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फिलिपींस के समुद्र तट पर जाने का इन्तजार करते जहाज फिलिपींस के समुद्र तट पर जाने का इन्तजार करते जहाज  (AFP or licensors)

नाविकों की व्यथा,“बच्चे पूछते हैं, मैं घर कब आ रहा हूँ”

विश्वव्यापी महामारी कोविड-19 के फैलाव से बचाव के लिए ऐहतियाती उपायों के मद्देनज़र यात्रा सम्बन्धी पाबन्दियाँ लागू की गई हैं जिनसे लाखों नाविक भी प्रभावित हुए हैं। घर-परिवार से दूर समुद्र में फँसे नाविकों के लिये गहरी और लम्बी अनिश्चितता जल्द ख़त्म होती नज़र नहीं आती और मौजूदा हालात से उनका मानसिक स्वास्थ्य भी प्रभावित हो रहा है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

जिनेवा, बुधवार 22 जुलाई 2020 (वाटिकन न्यूज) : 33 वर्षीय फिलिपींस के एक नाविक ने कहा,“मैं थका हुआ, शक्तिहीन और नाउम्मीद महसूस कर रहा हूँ। मुझे समुद्र में रहते हुए पहले ही 12 महीनों का समय हो चुका है और मुझे नहीं मालूम कि मैं अपने बच्चों और परिवार को कब देख पाऊँगा। यह बेहद हताश कर देने वाला है।”

फ़िलिपींस के नाविक रफ़ाएल (परिवर्तित नाम) को ज़रा भी अन्दाज़ा नहीं है कि उन्हें अपने जहाज़ पर और कितने समय तक रहना होगा। रफ़ाएल के दो बच्चे हैं और उन्हें अप्रैल में अपने घर के लिए उड़ान भरनी थी लेकिन महामारी के कारण उनकी योजना पर पानी फिर गया।

हवाई अड्डे बन्द हैं और उनकी कम्पनी ने फ़िलहाल उन्हें और आठ अन्य सहकर्मियों को अवकाश ना देने का फ़ैसला किया है। उनमें से कुछ तो पिछले 14 महीनों से जहाज़ पर सवार हैं।

रफाएल ने कहा,“यह चौथी बार है जब घर जाने के लिये मेरी छुट्टियाँ स्थगित की गई हैं। हम कार्गो और सामान पहुँचाते हैं लेकिन उन्होंने हमारे लिये सीमाएँ बन्द कर दी हैं। हमारा मन दूसरी दुनिया में हैं, हम बस घर आना चाहते हैं।”

नाविकों का अहम योगदान

वैश्विक व्यापार का लगभग 90 फ़ीसदी समुद्री जलमार्गों और समुद्री परिवहन से होता है और इस कार्य में 20 लाख से ज़्यादा लोग जुटे हैं।

रफ़ाएल की ही तरह मैट ब्रिटेन के एक चीफ़ इंजीनियर हैं जो मुख्यत: मध्य पूर्व और एशिया की यात्रा करते हैं।

उनका मानना है कि महामारियों के दौरान भी महत्वपूर्ण वस्तुओं व सामग्री की निर्बाध रूप से आपूर्ति सम्भव बनाने में नाविकों का अहम योगदान है और इसलिये उनके काम को और ज़्यादा महत्व मिलना चाहिए।

चीफ़ इंजीनियर मैट ने कहा, “मैं कहूँगा कि हमने नाविकों के रूप में महामारी के दौरान अपनी भूमिका बख़ूबी निभाई है। हमने देशों को निजी बचाव सामग्री, मेडिकल सामान, बिजली घर चलाए रखने के लिये तेल व गैस और भोजन व जल सहित ज़रूरी वस्तुओं की आपूर्ति जारी रखी। अब हम बस घर लौटकर आराम करना चाहते हैं।”

मैट और नाविक दल के अधिकाँश अन्य सदस्यों का कॉन्ट्रैक्ट पूरा हो चुका है। उन्होंने बताया कि आम तौर पर 10 हफ़्ते के कॉन्ट्रैक्ट के बाद अधिकारियों की अदला-बदली होती है लेकिन मौजूदा हालात में अधिकाँश सदस्यों को छह महीने से ज़्यादा समय बीत चुका है।

घर पर मैट के दो बच्चे उनका इन्तज़ार कर रहे हैं और उनके परिवार से दूर रहने से हालात मुश्किल होते जा रहे हैं।

 “इससे मेरे परिवार पर भी ज़्यादा असर हुआ है। मेरे बच्चे हमेशा मुझसे पूछते हैं कि मैं घर कब आ रहा हूँ। उन्हें समझा पाना मेरे लिए मुश्किल है।”

समय बीतने के साथ मैट और अन्य नाविकों को अनेक प्रकार की भावनाओं से गुज़रना पड़ा है और मानसिक स्वास्थ्य पर बोझ बढ़ रहा है। मैट अब जल्द बदलाव देखना चाहते हैं। उनका कहना है कि हमें सरकारों से समर्थन की ज़रूरत है ताकि हमें पाबन्दियों के बिना अपने देशों से होकर गुज़रने की अनुमति मिल सके। वीज़ा के लिये समयावधि को कम करने या पूरी तरह हटाने की ज़रूरत है।

नाविकों की चुनौतियाँ

अन्तरराष्ट्रीय श्रम संगठन (आईएलओ) में ट्रान्सपोर्ट व मैरीटाइम यूनिट के प्रमुख वैगनर ब्रैण्ट अतीत में एक जहाज़ के अधिकारी रह चुके हैं और नाविक दल के सदस्यों की चुनौती को समझते हैं। उन्होंने कहा, “समुद्र में रहना मुश्किल हो सकता है। जब मौसम ख़राब होता है तो मनोस्थिति बेहद ख़राब हो सकती है। साथ ही जहाज़ पर सवार लोग महीनों तक उसी जगह पर काम करते हैं। इन दिनों उद्योग बहुत दक्ष हैं इसलिये जहाज़ में सामान को जल्द चढ़ाया और उतारा जा सकता है।”

उन्होंने कहा कि बन्दरगाह शहर के केन्द्रीय इलाक़ों से कुछ दूर होते हैं और तेल टैंकरों के मामले में तो तट से दूर जाना पड़ता है इसलिये नाविकों के पास जहाज़ छोड़कर जाने के अवसर अतीत की अपेक्षा कम होते हैं। यह बेहद अलग-थलग महसूस कराने वाला अनुभव होता है।

 नाविकों की प्रशंसा

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने भी समुद्र में व्याप्त इस मानवीय और सुरक्षा संकट पर अपनी चिन्ता व्यक्त की है। साथ ही उन्होंने वैश्विक अर्थव्यवस्था में नाविकों के अघोषित योगदान और यमन सहित अन्य हिंसाग्रस्त इलाक़ों में फँसे लोगों की मदद करने के लिये राहत सामग्री का वितरण सुनिश्चित करने के लिये उनकी प्रशंसा की है।

22 July 2020, 13:51