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 ईद के अवसर पर घरवालों की याद करते दिल्ली के विद्यार्थी ईद के अवसर पर घरवालों की याद करते दिल्ली के विद्यार्थी  (REUTERS)

कश्मीर के विद्यार्थियों ने दिल्ली में ईद मनाया

ईद के त्योहार को कई लोगों के लिए आँसू, चिंता और घोर मौन के साथ मनाया। कश्मीर के विद्यार्थियों ने घर से दूर दिल्ली के जंतर-मंतर के पास ईद मनाया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, मंगलवार, 13 अगस्त 2019 (मैटर्स इंडिया)˸  ईद का आयोजन दिल्ली में पढ़ रहे कश्मीर के विद्यार्थियों ने किया था जिसमें कश्मीरी और गैर-कश्मीरी दोनों लोगों ने भाग लिया। आयोजकों का कहना था कि उनके परिवार के सदस्य घरों में बंद हैं ऐसे में उनके पास पर्व मनाने के लिए कुछ नहीं है, बस वे कश्मीर के सामान्य स्थिति में आने का समर्थन कर रहे हैं।   

23 वर्षीय जुबैर राशिद जो दिल्ली में नौकरी की तैयारी कर रहे हैं उन्होंने अपने परिवार के लिए एक कविता पेश किया। कविता पढ़ते हुए जुबैर की आँखों में आँसू भर गये। कविता इस प्रकार थी, "चमत्कार होंगे और लाचारी नहीं रह जायेगी, उस दिन मैं आऊँगा और आपका हाथ थाम लूँगा और हम सब एक साथ ईद मनायेंगे।" उन्होंने अपनी कविता में अपने परिवार का जिक्र भी किया है कि उनके पिता कश्मीर पुलिस में हैं माता बीमार हैं एवं एक छोटी बहन है।  

जुबैर ने एनडीटीबी से कहा कि यहाँ वह अपने परिवार से दूर है, कई दिनों से परिवार वालों से बात नहीं हुई है, संचार साधन बंद हैं और वे भावनात्मक रूप से कमजोर हो चुके हैं। "ये आँसू मेरे परिवार को याद करने का हैं। ये कमजोरी के आँसू नहीं हैं। जब मैं सुबह उठा तब मुझ में ईद की कोई खुशी नहीं थी। मैंने हर ईद घर पर मनायी है। यह खुशी का अवसर है किन्तु पिछले पाँच छः दिनों से मैं भावनात्मक रूप से कमजोर हो गया हूँ। वहाँ जो हुआ है उसके कारण मानवता शर्मिंदा है।"     

जामिया मिल्लिया इस्लामिक विश्वविद्यालय से बी.ए की पढ़ाई कर रही 21 वर्षीय मन्नत शुजा ने बतलाया कि वे आठ दिनों से अपनी माँ से बात नहीं कर पायी हैं। उसने कहा, मैंने गत 4 अगस्त को माँ से बात की थी। हर बार की तरह मैं इस बार भी घर जाने और सभी के साथ पर्व मनाने का निश्चय किया था। मुझे पर्व जैसा नहीं लग रहा है। जब मैं उनकी याद करती हूँ तो डर महसूस होता है। समाचारों में कहा जा रहा है कि कई मस्जिदों में नमाज भी नहीं किये जा सके। सड़कें विरान हैं, वह भी भय को बढ़ा देता है।

गैर-कश्मीरियों ने भी उनका समर्थन दिया। कई लोगों ने भोजन लाया और हर्ष मंदर जैसे समाज सेवियों ने खाना परोसने में मदद दी। लेखक अरूणधति रोय और पत्रकार पारानजोय गुहा ठाकुरता भी वहां उपस्थित थे।

ठाकुरता ने कहा, "मैं सोचता हूँ कि सभी गैर-कश्मीरियों के लिए यह महत्वपूर्ण है कि हम कश्मीरी भाई-बहनों को अपना समर्थन दें, चाहे अनुच्छेद 370 के प्रति आपकी जो भी राय हो। पर्व के अवसर पर जो लोग घर नहीं जा पाये हैं उनके साथ जमा होकर सहानुभूति दिखलाना बहुत महत्वपूर्ण है। मैं व्यक्तिगत रूप से कहना चाहता हूँ कि सरकार ने कश्मीर के लिए जो कदम उठायी है उसमें वहाँ के लोगों की भलाई होने वाली नहीं है।

केंद्र सरकार द्वारा राज्य की विशेष स्थिति को रद्द करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के कुछ दिनों बाद, कड़ी सुरक्षा के बीच, संचार माध्यमों के बंद होने के साथ जम्मू-कश्मीर में लोगों ने एक मौन ईद मनाई। 

13 August 2019, 17:01