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संत पापा फ्राँसिस और प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम संत पापा फ्राँसिस और प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम 

विश्वास दुनिया में स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व ला सकता है

मानव भ्रातृत्व पर दस्तावेज़ की सालगिरह पर अबू धाबी में बोलते हुए, प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम ने जोर दिया कि “धर्म राजनीति को प्रतिस्थापित नहीं कर सकते हैं और ऐसा करने का इसका लक्ष्य नहीं है। हालांकि, वे नागरिक और राजनीतिक गतिविधियों को प्रेरित कर सकते हैं और सामाजिक सामंजस्य, सृष्टि की सुरक्षा, सतत विकास और भाइचारे की संस्कृति की स्थापना के लिए जागरूकता बढ़ा सकते हैं।”

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

अबू धाबी, बुधवार,5 फरवरी 2020 (एशिया न्यूज) : प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम ने मंगलवार 4 फरवरी को आबू धाबी में  मानव बंधुत्प पर दस्तावेज़ की पहली सालगिरह पर आयोजित एक बैठक को संबोधित किया।

अपने संबोधन में, उन्होंने धर्मों के कार्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए कहा कि आज की दुनिया में सभी धर्मों को संवाद को प्रोत्साहित करनी चाहिए। कट्टरवाद के लिए कोई जगह नहीं है।

वैज्ञानिक और तकनीकी प्रगति के कारण मौजूदा संकट में मानवीय अस्तित्व की समस्याओं के जवाब देने में धर्म एक सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं और "स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे" को बढ़ावा देने के "पवित्र कार्य" में राजनीतिक संस्थानों के सहयोगी बन सकते हैं।

प्राधिधर्माध्यक्ष बार्थोलोम ने कहा, "इससे पहले हमने कभी भी इतना वैज्ञानिक ज्ञान नहीं पाया और न ही प्रकृति और मनुष्यों के खिलाफ इतनी हिंसक और विनाशकारी कार्रवाई की थी। वैज्ञानिकता और प्रकृति के प्रति सम्मान की कमी, "वैश्वीकरण, मनुष्य की महत्वपूर्ण जरूरतों में विज्ञान और प्रौद्योगिकी की स्वायत्तता" न केवल एकजुटता पर आधारित समाज के लिए एक बड़ा खतरा है, बल्कि सबसे अधिक पृथ्वी में जीवन के अस्तित्व को खतरा है।”

धर्म राजनीति को प्रतिस्थापित नहीं करती

उन्होंने कहा, "धर्म राजनीति को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है और न ही ऐसा करने का लक्ष्य है।" "हालांकि, वे नागरिक और राजनीतिक गतिविधियों को प्रेरित कर सकते हैं, और सामाजिक सामंजस्य बढ़ाने, सृजन की सुरक्षा, सतत विकास और भाइचारे की संस्कृति की स्थापना के लिए जागरूकता बढ़ा सकते हैं। वे लगातार उन समाधानों का प्रस्ताव कर सकते हैं जो युद्ध और हिंसा को अस्वीकार करते हैं, और सहिष्णुता और एकजुटता के बजाय लड़ते हैं। ”

प्रधिधर्माध्यक्ष ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि "धर्मों के बीच शांति के बिना, दुनिया में कोई शांति नहीं है और संवाद के बिना धर्मों के बीच कोई शांति नहीं है। मानव बंधुत्व दस्तावेज़ में "हम उस कम्पास को पाते हैं जो एकजुटता की संस्कृति और सार्वभौमिक शांति की ओर हमारा मार्गदर्शन करती है।"

मानव बंधुत्व दस्तावेज़ में शामिल हैः “विश्वासियों और गैर-विश्वासियों की बीच और भली इच्छा वाले सभी लोगों के बीच सुलह और बंधुत्व, हिंसा और अंध अतिवाद की अस्वीकृति, पूर्व और पश्चिम, उत्तर और दक्षिण के बीच रिश्तेदारी और सहयोग, ईश्वर में विश्वास जो विभाजित दिलों को एकजुट करता है और मानव आत्मा को ऊपर उठाता है।"

अपने संबोधन को अंत करते हुए उन्होंने कहा, “हमारे पास गंतव्य है, हम रास्ता जानते हैं। हमें आगे बढ़ने के लिए अब संयुक्त कार्रवाई और दृढ़ संकल्प की जरूरत है। हम विश्वासियों के लिए, इस प्रयास का मतलब दयावान ईश्वर में अपने विश्वास की सच्ची गवाही देना है।”

05 February 2020, 16:15