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शिया मुस्लिमों पर सरकारी प्रतिबंध शिया मुस्लिमों पर सरकारी प्रतिबंध   (AFP or licensors)

कार्डिनल जॉन ने शिया मुस्लिमों पर सरकारी प्रतिबंध की निंदा की

नाइजीरिया में, एक शिया मुस्लिम समूह पर प्रतिबंध तब लगा जब एक अदालत ने फैसला सुनाया कि सरकार इसे "आतंकवादी संगठन" के रूप में वर्गीकृत कर सकती है। अबूजा के कार्डिनल ओनाईकेन ने कहा कि यह सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों के लिए खतरनाक मिसाल है।

माग्रेट सुनीता मिंज-वाटिकन सिटी

नाइजीरिया, बुधवार 30 जुलाई 2019 (वाटिकन न्यूज) : उत्तरपूर्वी नाइजीरिया में बोको हराम आतंकवादी संगठन का इस सप्ताह दसवां साल शुरु हुआ। संगठन द्वारा आत्मघाती बम विस्फोटों और सामूहिक अपहरण में दसियों हज़ार लोगों की मौत हुई और कई हजार लोगों को देश के अंदर और पड़ोसी देशों में विस्थापन होना पड़ा।

सरकार ने नाइजीरिया इस्लामिक मूवमेंट (आइएमएन) पर प्रतिबंध की घोषणा की, साथ ही एक शिया मुस्लिम समूह पर "आतंकवादी गतिविधियों को चलाने, सैनिकों पर हमला करने, पुलिसकर्मियों की हत्या करने, सार्वजनिक संपत्ति को नष्ट करने और राज्य प्राधिकरण को लगातार नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया।

वाटिकन रेडियो से बातें करते हुए, अबूजा के कार्डिनल जॉन ओनाईकेन ने बताया कि सरकारी कार्रवाई केवल अन्यायपूर्ण नहीं है, यह एक ऐसा कदम है जो देश में धार्मिक स्वतंत्रता के लिए एक चिंताजनक मिसाल कायम करता है।

उन्होंने कहा, "देश में कोई भी अल्पसंख्यक सुरक्षित नहीं है। आज शिया मुसलमानों का यह हाल है, कल हम काथलिकों के लिए भी हो सकता है।"

कार्डिनल ओनाईकेन ने बताया कि हाल ही में नाइजीरिया में सरकार के लिए, शिया मुसलमानों का मुद्दा एक सवाल बन गया है।

उन्होंने कहा कि आईएमएन अनुयायी अपने नेता, इब्राहिम ज़कज़की की रिहाई की मांग के लिए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, जो पिछले चार वर्षों से जेल में बंद हैं। विभिन्न अदालतों ने आदेश दिया है कि उन्हें रिहा कर दिया जाए, परंतु सरकार ने अदालतों के आदेश को मानने से इनकार कर दिया है।

कार्डिनल ओनाईकेन ने कहा, नाइजीरिया में सुन्नी मुसलमानों का बहुमत है। वे शिया लोगों को मुस्लिम नहीं मानते हैं और इस वजह से सरकार उन्हें गंभीर रुप से प्रताड़ना देती है।"

विरोध प्रदर्शन

उन्होंने कहा कि शिया मुस्लिम अबूजा की गलियों में लगभग एक महीने से रोजाना विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। "मैने उन्हें शांतिपूर्ण तरीके से विरोध प्रदर्शन करते देखा और उन्हें कभी सशस्त्र नहीं देखा।" फिर भी, सरकारी सैनिकों और पुलिस ने उन पर हथियारों, रबर की गोलियों और आंसू-गैस के कनस्तरों से हमला किया है।

स्थानीय समाचार में कहा गया कि प्रदर्शनों के दौरान पिछले सप्ताह समूह के कम से कम 20 सदस्य मारे गए।

काथलिकों की चिंता

कार्डिनल ने कहा, हम सभी सरकार के रवैये से चिंतित हैं "यदि सरकार एक धार्मिक समूह को गैर-कानूनी घोषित करने के लिए प्रभावित कर सकती है, तो कोई भी सुरक्षित नहीं है। आज यह शिया है, कल हम काथलिक भी हो सकते हैं।"

उन्होंने कहा कि अभी तक काथलिक कलीसिया द्वारा इस स्थिति पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी गई है। उन्हें उम्मीद है कि यह जल्द ही आएगा। "व्यक्तिगत रूप से मेरा मानना है कि हम चुप नहीं रह सकते हैं और इस तरह के कृत्यों को जारी रखने की अनुमति नहीं देते हैं"।

कार्डिनल ने कहा, "अगर शियाओं ने कानून को तोड़ा है तो वे सजा के हकदार हैं परंतु गैर-कानूनी घोषित करना उनपर ज्यादती करना है।”  

31 July 2019, 15:28