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दिल्ली का जला हुआ एक स्कूल दिल्ली का जला हुआ एक स्कूल  (AFP or licensors)

ईसाइयों के खिलाफ हिंसा के प्रकरण में लगातार वृद्धि,यूसीएफ

यूसीएफ के अध्यक्ष माइकेल विलियम्स ने 13 जुलाई को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "किसी को भी उनके विश्वास के कारण सताया नहीं जाना चाहिए।" भारत सरकार और सुप्रीम कोर्ट के कई संकेतों के बाद भी इन भयावह जनतंत्र कार्यों को देखना चिंताजनक है। इसाईयों के खिलाफ हिंसा में लगातार वृद्धि हुई है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, बुधवार 15 जुलाई 2020 (वाटिकन न्यूज) : भारत में ईसाइयों के खिलाफ हिंसा रुकती नहीं है। यहां तक कि कोरोनावायरस महामारी के प्रसार और राष्ट्रीय स्तर पर लगाए गए अलगाव ईसाइयों को राहत पहुंचाने में कामयाब नहीं हो सकी। नई दिल्ली में यूनाइटेड क्रिश्चियन फोरम (यूसीएफ), एक अंतर कलीसियाई संगठन, जो मुख्य रूप से विरोध के माध्यम से ईसाई अल्पसंख्यक के अधिकारों के लिए लड़ता है, छह-मासिक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष की पहली छमाही में 15 राज्यों में 121 हिंसा की रिपोर्ट मिली, जिनमें 2 लोगों की जाने गई और 95 हमले दर्ज किए गए थे। कुछ गिरजाघरों पर अवैध कब्जे किये गये या सील कर दिये गये।

हिंसा के खिलाफ कड़ी कार्यवाई की कमी

यूसीएफ के अध्यक्ष माइकेल विलियम्स ने 13 जुलाई को जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, "किसी को भी उनके विश्वास के कारण सताया नहीं जाना चाहिए।" सरकार और सुप्रीम कोर्ट के कई संकेतों के बाद भी इन भयावह जनतंत्र कार्यों को देखना चिंताजनक है। सार्वजनिक व्यवस्था के लिए जिम्मेदार स्थानीय प्रशासन और पुलिस को हिंसा में शामिल किसी के खिलाफ जल्दी से कार्रवाई करनी चाहिए।"

अध्यक्ष माइकेल ने बताया कि यूसीएफ, एलायंस डिफेंडिंग फ्रीडम इंडिया, ईएफआई के धार्मिक स्वतंत्रता आयोग और क्रिश्चियन लीगल एसोसिएशन के साथ मिलकर 19 गिरजाघरों को फिर से खोलने और 28 पल्ली पुरोहितों व पादरियों को जमानत पर रिहा करने या झूठे आरोपों से बरी करने में कामयाब रहा। घटनाओं से पता चलता है कि 28 भारतीय राज्यों में से 15 में अपने विश्वास का अभ्यास करने की स्वतंत्रता कम हो गई है उन्होंने कहा कि कोई भी राजनीतिक दल हिंसा के कृत्यों के खिलाफ कड़ा रुख नहीं अपना रहा है।

एफआईआर न करने की प्रवृति में वृद्धि

शिकायत दर्ज न करने की प्रवृत्ति, अनियंत्रित रूप से बढ़ रही है, हिंसा के अपराधियों के खिलाफ पहली सूचनात्मक रिपोर्ट (एफआईआर), अबतक के 121 मामलों में से केवल 20 दुर्घटनाएं दर्ज की गई हैं।

हिसां का कृत्य लगभग हमेशा समान होता है: एक भीड़ नारे लगाते हुए, स्थानीय पुलिस के साथ एक प्रार्थना सभा में एकत्रित इसाई पुरुषों, महिलाओं और बच्चों की पिटाई करती है और पादरियों को पुलिस द्वारा जबरन धर्मांतरण के झूठे आरोप में गिरफ्तार किया जाता है।

हिंसा में लगातार वृद्धि

दुर्भाग्य से, यूसीएफ के आंकड़ों से पता चलता है कि ईसाइयों के खिलाफ हिंसा लगातार बढ़ रही है। 2014 में दर्ज दुर्घटनाओं की संख्या 150 से कम थी, 2015 में लगभग 200, 2016 में 200 से अधिक, 2017 में 250 से अधिक थी, और वे 2018 में 300 तक पहुंच गए। 2019 में हिंसा की 328 घटनाएं दर्ज की गईं।

माइकेल ने अंत में कहा कि "यह अब केवल विश्वास के बारे में नहीं है, यह एक सम्मानजनक तरीके से जीने, शांतिपूर्ण जीवन जीने और दूसरों को भी जीने देने के संवैधानिक अधिकार के बारे में है। यूसीएफ, जिसका मुख्य उद्देश्य मानव अधिकारों के लिए लड़ना है, इसके लिए लड़ता रहेगा।"

15 July 2020, 13:55