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बुर्किना फासो के प्रवासी बुर्किना फासो के प्रवासी  (AFP or licensors)

संयुक्त राष्ट्र द्वारा केंद्रीय साहेल के मानवीय संकट पर चेतावनी

बढ़ती गरीबी, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, तेजी से बढ़ते संघर्ष और बिगड़ती सुरक्षा के कारण पूरे मध्य साहेल में लाखों लोगों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

वाटिकन सिटी, बुधवार,5 फरवरी 2020 (वाटिकन न्यूज) : संयुक्त राष्ट्र की विश्व खाद्य कार्यक्रम (डब्ल्यूएफपी) और खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) अफ्रीका के सेंट्रल साहेल क्षेत्र में बढ़ते मानवीय संकट की चेतावनी दे रही हैं।

बुर्किना फासो, माली और नाइजर

डब्ल्यूएफपी ने कहा कि बुर्किना फासो, माली और नाइजर में संघर्ष और हिंसा लोगों के खाद्य सुरक्षा पर जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को बढ़ा रहे हैं।

केंद्रीय साहेल में लगभग 3.3 मिलियन लोगों को तत्काल सहायता की आवश्यकता है और यदि तुरंत कार्रवाई नहीं की गई तो लगभग 4.8 मिलियन लोगों को जून और अगस्त के बीच खाद्य असुरक्षा का खतरा होगा।

विश्व खाद्य कार्यक्रम वर्तमान में तीनों देशों के 1.4 मिलियन लोगों को महत्वपूर्ण खाद्य सहायता प्रदान कर रहा है।

ख्रीस्त जयंती के दिन रोम और विश्व को दिये संदेश में संत पापा फ्राँसिस ने मुक्तिदाता बालक येसु से "चरमपंथी समूहों के हमलों के पीड़ितों, विशेष रूप से बुर्किना फासो, माली, नाइजर और नाइजीरिया" के लोगों के लिए प्रार्थना की।

पश्चिम और मध्य अफ्रीका में डब्ल्यूएफपी के संचार प्रमुख जॉर्ज फोमिनेन ने वाटिकन न्यूज को बताया कि "तेजी से बढ़ते सशस्त्र संघर्ष" में सैकड़ों लोग मारे गये हैं और हजारों लोग विस्थापित हुए हैं। उन्होंने कहा, "जो लोग प्रभावित हुए हैं उनमें से अधिकांश लोगों की स्थिति बहुत दयनीय है।"

एक मिलियन आंतरिक रूप से विस्थापित

संचार प्रमुख ने कहा कि बुर्किना फासो, माली और नाइजर के कुछ हिस्सों में गांवों को खाली किया जा रहा है। करीब 950,000 से अधिक लोग हैं जो इन तीन देशों के भीतर आंतरिक रूप से विस्थापित हैं।"

हर दिन होने वाले हमलों की वजह से स्कूलों को बंद कर दिया गया है और हिंसा भी मानवीय सहायता तक पहुंच को बाधित कर रही है। जॉर्ज फ़ोमिनेन ने इसे "संख्या के कारण बढ़ता हुआ मानवीय संकट" कहा। उन्होंने कहा कि संघर्ष के कारण आंदोलन के प्रतिबंध के बावजूद, मानवतावादी संगठन लोगों तक पहुंचने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने जोर देकर कहा कि इन देशों के प्रति अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया की आवश्यकता है जिससे बड़े पैमाने में भोजन, आश्रय, स्वास्थ्य और शिक्षा आदि मूल आवश्यकता को पूरा किया जा सके।  

05 February 2020, 15:48