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द. अफ्रीका में नेलसन मंडेला दिवस द. अफ्रीका में नेलसन मंडेला दिवस  (AFP or licensors)

असमानता हमारे दौर को परिभाषित करती है, यूएन महासचिव

वर्ष 2020 का वार्षिक नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस पर संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुटेरेश ने अपने संदेश में कहा कि असमानता एक ऐसा मुद्दा है जो हमारे दौर को परिभाषित करता है और इसके कारण दुनिया की अर्थव्यवस्थाओं व समाजों के तबाह होने का जोखिम पैदा होता है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

न्यूयार्क, सोमवार 20 जुलाई 2020 (यूएन न्यूज) : शनिवार को 18 जुलाई को नेलसन मण्डेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस 2020 कोविड-19 महामारी के माहौल में ऑनलाइन माध्यमों के ज़रिये आयोजित किया गया। नेलसन मण्डेला संस्थान हर साल उनके जन्म दिवस पर आयोजित करता है। नेलसन मण्डेला दक्षिण अफ्रीका के लोकतान्त्रिक तरीक़े से चुने गए पहले राष्ट्रपति थे। इस समारोह का उद्देश्य प्रमुख अन्तरराष्ट्रीय चुनौतियों पर बात करने के लिये महत्वपूर्ण हस्तियों को आमन्त्रित किया जाता है और इसका मक़सद संवाद को बढ़ावा देना है।

कोविड-19 पर ज़ोर

महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने अपने भाषण की शुरुआत ये ध्यान दिलाते हुए की कि कोविड-19 महामारी ने बढ़ती असमानताओं को उजागर कर दिया है। साथ ही इस भ्रम को भी सामने लाकर खड़ा कर दिया है कि हम सभी एक ही नाव में सवार हैं, क्योंकि “वैसे तो हम सभी एक ही समुद्र पर तैर रहे हैं, मगर ये भी स्पष्ट है कि कुछ लोग तो बेहतरीन व आधुनिक जहाज़ों या नावों में सवार हैं जबकि बहुत से अन्य लोग तैरते मलबे से चिपके हुए हैं।”

उन्होंने कहा कि बहुत से जोखिमों को दशकों तक नज़रअन्दाज़ किया गया है जिनमें अपर्याप्त स्वास्थ्य प्रणालियाँ, सामाजिक संरक्षण में कमियाँ और भेद, संस्थागत असमानताएँ, पर्यावरण क्षरण, और जलवायु आपदा पर ध्यान नहीं दिया गया है।

निर्बल वर्गों के लोगों को सबसे ज़्यादा तकलीफ़ें हो रही हैं, जो लोग ग़रीबी में रहने को मजबूर हैं, वृद्ध लोग और विकलाँग व पहले से ही चिकित्सा समस्याओं से जूझ रहे व्यक्ति तकलीफों का सामना कर रहे हैं।

असमानता के अनेक रुप

महासचिव अंतोनियो गुटेरेश ने कहा कि असमानता के बहुत से रूप हैं। एक तरफ़ आमदनी के मामले में असमानता का दायरा बहुत बड़ा है, तो केवल 26 सबसे धनी देशों के पास इतनी सम्पदा है बाक़ी जितनी सम्पदा दुनिया की आधी आबादी के पास है। इसके अलावा जीवन के अवसर बहुत से इन कारकों पर भी निर्भर करते हैं कि किसी व्यक्ति की लैंगिग पहचान क्या है, उसकी पारिवारिक और जातीय पृष्ठभूमि व नस्ल क्या है और कोई व्यक्ति विकलांग है या नहीं।

हालाँकि उन्होंने ये भी कहा कि परिणाम हर किसी को भुगतने पड़ते हैं क्योंकि उच्च स्तर की असमानता आर्थिक अस्थिरता, भ्रष्टाचार, वित्तीय संकट, बढ़ते अपराध और ख़राब शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े हुए हैं।

महासचिव ने असमानता का एक ऐतिहासिक पक्ष रहे उपनिवेशवाद की तरफ़ भी ध्यान दिलाया। उन्होंने कहा कि आज के दौर का नस्लभेद विरोधी आन्दोलन असमानता के ऐतिहासिक स्रोत की तरफ़ ध्यान दिलाता है: “वैश्विक उत्तर, विशेष रूप से यूरोप के मेरे अपने महाद्वीप ने, वैश्विक दक्षिण के ज़्यादातर हिस्से पर सदियों तक उपनिवेशवाद थोपकर रखा, और ये हिंसा और ज़ुल्म के ज़रिये किया गया।”

उन्होंने कहा कि इसके कारण देशों के भीतर व देशों के बीच बहुत गहरी असमानताएँ बैठ गईं, जिनमें महाद्वीपों के बीच चला दास व्यापर और दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद की शासन व्यवस्था शामिल थे। इस माहौल से आर्थिक व सामाजिक अन्याय, नफ़रत भरे अपराध, ख़ुद से भिन्न लोगों को कलंकित करना, संस्थागत नस्लभेद और श्वेत त्वचा वाले लोगों की प्रभुता की एक विरासत चली।

अंतोनियो गुटेरेश ने पुरुष वर्चस्व की परम्परा का भी ज़िक्र किया जो ऐतिहासिक असमानता का एक अन्य कारण रही है और आज भी मौजूद है: महिलाओं की स्थिति हर जगह पुरुषों की तुलना में बदतर है और महिलाओं के विरुद्ध हिंसा किसी महामारी के स्तर तक जारी है।

‘या तो हम एकजुट हों, या फिर बिखर जाएँ’

यूएन प्रमुख ने अपना ये प्रमुख रणनैतिक दृष्टि वाला वक्तव्य अन्तरराष्ट्रीय सहयोग व एकजुटता की महत्ता पर ज़ोर देते हुए समाप्त किया, “हम एक दूसरे से जुड़े हुए हैं, या तो हम एकजुट रहें या फिर बिखर जाएँ।”

भाषण के समापन में उन्होंने कहा कि विश्व इस समय बहुत नाज़ुक मोड़ पर है और ये दौर हमारे नेताओं के लिये ये फ़ैसला करने का है कि वो कौन सा रुख़ अपनाएँ।

अंतोनियो गुटेरेश ने जो विकल्प पेश किया वो था कि या तो “अराजकता, विभाजन और असमानता” को चुना जाए, या फिर अतीत की ग़लतियों को सुधारते हुए, एक साथ मिलकर आगे बढ़ा जाए और सभी की भलाई के लिये काम किया जाए।

20 July 2020, 10:02