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ट्रिपल तलाक बिल संसद में हुआ पारित ट्रिपल तलाक बिल संसद में हुआ पारित  (ANSA)

लैंगिग न्याय के लिये तीन तलाक़ बिल ज़रूरी, मंत्री

भारत के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को संसद में कहा था कि लैंगिग न्याय और समानता के लिये तीन तलाक विधेयक की नितान्त आवश्यकता है। विपक्ष की आपत्तियों के बीच लोकसभा में गुरुवार को तीन तलाक बिल पारित हो गया।

जूलयट जेनेवीव क्रिस्टफर-वाटिकन सिटी

नई दिल्ली, शुक्रवार, 26 जुलाई 2019 (ऊका समाचार): भारत के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को संसद में कहा था कि लैंगिग न्याय और समानता के लिये तीन तलाक विधेयक की नितान्त आवश्यकता है।

विपक्ष की आपत्तियों के बीच लोकसभा में गुरुवार को तीन तलाक बिल पारित हो गया। तीन तलाक़ बिल में एक साथ तीन बार तलाक़ (तलाक़-ए-बिद्दत) बोलकर दिए जाने वाले, तलाक को, अपराध करार दिये जाने की सिराफिश की गई है जिसके तहत दोषी पति को तीन साल तक की क़ैद भी हो सकती है।

लैंगिग न्याय और समानता

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने गुरुवार को लोकसभा में बिल को पेश करते हुए कहा था कि यह विधेयक लैंगिक न्याय और समानता के मद्देनज़र पेश किया जा रहा था।

सुप्रीम कोर्ट के 2017 के उस फैसले का उन्होंने हवाला दिया जिसमें कोर्ट ने तीन बार तलाक के उच्चार को मनमाना और असंवैधानिक बताकर ग़ैरकानूनी प्रथा ठहराया था।  उन्होंने मुस्लिम वूमेन (प्रोटेक्शन ऑफ़ राइट्स ऑन मैरिज) विधेयक 2019 को कानून में परिणत करने का आग्रह किया।

इस बात की ओर उन्होंने ध्यान आकर्षित कराया कि केवल तलाक़-ए-बिद्दत बोल देने पर महिलाओं को तलाक दिया जा रहा था जो अन्यायपूर्ण है।

भारत धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र

मंत्री प्रसाद ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने ध्यान आकर्षित कराया था कि पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, जॉर्डन, मिस्र और ट्यूनीशिया सहित 20 इस्लामिक देशों ने ट्रिपल तालक को ग़ैरकानूनी करार दिया है। उन्होंने प्रश्न किया कि यदि उक्त देश ऐसा कर सकते हैं तो भारत जो कि एक धर्मनिर्पेक्ष राष्ट्र है क्यों ऐसा नहीं कर सकता?

मंत्री महोदय ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के बाद 24 जुलाई 2019 तक तीन तलाक़ के 345 मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि जिन मुद्दों पर प्रस्तावित क़ानून के दुरुपयोग की आशंका है, वे सही नहीं है।

विपक्ष की आपत्तियों के बावजूद गुरुवार को लोकसभा में तीन तलाक़ बिल पास हो गया और अब इसे राज्यसभा में पेश किया जाएगा।

26 July 2019, 12:34