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ईश निन्दा कानून की आरोपी आसिया बीवी की रिहाई पर रूढिवादियों का विरोध, तस्वीरः 01.02.2019   ईश निन्दा कानून की आरोपी आसिया बीवी की रिहाई पर रूढिवादियों का विरोध, तस्वीरः 01.02.2019   (ANSA)

पाकिस्तान, ईश निन्दा कानून के तहत एक ख्रीस्तीय को सज़ा-ए-मौत

पाकिस्तान की एक अदालत ने मंगलवार को ईश निंदा के आरोप में ईसाई व्यक्ति आसिफ़ परवेज़ को मौत की सज़ा सुनाई। परवेज़ पर मुकद्दमा 2013 में शुरू हुआ था। इससे पूर्व परवेज़ पर 50,000 पाकिस्तानी रुपयों का ज़ुर्माना लगाया गया था तथा उसे तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

लाहौर, गुरुवार, 10 सितम्बर 2020 (सी.एन.आ.): पाकिस्तान की एक अदालत ने मंगलवार को ईश निंदा के आरोप में ईसाई व्यक्ति आसिफ़ परवेज़ को मौत की सज़ा सुनाई।

आसिफ़ परवेज़ पर आरोप

परवेज़ पर मुकद्दमा 2013 में शुरू हुआ था। इससे पूर्व परवेज़ पर 50,000 पाकिस्तानी रुपयों का ज़ुर्माना लगाया गया था तथा उसे तीन साल की जेल की सज़ा सुनाई गई थी।

लाहौर की एक अदालत ने 8 सितंबर को 37 वर्षीय आसिफ़ परवेज़ को प्राणदण्ड की सज़ा इसलिये सुनाई क्योंकि उन पर आरोप थे कि उन्होंने, कपड़ा कारखाने में उनके सूपरवाईज़र रहे, मुहम्मद सईद खोखर को भेजे गए पाठ संदेश में पैगम्बर मुहम्मद साहेब के खिलाफ़ अपमानजनक टिप्पणी की थी।

ईश निन्दा कानून

पाकिस्तान का राज्य धर्म इस्लाम है, और लगभग 97 प्रतिशत आबादी इस्लाम धर्मानुयायी है। देश का ईश निंदा कानून उन लोगों को सख्त सजा देता है जो कुरान पाक या हज़रत मुहम्मद को बदनाम करते हैं या उनका अपमान करते हैं। हालाँकि, सरकार ने कभी किसी व्यक्ति को ईश निंदा कानूनों के तहत प्राणदण्ड नहीं दिया है, किन्तु आरोपों की वजह से बहुत बार हिंसा भड़की है।

परवेज़ के वकील ने रायटर समाचार से कहा कि वे इस सज़ा पर अपील करेंगे। वकील ने कहा कि परवेज़ के अनुसार, इस्लाम में धर्मांतरण से इनकार करने के बाद ही उसपर ईश निंदा का आरोप लगाया गया था। हालांकि, खोखर का कहना है कि अपना बचाव करने के लिये परवेज़ उनपर धर्मान्तरण का आरोप लगा रहा था।

कानून का दुरुपयोग

पाकिस्तान के ईश निंदा कानून का दुरुपयोग कथित तौर पर व्यक्तिगत रंजिश अथवा धार्मिक अल्पसंख्यकों को सताने के लिए किया जाता है। हालांकि, पाकिस्तान की कुल आबादी का केवल 03 प्रतिशत ही ग़ैरमुसलमान है, तथापि, 14 प्रतिशत ईश निंदा के मामले ग़ैरमुसलमानों के खिलाफ़ हैं।

ईशनिन्दा के कई आरोपियों की हत्या कर दी जाती है तथा जो लोग इस कानून में संशोधन अथवा इसके हटाये जाने की मांग करते हैं उन्हें भी निशाना बनाया जाता है। पाकिस्तान में सन् 1980 से 86 के बीच ईश निन्दा कानून लागू किया गया था।

न्याय एवं शांति सम्बन्धी राष्ट्रीय आयोग के अनुसार, 1987 से 2014 तक 1,300 से अधिक लोगों पर ईश निन्दा के आरोप लगाये गये हैं। अनुसन्धान एवं सुरक्षा सम्बन्धी पाकिस्तानी केन्द्र की रिपोर्ट में बताया गया कि सन् 1990 से लेकर अब तक कम से कम 65 लोगों को निगरानी रखनेवालों ने मार डाला है।  

जुलाई माह में पेशावर में ईश निंदा के मामले में एक अमरीकी नागरिक की अदालत में सुनवाई के दौरान हत्या कर दी गई थी।

पाकिस्तान में इस समय ईश निंदा कानून के तहत 40 से अधिक लोग आजीवन कारावास या प्राणदण्ड की सज़ा का सामना कर रहे हैं।    

10 September 2020, 11:28