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चिंतनशील सामुदायिक जीवन का आनन्द ˸ ट्राइसोमी 21 (डाऊन सिन्ड्रोम) के साथ धर्मबहनें चिंतनशील सामुदायिक जीवन का आनन्द ˸ ट्राइसोमी 21 (डाऊन सिन्ड्रोम) के साथ धर्मबहनें  कहानी

मेमना की शिष्य छोटी धर्मबहनें

मेमना की शिष्य छोटी धर्मबहनें जो फ्राँस के केंद्र में रहती हैं यह विश्व का पहला चिंतनशील धर्मसंघ है जो समर्पित जीवन के लिए डाऊन सिन्ड्रोम से प्रभावित लोगों का स्वागत करता है।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

ये धर्मबहनें संत बेनेडिक्ट एवं लिसियुक्स की संत तेरेसा के संरक्षण में रहती हैं। धर्मसमाज की स्थापना दो मित्रों, लाईन एवं वेरोनिक के द्वारा 80 के दशक में हुई थी। लाईन आध्यात्मिकता की खोज में, अपनी बुलाहट को दीन दुःखियों की सेवा में जीना चाहती थी और उनकी सहेली वेरोनिक एक डाऊन सिन्ड्रोम युवती थी जो अपना जीवन प्रभु के लिए समर्पित करना चाहती थी।

सिस्टर लाईन ने कहा, "मैंने कई समुदायों का दौरा किया जहाँ दिव्यांग लोगों का स्वागत किया जाता है किन्तु मैंने पाया कि इन समुदायों में उनके लिए कोई जगह नहीं होती क्योंकि वे उनके योग्य नहीं होतीं।" सिस्टर लाईन बाद में मेमने की शिष्य छोटी धर्मबहनों के धर्मसमाज की सुपीरियर जेनेरल बनी। उन्होंने कहा, "मेरी मुलाकात युवा वेरोनिक से हुई जो डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित थीं जिन्होंने मुझे एक नई शुरूआत की प्रेरणा दी। मुझे लगा कि क्यों न उसे अपनी बुलाहट को पहचानने में मदद दिया जाए।"

वेरोनिक ने प्रभु की सेवा करने के बुलावे को सुना था किन्तु डाऊन सिन्ड्रोम के कारण सभी समुदायों में उसे तिरस्कार का सामना करना पड़ा था। वास्तव में, कलीसियाई कानून और मठवास के नियम अनुसार मानसिक रूप से अक्षम लोगों को धर्मसमाजी जीवन में प्रवेश की अनुमति नहीं है। लाईन और वेरोनिक ने इस खास धर्मसमाजी समुदाय को पहचान दिलाने के लिए 14 वर्षों तक इंतजार किया। जिसकी अपनी मूल जीवन शैली है।

सिस्टर वेरोनिक एवं मदर लाईन, समुदाय की प्रथम को सदस्य
सिस्टर वेरोनिक एवं मदर लाईन, समुदाय की प्रथम को सदस्य

कलीसिया की ओर से प्रगतिशील मान्यता

लाईन और वेरोनिक ने सन् 1985 में एक सार्वजनिक आवास के छोटे कमरे में समुदाय की शुरूआत की। बाद में उनके साथ डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित अन्य लड़कियाँ भी शामिल हुईं। सन् 1990 में उन्होंने टूर्स के महाधर्माध्यक्ष एवं भावी कार्डिनल मोन्सिन्योर जॉ होनोरे (1920-2013) से समुदाय की मान्यता हेतु आवेदन किया। शुरू में उन्होंने सिर्फ एक लोकधर्मी सार्वजनिक संगठन के रूप में इसकी मान्यता की मांग की। कार्डिनल होनोरे ने रोम में उनके आग्रह को समर्थन दिया, जिसके कारण प्रथम समुदाय को मान्यता मिल गयी।     

सन् 1995 में धर्मबहनों की संख्या में वृद्धि के कारण उन्हें छोटी कोठरी से हटना पड़ा और वे बर्गस धर्मप्रांत के ले ब्लांक शहर में रहने लगीं। मध्य फ्रांस के महाधर्माध्यक्ष रियेर प्लातू (1924-2018) ने उनका हार्दिक स्वागत किया और उनकी मदद से वे रोम में चिंतनशील धर्मसंघी संस्था का दर्जा प्राप्त करने हेतु आगे बढ़ पायीं। चिंतनशील धर्मसंघी समुदाय की मान्यता उन्हें सन् 1999 ई. में प्राप्त हुई है। धर्माध्यक्ष प्लातू उनके समुदाय के लिए सचमुच एक पिता के समान थे। मदर लाईन ने बतलाया कि वे डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित लोगों के अधिक निकट थे। धर्मबहनों ने धीरे-धीरे विकास करते हुए मठ एवं प्रार्थनालय का निर्माण किया। 2011 में महाधर्माध्यक्ष अर्मंड मेईलार्ड की सहायता से उन्हें पूर्ण मान्यता मिली।  

सामान्य एवं डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित धर्मबहनों का सामुदायिक जीवन

मेमने की शिष्य छोटी धर्मबहनों के धर्मसमाज में धर्मबहनों की कुल संख्या 10 है जिनमें से दो सामान्य शरीर वाली धर्मबहनें हैं और 8 डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित धर्मबहनें हैं। समुदाय कमजोर है और उम्मीद है कि अधिक सामान्य धर्मबहनें इसमें प्रवेश करेंगी क्योंकि डाऊन सिन्ड्रोम धर्मबहनों को दैनिक जीवन में सहायता की अवश्यकता पड़ती है।  

वास्तव में, वे स्वावलम्बी हैं चूँकि चिंतनशील जीवन उन्हें एक नियमित गति में जीने का अवसर देता है। डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित लोगों के लिए यह एक बड़ा परिवर्तन है जो कठिन है किन्तु जब जीवन नियमित हो जाता है तब वे अच्छी तरह रह सकती हैं, मदर लाईन ने कहा।

दैनिक जीवन, दिनचर्या के कार्यों में बीतता है। हर मंगलवार को प्रार्थनालय में ख्रीस्तयाग अर्पित की जाती है और इसके साथ-साथ बुनाई एवं मिट्टी के बर्तन तैयार किये जाते हैं। हाल ही में औषधियों के पौधों से बनी एक वाटिका का निर्माण भी किया गया है। अंततः उनका असामान्य बुलाहट उनके सामान्य जीवन में प्रकट होता है। सेवा करने की दीनता में प्रकट होता है जिसको वे लिसियु की संत तेरेसा के पद चिन्हों पर चलकर अभ्यास करती हैं। उनकी आध्यात्मिकता उनके लिए महान प्रेरणा का स्रोत है।

सिस्टर वेरोनिक ने कहा, "मैंने येसु के बुलावे को सुना, जिसका अब 34 वर्ष गुजर चुके हैं। मैं येसु को बाईबल पढ़ने के द्वारा जानने का प्रयास करती हूँ। मैं डाऊम सिन्ड्रोम के साथ पैदा हुई थी। मैं खुश हूँ और अपने जीवन से प्रेम करती हूँ। मैं प्रार्थना करती हूँ किन्तु डाऊम सिन्ड्रोम से प्रभावित बच्चों के लिए दुःखी हूँ वे जीवन के इस उत्साह को महसूस नहीं कर पायेंगे। वे जो संत तेरेसा के समान जीवन जीने, प्रेम करने की बुलाहट, के लिए बुलाये गये महसूस करते हैं उनकी यात्रा लम्बी है किन्तु धीरज एवं विश्वास ने उन्हें अच्छा फल प्रदान किया है। "येसु मुझे प्यार में बढ़ाते हैं, समुदायों द्वारा तिरस्कृत होने के बाद, मैं 20 जून 2009 को अत्यन्त खुश थी। उस दिन मैंने मेमना की शिष्य छोटी धर्मबहनों के धर्मसमाज में आजीवन व्रत लिया। यह मेरे लिए येसु की दुल्हिन होने की सबसे बड़ी खुशी थी" वेरोनिक ने कहा।      

प्रेम प्रकट हो

छोटी धर्मबहनों ने कहा कि उस समय जब धर्मसमाज का कोई दिशा निर्देश नहीं था, जीवन अर्थहीन लग रहा था। हमारा समुदाय ईश्वर के प्रति समर्पित जीवन के साधारण साक्ष्य द्वारा, जीवन एवं मानव व्यक्ति के पवित्र अध्याय को पुष्ट करना चाहता है।  

यह आश्वस्त करते हुए कि डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित युवा नारियों के हृदय में निहित प्रेम की शक्ति, प्रभु को समर्पित जीवन में पूर्ण रूप से व्यक्त होता है, छोटी धर्मबहनें, मन के दीन एवं भक्ति से प्रेरित युवतियों को आत्मजाँच करने का निमंत्रण देती है, ताकि वे उनके साथ प्रभु की सेवा आजीवन कर सकें।

अन्य युवतियों की तरह डाऊन सिन्ड्रोम से प्रभावित युवतियों को भी बुलाहट में आत्म-परख करने का समय दिया जाता है। यदि वे प्रभु द्वारा बुलाई गयी महसूस करती हैं तो वे आगे बढ़ती हैं अन्यथा घर लौट जाती हैं। यह दूसरी बुलाहटों के समान ही है। मदर ने कहा कि यदि सच्ची बुलाहट नहीं है तो हम उससे भी अच्छी तरह समझती हैं।

सिस्टर मोरगेन धर्मसंघी पोषाक धारण करती हुई
सिस्टर मोरगेन धर्मसंघी पोषाक धारण करती हुई

येसु के साथ सामान्य मित्रता की कृपा

मदर लाईन डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित धर्मबहनों में गहरी आध्यात्मिक शक्ति महसूस करती हैं। वे कहती हैं कि "उन्हें बाईबल का ज्ञान है, वे संतों के जीवन से परिचित हैं और उनमें याद शक्ति तेज होती है। वे प्रार्थना के व्यक्ति होते हैं, आध्यात्मिक एवं येसु के अति करीब होते हैं।" वे उनकी सादगी में इस समय के नबी का चिन्ह देखती हैं। वे कहती हैं कि उनका हृदय अक्षम नहीं है बल्कि वे प्रभु के अधिक करीब हैं, वे उनके साथ अधिक आसानी से सम्पर्क कर सकती हैं। समुदाय की सामान्य धर्मबहनें उनकी क्षमाशीलता की विशेष सराहना करती हैं। वे धर्मबहनों को प्रोत्साहन देने के लिए बाईबल से सटीक शब्दों का प्रयोग करती हैं जो दिन को अर्थपूर्ण बनाता है।   

2013 में इस समुदाय को 26 वर्षीय धर्मबहन रोस-क्लेर के निधन का सामना करना पड़ा जो संत तेरेसा से बहुत अधिक प्रेम करती थी। मदर लाईन बतलाती हैं कि उन्हें डाऊन सिन्ड्रोम से प्रभावित धर्मबहनों के भावनात्मक संवेदनशीलता का भय था किन्तु उन्होंने इस घटना को शांतचित्तता के साथ स्वीकार किया एवं सब कुछ को ईश्वर की नजरों से देखा। उन्होंने कहा, "दूसरे दिन जब मैं उनके कमरों में उनसे मिलने गयी तो पहली धर्मबहन ने कहा, "यह स्वर्ग की इच्छा थी।" दूसरी धर्मबहन ने प्रोत्साहन देते हुए कहा, "हमें संभल जाना चाहिए। हममें विश्वास है।"  

इस समुदाय के अदभुत अनुभव में स्वर्ग की चाह का प्रत्युत्तर परिलक्षित होता है, साथ ही साथ, आधुनिक विश्व के लिए मानवविज्ञान की चुनौती, दक्षता और उत्पादकता की मांग, जिसमें डाऊन सिन्ड्रोम से प्रभावित लोगों को मौन रखा जाता है। डाऊन सिन्ड्रोम होने के बावजूद वे प्रेम करने की क्षमता और विश्वास के वरदान एवं प्रभु के साथ नजदीकी द्वारा उम्मीद से ज्यादा फल ला सकते हैं। मदर लाईन ने कहा कि इस जगत की खोज की जानी चाहिए। वे समाज को आनन्द प्रदान करते हैं सबसे बढ़कर वे दुनिया में प्यार फैलाते हैं जिसकी जरूरत दुनिया को बहुत अधिक है।

मेमने की शिष्य तीन छोटी धर्मबहनें- मेरी अंजे, कमिल और जेरालदिन
मेमने की शिष्य तीन छोटी धर्मबहनें- मेरी अंजे, कमिल और जेरालदिन

धर्मसमाजी बनें और डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित धर्मबहनों के साथ अपना जीवन प्रभु को अर्पित करें। यह छोटे और कमजोर लोगों के लिए अपना जीवन अर्पित करने हेतु बुलावे को सुनना है एवं सुसमाचारी जीवन का साक्ष्य है। आइये और देखिये कि क्या आपको प्रभु बुला रहे हैं। वे डाऊन सिन्ड्रोम प्रभावित धर्मबहनों के साथ समर्पित होने के लिए अपनी कृपा एवं आनन्द प्रदान करते हैं। 

 

"हमारी नजरों और संत पापा जॉन पौल द्वितीय के शब्दों में, इसका अर्थ है इस दुनिया से डरो मत, जिसमें व्यक्ति-व्यक्ति से डरता है। अपने स्वभाव की कमजोरियों एवं अक्षम या बीमारी की स्थितियों से मत घबराओ। इसका मतलब है जीवन की सुन्दरता एवं महानता को इसकी पीड़ा के रहस्य के साथ दृढ़ करना।"  

येसु का अनुसरण करने और हमारी छोटी धर्मबहनों के साथ समर्पित जीवन जीने से नहीं डरें जो निश्चय ही कमजोर हैं किन्तु शक्तिहीन नहीं। इसके विपरीत वे हृदय से बहुत अधिक मजबूत हैं।

दुनिया की नजरों में एक उदार बुलाहट के साक्षी बनने से नहीं डरें, जो दूसरों की ओर उन्मुख है। जो विकलांगों के परे जाता, जिन्हें बहुधा हाशिये पर रखा जाता है और पूर्ण मानवीय दृष्टिकोण को खोलने में सक्षम है।

मेमना की शिष्य छोटी धर्मबहनें, विडीयो

 

03 July 2019, 15:14