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प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (ANSA)

शीर्ष अदालत द्वारा भारत के बुजुर्गों पर ध्यान देने का आदेश

भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने संघीय सरकार को यह सुनिश्चित करने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया है कि वरिष्ठ नागरिकों का कोविद -19 महामारी के दौरान अच्छा ख्याल रखा जाए।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, शनिवार, 8 अगस्त 2020 (ऊकान)- 4 अगस्त को अपने निर्देशों में शीर्ष अदालत ने कहा कि बुजुर्गों को नियमित रूप से पेंशन का भुगतान किया जाना चाहिए और कोरोनावायरस के मद्देनजर दवाइयां, मास्क, सनिटाइज़र एवं अन्य आवश्यक सामान दिए जाने चाहिए।

निर्देश का कलीसिया द्वारा स्वागत

भारतीय काथलिक धर्माध्यक्षीय सम्मेलन के स्वास्थ्य विभाग के सचिव फादर जुलयुस अमला ने ऊका समाचार से कहा, "जैसा कि हम सभी जानते हैं बच्चे और बुजूर्ग बीमारी के सामने कमजोर हैं क्योंकि उनकी रोग प्रतिरोधक शक्ति कम है, उच्चतम न्यायालय के निर्देश की सराहना की जाती है।"

उन्होंने कहा कि “यह आदेश कैसे और कब लागू किया जाएगा यह एक बड़ा सवाल है क्योंकि कई बार मानव संसाधन या अन्य तार्किकों के कारण योजना केवल कागजों पर ही रह जाती है या उसपर बहुत कम काम किये जाते हैं।"

उन्होंने कहा कि अक्सर कुछ लोग लापरवाही और अन्य कारणों से बुजूर्गों पर ध्यान नहीं देते अतः विश्व जब इस महामारी का सामना कर रहा है सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश समय की आवश्यकता है।  

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने पूर्व संघीय मंत्री अश्विनी कुमार और वरिष्ठ वकील संजीव पाणिग्रही द्वारा की गई याचिका पर प्रतिक्रिया दी है।

कुमार ने वरिष्ठ नागरिकों के संबंध में निर्देश मांगते हुए कहा कि उन्हें महामारी के दौरान अधिक देखभाल और सुरक्षा की आवश्यकता है। अदालत ने कहा कि वह अकेले रहनेवाले बुजुर्गों की रक्षा करने और उन्हें आवश्यक सामान एवं सेवाएं प्रदान करने के सरकार के दायित्व को मान्यता देती है।

अस्पतालों में प्रवेश को प्राथमिकता

इसने केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया कि वरिष्ठ नागरिकों के लिए समय पर पेंशन का भुगतान किया जाए। निर्देश देते हुए, अशोक भूषण और आर. सुभाष रेड्डी ने कहा है कि वरिष्ठ नागरिकों  के लिए सरकारी अस्पतालों में प्रवेश को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

दिसंबर 2018 के एक फैसले में, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि भारत में 100,000 मिलियन से अधिक वरिष्ठ नागरिकों के वैधानिक अधिकारों को मान्यता दी जानी चाहिए एवं उन्हें कार्यान्वित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि संघीय सरकार को सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से बुजुर्गों के लिए घरों की संख्या के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए और पेंशन योजना की फिर से जांच की जानी चाहिए। अदालत ने जोर दिया कि राज्य यह सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि बुजुर्गों सहित नागरिकों की गरिमा, आश्रय और स्वास्थ्य के साथ जीने के अधिकार न केवल संरक्षित हैं, बल्कि लागू भी हैं।

जान जोखिम में

पूर्वी दिल्ली के वृद्धाश्रम आशीर्वाद के निदेशक भोपिन्द्र सिंह ने कहा, "जो लोग वृद्धाश्रम में हैं, उनकी देखभाल अच्छी तरह से की जाती है, लेकिन अपने परिवारों के साथ रहनेवाले और यहां तक ​​कि अकेले रहनेवाले वरिष्ठ नागरिकों का क्या? मुझे उम्मीद है कि अधिकारियों द्वारा उनकी देखभाल की जाएगी।"

उन्होंने कहा, "अक्सर वे अपने परिवार और अधिकारियों द्वारा खुद की देखभाल करने और अपनी जान जोखिम में डालने के लिए अकेले रह जाते हैं। यह हकीकत और बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण बात है।" संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष के अनुसार, 2019 में भारत की जनसंख्या 1.36 बिलियन थी, जिसमें 6 प्रतिशत की आबादी 65 और उससे अधिक थी।

इस बीच, स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, कोविद -19 संक्रमणों की संख्या, 24 घंटे के भीतर 61,500 से अधिक ताजा मामले सामने आने के बाद 8 अगस्त को 20 लाख 88 हजार तक पहुंच गई है। मरने वालों की संख्या लगभग 42,518 है जबकि 14,27,000 लाख लोग स्वस्थ हो चुके हैं।

08 August 2020, 14:25