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कार्डिनल चार्ल्स बो कार्डिनल चार्ल्स बो  (@L'Osservatore Romano)

म्यानमार में संघर्ष से निपटने के लिए वार्ता ही एकमात्र रास्ता

केंद्रीय शांति सम्मेलन 21वीं शताब्दी पांगलोंग का चौथा सत्र 19 अगस्त से शुरू होनेवाला है। सम्मेलन के पूर्व प्रेषित एक संदेश में यांगोन के महाधर्माध्यक्ष कार्डिनल चार्ल्स मौंग बो ने कहा है कि "संवाद के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है...हम सभी युद्ध के कारण क्षतिग्रस्त हैं। कोई नहीं जीत रहा है। एकमात्र रास्ता है शांति का।"

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

यांगोन, बुधवार, 12 अगस्त 2020 (एशियान्यूज)- म्यांमार की सरकार, आंग सान सू की, सशस्त्र बल और विभिन्न सशस्त्र जातीय समूहों के नेता देश में अंतर-जातीय संघर्ष के अंत पर शांति वार्ता में भाग लेंगे।

सन् 1947 में पहले पांगयोंग सम्मेलन ने आधुनिक म्यानमार की स्थापना की थी जिसको उस समय वर्मा कहा जाता था। सू की के पिता, वर्मा के ब्रिटिश क्राउन कॉलोनी की सरकार के जेनेरल सांग सान ने चार मुख्य जाति समूहों (वमार, चिन, कचिन और शान) के बीच मध्यस्थता की थी।

वर्तमान में, कई बड़े जातीय समूहों की अनुपस्थिति ने वार्ता को कमजोर कर दिया है। काचिन इंडिपेंडेंस आर्मी और टीएनएलए टांग ने अराकान आर्मी के बहिष्कार के विरोध में प्रक्रिया में शामिल होने से इनकार कर दिया है।

अपनी टिप्पणी में, कार्डिनल बो ने सम्मेलन की सफलता के लिए प्रार्थना की है। उन्होंने जनरल आंग सान और उन सभी लोगों की ओर इशारा किया है जो जापानी आक्रमण और उपनिवेशवाद के खंडहर के बाद एक नए एकजुट राष्ट्र का सपना देखते थे, और जिन्होंने उपजाऊ भूमि पर स्थापित, जीवनदायी विविधता एवं गरिमामयी, एकजुट जनता को आकार देने के लिए लड़े।"

कार्डिनल ने 73 साल पहले आंग सान की निर्मम हत्या पर शोक व्यक्त की जिसने म्यांमार के लोगों के लिए विभाजन, संघर्ष और अंधेरे के दशकों की शुरुआत को चिह्नित किया।

कार्डिनल के लिए, बातचीत की मेज पर दल, अब मृत्यु और पीड़ा के इस इतिहास को पलट सकते हैं; इससे भी बढ़कर अब जबकि देश कोरोनोवायरस महामारी से जूझ रहा है।

संत पापा फ्राँसिस जिन्होंने कोविड-19 महामारी का सामना करने के लिए विश्व स्तर पर युद्ध विराम का आह्वान किया है उनका हवाला देते हुए कार्डिनल बो कहा है, "एकता के द्वारा हम वैश्विक महामारी के कारण सामाजिक-आर्थिक, पर्यावरणीय एवं चिकित्सा की क्षति का पुनर्निमाण कर सकते हैं।"

कार्डिनल के लिए आगे बढ़ने का एक ही रास्ता है लोकतंत्र, एक सच्चा संघीय राष्ट्र का निर्माण और ऐसे गवर्नर की नियुक्ति जो अपने सभी नागरिकों के कल्याण की चिंता करे।

उन्होंने चेतावनी दी है कि सैन्य समाधान अनुत्पादक है और उसे सहयोग, सभ्यता एवं ज्ञान के लिए छोड़ दिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि देश को ऐसे सैनिकों की आवश्यकता है जो बिना किसी भेदभाव के सभी जाति समूहों के प्रति समावेशी हो। और उससे बढ़कर, धीरे-धीरे, सैनिकों को लोकतांत्रिक रूप से जवाबदेह राष्ट्रपति के अधिकार में आना चाहिए।"

यांगोन के महाधर्माध्यक्ष के अनुसार, अपने लोगों के प्रति सम्मान दिखाकर, सबसे गरीब लोगों के प्रति भी सुरक्षा प्रदान कर, म्यानमार, एशिया एवं विश्व में अपने स्थान का पुनः दावा कर सकता है। अंततः उन्होंने कहा कि शांति संभव है, शांति का अर्थ है विकास। शांति ही हमारा भाग्य है। 

12 August 2020, 15:22