती हैं कि दुनिया में उत्पीड़न के लिये सबसे अधिक ईसाइयों को लक्ष्यांकित किया जाता है। यह भी कहा गया कि कोविद-19 महामारी की वजह से अन्यायपूर्ण रूप से गिरफ्तार लोगों की स्थिति बद से बदत्तर हो गई है।  

27 November 2020, 11:38