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हिरोसिमा में परमाणु बमबारी की 74वीं वर्षगाँठ हिरोसिमा में परमाणु बमबारी की 74वीं वर्षगाँठ 

हिरोसिमा 2019 शांति घोषणा पत्र

हिरोसिमा के महापौर काजूमी मातसुई ने शहर में परमाणु बम गिराये जाने की 74वीं वर्षगाँठ पर एक घोषणा पत्र जारी किया। उन्होंने लोगों का आह्वान किया कि वे घटना से बचे लोगों की कहानी सुनें तथा परमाणु हथियारों के निषेध हेतु ठोस निर्णय लें।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

हिरोसिमा, बुधवार, 7 अगस्त 2019 (एशियान्यूज)˸ हिरोसिमा में परमाणु बम गिराये जाने की 74वीं वर्षगाठ पर, यादगारी समारोह में शहर के महापौर काजुमी मातसुई ने 6 अगस्त को शांति घोषणा को पढ़कर सुनाया।

शांति घोषणा पत्र

शांति घोषणा पत्र इस प्रकार है, "आज विश्व के चारों ओर हम स्व-केंद्रित राष्ट्रवाद को बढ़ते और अंतरराष्ट्रीय विशिष्टता एवं प्रतिद्वंद्विता से उपजी तनाव, पर परमाणु निरस्त्रीकरण को स्थिर देख रहे हैं। इन वैश्विक घटनाओं से हमें क्या सीख लेनी चाहिए? दो विश्व युद्धों से गुजरने के बाद, हमारे बुजुर्गों ने युद्ध से परे एक आदर्श दुनिया की कल्पना की थी। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की एक प्रणाली का निर्माण करने का बीड़ा उठाया। क्या हमें अब उसे याद नहीं करना चाहिए और मानव अस्तित्व के लिए, उस आदर्श दुनिया के लिए प्रयास नहीं करना चाहिए? इसी मकसद से मैं आप सभी से आग्रह करता हूँ कि 6 अगस्त 1945 में हिबाकुशा ग्रस्त लोगों को सुनें।"

घोषणा पत्र में परमाणु बम गिराये जाने से हुई दर्दनाक स्थिति का जिक्र करते हुए जोर दिया गया है कि "हमें इसे भावी पीढ़ी के लिए फिर कभी होने नहीं देना चाहिए।"

एक व्यक्ति छोटा और कमजोर होता है किन्तु यदि प्रत्येक व्यक्ति शांति की खोज करेगा, तो मैं मानता हूँ कि निश्चय ही हम युद्ध की ओर धकेलने वाली शक्तियों को रोक पायेंगे।

महिला जो उस समय 15 साल की थी। क्या हम उसके विश्वास को एक खाली इच्छा के रूप में समाप्त होने दे सकते हैं?

महात्मा गाँधी

पत्र में भारत का उदाहरण लेते हुए कहा गया है कि "दुनिया की ओर मुड़ते हुए, हम देखते हैं कि व्यक्तियों के पास बहुत कम शक्ति है, लेकिन हम अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अनेक लोगों के संयुक्त ताकत के कई उदाहरण भी देखते हैं। भारत की आजादी इसका एक उदाहरण है। महात्मा गाँधी जिन्होंने आजादी के लिए व्यक्तिगत पीड़ा एवं कष्ट से अपना योगदान दिया, हमारे लिए एक वाक्य छोड़ दिये हैं, "असहिष्णुता अपने आप में एक हिंसा है तथा एक सच्ची लोकतांत्रिक भावना में बढ़ने के लिए बाधक। हमारी वर्तमान परिस्थितियों का सामना करने के लिए, और एक शांतिपूर्ण, स्थायी दुनिया को प्राप्त करने के लिए, हमें स्थिति या राय के अंतरों को पार करना और अपने आदर्श के प्रति सहिष्णुता की भावना से मिलकर प्रयास करना चाहिए।"

उन्होंने कहा है कि दुनिया के नेताओं को सभ्य समाज के आदर्श को आगे बढ़ाने के लिए आगे आना चाहिए। यही कारण है कि मैं उनसे परमाणु-बमबारी वाले शहरों का दौरा करने, हिबाकुशा सुनने और शांति स्मारक संग्रहालय और राष्ट्रीय शांति स्मारक हॉल का दौरा करने का आग्रह करता हूँ जो वास्तव में पीड़ितों और उनके प्रियजनों के जीवन में हुआ था। हम अपने पूर्वज नेताओं की याद करें, जिन्होंने निरस्त्रीकरण के लिए वार्ता के पथ को अपनाया, जब परमाणु महाशक्ति कहे जाने वाले देश तनावपूर्ण हथियारों की दौड़ में आगे बढ़ रहे थे I

स्थायी शांति वाली दुनिया

शांति घोषणा पत्र के अंत में उन्होंने कहा है कि आज परमाणु बमबारी के 74 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित इस शांति स्मृति समारोह में, हम परमाणु बम प्रभावित आत्माओं के लिए प्रार्थना करते तथा पीड़ितों को अपनी हार्दिक सांत्वना प्रदान करते हैं और नागासाकी शहर और दुनिया भर के भले लोगों के साथ हम परमाणु हथियारों के पूर्ण उन्मूलन और उससे परे, वास्तविक, स्थायी शांति वाली दुनिया को प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करने की प्रतिज्ञा करते हैं।

 

07 August 2019, 16:46