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Vatican News
प्रतीकात्मक तस्वीर प्रतीकात्मक तस्वीर  (AFP or licensors)

उत्तरी भारत के पादरियों को 'जबरन धर्मांतरण' के लिए गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश में पादरियों और ख्रीस्तियों को गिरफ्तार किया गया। हरियाणा में एक पादरी को छह लोगों ने पीटा। ईसाई नेता "छोटे ईसाई समुदाय" के लगातार उत्पीड़न की शिकायत कर रहे हैं। "सुदूर-कट्टरपंथी सार्वजनिक व्यवस्था में समस्याएं पैदा करते हैं, लेकिन ईसाइयों को गिरफ्तार किया जाता है।"

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

 हरियाणा, बुधवार 29 जनवरी, 2020 (एशिया न्यूज) : ईसाई धर्म में धर्मांतरण कराने के आरोप में  दो पादरी और एक ईसाई गिरफ्तार किए गए। धर्मांतरण के आरोप में ही 250 हिंदू कट्टरपंथियों से घिरे एक पादरी को पीटा गया और जेल में बंद किया गया। इस तरह की घटनायें उत्तरी भारत में नए साल की शुरुआत से ही हो रही हैं, जो देश में मौजूद असहिष्णुता के माहौल की पुष्टि करता है। भारतीय ईसाइयों की वैश्विक परिषद (जीसीआइसी) के अध्यक्ष साजन के जॉर्ज, ने एशिया न्यूज से "ईसाइयों के उत्पीड़न" की निंदा की।

उत्तर प्रदेश में कल 28 जनवरी को पादरी ओमप्रकाश और पादरी अजय कुमार को जमानत पर रिहा कर दिया गया जिन्हें 25 नवंबर को बलपूर्वक धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। आज एक और ईसाई कपिल देव राम को जमानत मिलेगी। उनकी गिरफ्तारी श्री राम के घर पर हमले के बाद हुई, जहां एक प्रार्थना सभा आयोजित की गई थी।

पड़ोसी राम के कमरे में घुस गए और दोनों पादरियों को पीटना चाहा, परंतु मकान मालिक और उनके बेटे ने बीच-बचाव किया। बाद में ईसाइयों पर धार्मिक समूहों के बीच कलह को बढ़ावा देने और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ जानबूझकर अपराध आदि आरोप लगाये गये।

हरियाणा के एक अन्य पादरी सिंह को बिचपारी गाँव के गिरजाघर से उठाकर वहाँ लिया गया, जहाँ 250-300 हिंदू कट्टरपंथी एकत्रित हुए थे। उन्होंने पादरी सिंह पर जबरन धर्म परिवर्तन का आरोप लगाया। उसे एक क्रिश्चियन स्कूल में ले जाकर छह लोगों ने मिलकर बहुत पीटा और एक टांग तोड़ दी। वे सोनीपत जिले के एक अस्पताल में पैर का इलाज के लिए भर्ती हुए, लेकिन वहाँ के डॉक्टरों ने उन्हें दवा देने से इनकार कर दिया।

साजन के. जॉर्ज ने घोषणा की, “हम हिंसा की निंदा करते हैं। उत्तर प्रदेश में, ईसाई बहत थोड़े अल्पसंख्यक हैं और येसु मसीह की शांति और प्रेम चाहते हैं। फिर भी वे अपने घरों के निजी स्थानों में भी हमले और उत्पीड़न का शिकार होते हैं। कपिल देव राम के मामले में, पड़ोसियों का कहना है कि वे प्रार्थना में इकट्ठा हुए लोगों की भीड़ से परेशान थे, लेकिन यह हास्यास्पद, गलत और निर्मित है। सांप्रदायिक तनाव दिन-प्रतिदिन बढ़ रहा है। सुदूर-कट्टरपंथी सार्वजनिक व्यवस्था में समस्याएं पैदा करते हैं, लेकिन ईसाइयों को गिरफ्तार किया जाता है।

29 January 2020, 16:37