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ओलिनदा के साथ मपूतो के महाधर्माध्यक्ष फ्रांचेस्को किमोइयो ओलिनदा के साथ मपूतो के महाधर्माध्यक्ष फ्रांचेस्को किमोइयो   कहानी

मोजाम्बिक में अनाथ बच्चों की मां

ओलिनदा मुगाबे मोजाम्बिक में रहती हैं। वे "रिएनकोनत्रो" नामक एक संगठन चलाती हैं जो अनाथ एवं कमजोर बच्चों के लिए समर्पित है जिन्होंने एड्स की बीमारी में अपने माता-पिता को खो दिया है। उनके लिए संत पापा की यात्रा, संगठन के कार्य में अधिक ऊर्जा प्रदान करेगी।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

यह 1990 के दशक की घटना है जब ओलिनदा मुगाबे ने मोजाम्बिक देश में एड्स की महामारी के प्रभाव को समझा। वे उस समय एक प्रशिक्षित नर्स थीं तथा उन्हें विकास एवं परिवार सहयोग संगठनों के साथ काम करने का अनुभव भी प्राप्त था। उस समय मोजाम्बिक के लोग बीमारियों से लड़ने के बजाय, नागरिक युद्ध के प्रभाव का सामना करने पर अधिक ध्यान दे रहे थे। अतः एड्स की बीमारी से पीड़ित लोगों के एक दल के साथ ओलिनदा ने एक जागृत अभियान शुरू किया और संगठन की स्थापना की जिसका नाम है "क्वीक्वीमूका" (जागो)। वे मीडिया के साथ भी जुड़े तथा संकट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करने का प्रोत्साहन दिया।     

यह केवल पहला कदम था। ओलिनदा ने तुरन्त दूसरी चुनौती पर पाँव रखा, और वह चुनौती थी अनाथ बच्चों की संख्या में वृद्धि। उन्होंने अपने मित्रों को बुलाया जो उन्हें पसंद करते थे, जो धर्मसमाज में भर्ती होना चाहते थे और उनके साथ मिलकर एक नये संगठन का गठन किया, जिसको "रिएनकोन्त्रो" नाम दिया गया। आज यह गैर-लाभकारी संगठन मपूतो और गाजा प्रांतों में लगभग 10,000 अनाथ बच्चों की मदद करता है जिनके माता-पिता एड्स के शिकार हो चुके हैं। ये प्रांत मोजाम्बिक के दक्षिणी भाग में स्थित है जहाँ बीमारी का प्रभाव सबसे ज्यादा, क्रमशः 22.9% और 24.4% है। 2017 में बीमारी की राष्ट्रीय औसत 13.2 प्रतिशत थी।

रिएनकोनत्रो का अर्थ

"रिएनकोनत्रो" महोतास जिला में है जो मपूतो के दक्षिणी भाग में स्थित है। इसका नाम धन्य मारिया डा पैक्साओ के नाम पर रखा गया है, जो मरिया के फ्राँसिस्कन मिशनरियों के संस्थापक हैं।

"अनाथ एवं कमजोर बच्चों के स्वागत केंद्र" का निर्माण करने वाले, पहले धर्मसमाज के सदस्य थे जिन्होंने संगठन की बड़ी सहायता की।

"रिएनकोनत्रो" के बच्चे नामाचा में संत पापा फ्राँसिस एवं ससम्मान सेवानिवृत संत पापा बेनेडिक्ट 16वें के पोस्टकार्ड के साथ।
"रिएनकोनत्रो" के बच्चे नामाचा में संत पापा फ्राँसिस एवं ससम्मान सेवानिवृत संत पापा बेनेडिक्ट 16वें के पोस्टकार्ड के साथ।

ओलिनदा और उनके अन्य साथी जो धर्मसमाज में प्रवेश करना चाहते थे किन्तु विभिन्न कारणों से अपने स्वप्न को साकार नहीं कर सके, किन्तु फ्राँसिस्कन आध्यात्मिकता एवं दूसरों की सहायता करना उन्हें प्रेरित करता रहा, फलतः उन्होंने ओलिनदा के बुलावे को उत्साह के साथ स्वीकार किया। इस तरह वे उन अनाथ बच्चों की सेवा और साथ देने के द्वारा अपनी आध्यात्मिकता को जीने लगे।

उन्होंने संगठन का नाम "रिएनकोनत्रो" रखा जिसका अर्थ है एक-दूसरे से मुलाकात करना, अनाथ बच्चों के साथ नया संबंध बनाना, प्रेम, उदारता और आपसी सहयोग के मिशन को आगे बढ़ाना। उन्होंने इसे ईश्वर का अनुसरण करने के लिए उनकी ओर से दिया हुआ दूसरा अवसर कहा। हरेक ने अपने पास जो था उससे बच्चों की मदद करने की कोशिश की। किसी ने थाली दिया तो किसी ने मेज, किसी ने कुर्सी दी तो किसी ने पाव भर चावल अथवा चीनी दी। 2002 में संगठन को आधिकारिक रूप से मंजूरी मिली और यहीं से यह बढ़ने लगा।  

अनाथ बच्चों का साथ

मपूतो और गाज़ा क्षेत्र दक्षिणी अफ्रीका की सीमा पर है और यही रिएनकोनत्रो अधिक सक्रिय है। एचआईवी ने परिवारों को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। किसी-किसी बच्चे में एचआईवी पोजेटिव है जो अपने दादा-दादी एवं दूर के रिश्तेदारों के साथ रहते हैं अथवा अकेला रहते हैं।  

यूसाईड या "बच्चों के लिए वैश्विक फंड", क्रोस अंतरराष्ट्रीय आदि संगठन और कई स्थानीय व्यापारी एवं उपकारक रिएनकोनत्रो की सहायता करते हैं। वे उन्हें भोजन, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य एवं कपड़े प्रदान करते हैं। संगठन में धार्मिक शिक्षा के साथ-साथ बच्चों को स्नेह भी दिया जाता है। कई स्वयंसेवक इस संस्था को अपनी सेवा देते हैं। ओलिनदा उन्हें समुदाय में "रिएनकोनत्रो की आँखें" पुकारते हैं।  

ओलिनदा रिएनकोनत्रो के सह-संस्थापकों के साथ
ओलिनदा रिएनकोनत्रो के सह-संस्थापकों के साथ

सराहना का चिन्ह

रिएनकोनत्रो की स्थापना सन् 1998 में हुई थी। पिछले बीस वर्षों में इसकी वृद्धि उस अच्छे लक्ष्य का सबसे अच्छा चिन्ह है जिसे इसने हासिल किया है। सराहना के अन्य चिन्ह मोजाम्बिक की सरकार एवं कलीसिया से आई है। कठिनाइयाँ हैं किन्तु संगठन एक संस्था की ओर आगे बढ़ रहा है। वर्षों से प्राप्त कई सफलताओं का वर्णन करते हुए ओलिन्डा गर्व से मुस्कराती है।   

ओलिनदा ने बतलाया कि एक 19 साल का युवक है। वह एक बेचैन बच्चा था जो अपने माता-पिता के निधन पर बहुत अधिक दुःख सहा। वह अपने दादा-दादी के पास एचआईवी पोजेटिव अन्य भाई-बहनों के साथ रहता था। बाद में वह स्कूल जाना छोड़ दिया तथा बुरी संगति में पड़ गया। रिएनकोनत्रो ने उसे अपनाया और आज वह काम करता तथा पढ़ता है। वह अपने दादा-दादी एवं भाई-बहनों की भी देखभाल करता है। एक-दूसरे लड़के ने कॉलेज की पढ़ाई समाप्त की तथा अब अंग्रेजी का शिक्षक है। कई लोग खुद की एवं अपने परिवार की मदद कर रहे हैं। उन्हें किसी तरह की मदद की आवश्यकता नहीं है। जब कभी संस्था से किसी की शादी होती है तब रिएनकोनत्रों के सभी लोग खुशी मनाते हैं।     

अपने दाद-दादी के साथ अनाथ बच्चे
अपने दाद-दादी के साथ अनाथ बच्चे

जोलुसी योजना

जब से रिएनकोनत्रो की स्थापना हुई है तब से यह एड्स के खिलाफ लड़ाई में युवा अनाथों को शामिल करना चाहता है। इसी से जोलुसी योजना का जन्म हुआ है। वर्ष बीतने के साथ कई युवाओं ने इसमें उत्साह से भाग लिया। अलफ्रेडो कार्लो चैंगाले ने एचआईवी में अपने पिता को खो दिया। वह भी इस योजना में सक्रिय रूप से शामिल है। वह हर दिन सुबह पेय पदार्थ एवं मिठाई बेचने जाता है ताकि वह अपनी माँ एवं भाइयों की सहायता कर सके। वह जोलुसी योजना के अन्य युवाओं के साथ भी मुलाकात करता है।

जोलुसी योजना को बढ़ावा दिये जाने की आवश्यकता है क्योंकि एड्स के डर के बावजूद युवा जोखिम उठाने से नहीं घबराते हैं। ओलिनदा ने कहा, "हमें तब तक लड़ना है जब तक कि लोग इस बात को अपने ऊपर न कर लें कि एचआईवी को नष्ट करना है। हमें अपने व्यवहार को बदलना है। एड्स पीड़ित रोगियों के साथ भेदभाव कम हुआ है। आज इस बीमारी को लोग सामाजिक समस्या मानने लगे हैं जिससे हरेक जन को लड़ना है। व्यवहार में बदलाव लाने एवं सरकार द्वारा गारंटीकृत एंटीरेट्रोवाइरल दवाओं तक आसान पहुंच द्वारा ही चीजें बेहतर हो सकती हैं।

जोलिसी योजना स्वंयसेवक
जोलिसी योजना स्वंयसेवक

 रिएनकोनत्रो जरूरतमंद बच्चों की भी सहायता करता है। इसके लिए वह अंतरराष्ट्रीय बाल निधि के साथ नजदीकी सहयोग से काम करता है।

ओलिनदा एक आशावादी एवं विश्वासी महिला हैं। मोजाम्बिक सरकार एवं सशस्त्र प्रतिरोध आंदोलन रिनामो के बीच हाल में हुए समझौते से वे संतुष्ट हैं। संघर्ष के कारण स्वंयसेवक द्वीप में बच्चों के पास जाने से डरते थे।  

ओलिनदा के अनुसार चक्रवात इदाई एवं केन्नेथ जिसने मार्च और अप्रैल में मोजाम्बिक के मध्य उत्तरी भाग में तबाही लाया, सैंकड़ों लोगों की मौत हो गयी, विडंबना यह है कि इसके सकारात्मक प्रभाव पड़े, लोगों के बीच एकात्मता की भावना बढ़ी। संगठन ने अपनी ओर से उन लोगों के लिए रूपये और समान भेजे, जिन्होंने अपना सब कुछ खो दिया था।

ओलिनदा संत पापा फ्राँसिस की मोजाम्बिक यात्रा का बड़ी बेसब्री से इंतजार कर रही हैं। उनके लिए संत पापा ख्रीस्त के जीवित प्रतीक हैं जो लोगों को अपने आपको दूसरों को देने हेतु प्रोत्साहित करेंगे, बच्चों, बीमारों एवं विकलांग लोगों की सेवा में। ओलिनदा की आशा है कि कम से कम उन्हें संत पापा के कपड़े भर को छूने का अवसर प्राप्त हो जाए, जिस तरह सुसमाचार में रक्तस्राव से पीड़ित महिला ने येसु के कपड़े को छू लिया था।  

संत पापा का उपहार

संत पापा जिस विमान से मोजाम्बिक आ रहे हैं उसमें रिएनकोनत्रों के बच्चों के लिए, स्कूल के समान, खेल उपकरण, कपड़े, खिलौने एवं कुछ आर्थिक मदद भी भेजा गया है जिसको "वाटिकन की महिलाओं" के संगठन ने भेजा है। यह उनके प्रेम और एकात्मता का चिन्ह है।

ओलिनदा एवं उनके सहयोगी यह सोचकर काम करते हैं ताकि बच्चे स्वस्थ और आध्यात्मिक एवं भौतिक चीजों की कमी से मुक्त होकर बढ़ सकें। ओलिनदा कहती हैं कि हमें इसके लिए शक्ति की जरूरत है और वह शक्ति प्रार्थना से आती है।  

फ्लोरा के साथ ओलिनदा, रिएनकोनत्रो की एक नर्स, एक दादी और उसकी अनाथ नतनी।

 

04 September 2019, 15:37