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नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन  (ANSA)

नागरिकता कानून के खिलाफ आयोजित प्रार्थना में हजारों लोग शामिल

12 जनवरी को नागरिकता कानून के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग में एक बहु-विश्वास प्रार्थना समारोह में हजारों लोगों ने भाग लिया पारंपरिक हिंदू शैली "हवन" और सिखों के मंत्र "कीर्तन" थे। “गीता, बाइबिल, कुरान से शास्त्र पढ़े गए।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, सोमवार 13 दिसम्बर 2019 (मैटर्स इंडिया) : 12 जनवरी को दिल्ली के शाहीन बाग में एक बहु-विश्वास प्रार्थना समारोह में भाग लेने के लिए विभिन्न धर्मों के लोग एक साथ आए थे। अंतर-विश्वास समारोह में पारंपरिक हिंदू शैली "हवन" और सिखों के मंत्र "कीर्तन" थे। प्रतिभागियों ने भारतीय संविधान की प्रस्तावना पढ़ी और अपने "समाजवादी, धर्मनिरपेक्ष" मूल्यों को बनाए रखने की शपथ ली।

“गीता, बाइबिल, कुरान से शास्त्र पढ़े गए और गुरुबानी को आयोजित किया गया। तब संविधान की प्रस्तावना भी अलग-अलग धर्मों के लोगों द्वारा पढ़ी गई थी जो इस आंदोलन का समर्थन कर रहे थे। विरोध के आयोजकों में से एक, सैयद तासीर अहमद ने समाचार एजेंसी पीटीआई को बताया।

शाम तक हजारों की भीड़ उमड़ी। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर शाम को विरोध प्रदर्शन को संबोधित करने वालों में से एक थे। उन्होंने कहा कि रविवार और मौसम अपेक्षाकृत अधिक गर्म होने के कारण अधिक लोग विरोध प्रदर्शन में शामिल हो पाये थे।

 अंतर धर्म सद्भाव को बढ़ावा देने के लिए ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारत की आजादी की लड़ाई के दौरान महात्मा गांधी द्वारा "सर्व धर्म समभाव" (सभी धर्मों के लिए समान सम्मान या सभी धर्मों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए) की अवधारणा को लोकप्रिय बनाया गया था।

विवादास्पद नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और एक प्रस्तावित अखिल भारतीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की वापसी के लिए उनके आंदोलन के रूप में, महिलाओं और बच्चों सहित सैकड़ों प्रदर्शनकारी शाहीन बाग में सरिता विहार-कालिंदी कुंज मार्ग पर बैठ गए। 13 जनवरी याने आज उनके प्रदर्शन की एक महीने पूरा हो गया।

गफ्फार मंज़िल के 44 वर्षीय ज़ैनुल आबिदीन ने सीएए को निरस्त करने की मांग को लेकर 16 दिसंबर से भूख हड़ताल शुरू कर दी थी और दो सप्ताह के बाद सरिता विहार के 40 वर्षीय मेहरुनिसा शामिल हो गए थे। उनके अलावा, तीन बुजुर्ग महिलाएं भी डे वन के बाद से विरोध स्थल के मुख्य मंच पर बैठी हुई हैं।

इंडिया गेट की एक प्रतिकृति भी विरोध स्थल के पास लाई गई है। दो दर्जन से अधिक लोगों ने देश भर में सीएए के विरोध प्रदर्शनों के दौरान अपनी जान गंवाई है, उनके नाम प्रतिकृति पर लिखे गए हैं जिनमें असम, कर्नाटक, बिहार जैसे राज्य शामिल हैं और उनमें से अधिकांश उत्तर प्रदेश के हैं।

सीएए और एनआरसी का विरोध करने के लिए लोग शाहीन बाग और पास के जामिया मिलिया इस्लामिया में विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 11 दिसंबर को पारित होने के बाद से ही, विवादास्पद कानून को लेकर दिल्ली के अलावा देश के कई हिस्सों में विरोध प्रदर्शन किये गये और उत्तर प्रदेश सहित कई स्थानों पर झड़पें हुईं, जहां 20 से अधिक लोगों की मौत हो गई।

संशोधित कानून के अनुसार, धार्मिक उत्पीड़न का सामना कर रहे हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई समुदाय के सदस्य जो 31 दिसंबर 2014 तक पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए हैं, उन्हें गैरकानूनी अप्रवासी नहीं माना जाएगा बल्कि भारतीय नागरिकता दी जाएगी। ।

कानून के आलोचकों का कहना है कि,  एनआरसी के साथ-साथ, यह मुसलमानों के खिलाफ भेदभाव करता है और पहली बार धर्म को नागरिकता का मापदंड बनाता है। हालांकि, केंद्र सरकार ने आरोपों को खारिज कर दिया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि कानून का उद्देश्य तीनों पड़ोसी देशों के सताए हुए लोगों को नागरिकता देना है और किसी की नागरिकता लेना नहीं है।

13 January 2020, 15:41