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ओडिशा राज्य की अर्चना सोरेंग जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक कार्रवाई की सलाह देंगी ओडिशा राज्य की अर्चना सोरेंग जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक कार्रवाई की सलाह देंगी 

भारतीय आदिवासी काथलिक, संयुक्त राष्ट्र की जलवायु पहल में शामिल

ओडिशा की अर्चना सोरेंग जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक कार्रवाई पर संयुक्त राष्ट्र को परामर्श देगी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

भारत, बृहस्पतार, 30जुलाई 20 (ऊकान) – एक भारतीय काथलिक आदिवासी लड़की अर्चना सोरेंग, उन सात युवा जलवायु नेताओं में से एक है जिन्हें संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वैश्विक जलवायु संकट पर सलाह देने के लिए चुना है।

अर्चना ओडिशा की हैं। उन्हें जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए वैश्विक कार्रवाई में तेजी लाने हेतु संयुक्त राष्ट्र को सलाह देने के लिए 27 जुलाई को चुना गया।

संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता एवं पहचान से सम्मान व अवसर

अर्चना ने ऊका समाचार से कहा, "हमारे संत पापा सहित बहुत सारे लोग एवं विश्व नेता जलवायु परिवर्तन से चिंतित हैं। इस समय संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता और पहचान मेरे लिए एक बड़ा सम्मान और अवसर है।”

उन्होंने कहा, "मैं एक काथलिक और आदिवासी परिवार से आती हूँ जहाँ बचपन से पर्यावरण का सम्मान, उससे प्रेम और उसकी सुरक्षा करने की सीख दी जाती है, अतः इस दल के हिस्से के रूप में यह मेरे लिए बहुत मददगार होगा। इसमें मुझे पहले से अधिक कठिन परिश्रम करने का अवसर मिला है।"

आधुनिक पीढ़ी का कर्तव्य

"हमारे पूर्वज अपने परम्परागत ज्ञान और अभ्यास द्वारा वर्षों से जंगल एवं प्रकृति के रक्षक रहे थे और अब यह हमारा कर्तव्य है कि हम जलवायु संकट का सामना करने में विश्व की अगुवाई करें।"

सोरेंग, जो सुंदरगढ़ में खड़िया जनजाति से आती हैं, उन्होंने टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंस, मुंबई से नियामक प्रशासन में एम.ए. की पढ़ाई की है वे वसुंधरा, ओडिशा में एक शोध अधिकारी के रूप में काम करती हैं। वे क्षेत्रीय और राष्ट्रीय स्तर पर युवा समूहों से संलग्न हैं और अपने समुदायों के पारंपरिक ज्ञान और प्रथाओं को सुरक्षित करने, दस्तावेज़ बनाने और बढ़ावा देने के लिए आदिवासी युवा दलों में शामिल हैं। उनके लेख राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय युवा वेबसाइटों पर प्रकाशित हुए हैं।

आदिवासी लोगों का मनोबल बढ़ेगा

भारतीय काथलिक युवा आंदोलन की महासचिव शिल्पा एक्का ने कहा, "संयुक्त राष्ट्र द्वारा अर्चना की मान्यता से आदिवासी लोगों का मनोबल बढ़ेगा, जो उनके काम से प्रेरित होंगे और आगे आएंगे।"

आदिवासी मामलों के भारतीय धर्माध्यक्षीय आयोग के सचिव, फादर निकोलास बारला ने ऊका न्यूज से कहा, "अर्चना जैसे लोग हमें प्रोत्साहन देते हैं कि हम भी ऐसा कर सकते हैं, यह हमारे लिए भी संभव है।"

उन्होंने कहा, "वे और उनका परिवार पहचान और स्वीकृति के योग्य हैं क्योंकि वे सालों से प्रकति से जुड़े हैं एवं इसकी रक्षा करते हैं। यह विश्व के साथ-साथ देश के लिए भी संदेश है कि आदिवासी प्रकृति एवं पर्यावरण के सच्चे रक्षक हैं, फिर भी उन्हें विस्थापन और पूर्वाग्रह का सामना करना पड़ रहा है।   

इस बीच, गुटेरेस ने कहा है कि संयुक्त राष्ट्र निर्णय लेने और नियोजन प्रक्रियाओं में अधिक युवा नेताओं को लाने का प्रयास कर रहा है।

जलवायु परिवर्तन पर युवा सलाहकार समूह की स्थापना की घोषणा

जलवायु परिवर्तन पर युवा सलाहकार समूह की स्थापना की घोषणा करते हुए, जो सभी क्षेत्रों के युवाओं की विविध आवाजों का प्रतिनिधित्व करता है, गुटेरेस ने कहा कि हमने जलवायु कार्रवाई की अग्रिम पंक्ति के युवाओं को देखा है। हम एक जलवायु आपातकाल में हैं। हमारे पास अधिक समय नहीं है। हमें अन्याय और असमानता का सामना करने और जलवायु विघटन को दूर करने एवं कोविद -19 से बेहतर तरीके से उबरने के लिए अभी तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है।

जलवायु परिवर्तन पर युवा सलाहकार दल, जलवायु परिवर्तन पर विज्ञान से लेकर सामुदायिक जुटाव, उद्यमशीलता से लेकर राजनीति और उद्योग से लेकर संरक्षण तक के दृष्टिकोण और समाधान पेश करेगा।

जलवायु और कार्रवाई पर ध्यान देने के लिए सरकार और कॉर्पोरेट नेताओं को रखने के लिए बढ़ती तात्कालिकता के समय उन्हें स्पष्ट और निडर सलाह देने के लिए चुना गया था।

संयुक्त राष्ट्र की पहल को सितंबर 2018 में शुरू की गई संयुक्त राष्ट्र की युवा रणनीति के साथ भी जोड़ा गया है।

30 July 2020, 17:34