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ओरियंटल कलीसिया के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के कार्डिनल लेओनार्दो सांद्री ओरियंटल कलीसिया के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के कार्डिनल लेओनार्दो सांद्री  

फ्राँसिस एवं सुल्तान की मुलाकात की जयन्ती, संत पापा के विशेष दूत

संत पापा फ्राँसिस ने संत फ्राँसिस असीसी एवं सुलतान अल कामिल की मुलाकात की 8वीं शतवर्षीय जयन्ती के अवसर पर समारोही ख्रीस्तयाग अर्पित करने हेतु ओरियंटल कलीसिया के लिए गठित परमधर्मपीठीय धर्मसंघ के कार्डिनल लेओनार्दो सांद्री को अपना विशेष दूत नियुक्त किया।

उषा मनोरमा तिरकी-वाटिकन सिटी

8वीं शतवर्षीय जयन्ती समारोह 1-3 मार्च 2019 को मिस्र में मनाया जाएगा।

सन् 1219 में संत फ्राँसिस ने अपने कुछ भाइयों को लेकर युद्ध क्षेत्र में भूमध्य सागर के पार एक खतरनाक यात्रा की थी। नील नदी के तट पर पहुँचकर दोनों ओर के युद्ध से हताहतों की भयावह दृश्य देखकर फ्रांसिस को बहुत दुःख हुआ था। उन्होंने वहाँ प्रार्थना एवं चिंतन में समय व्यतीत करते हुए विचार किया कि क्या किया जा सकता है। उसके बाद उसने युद्ध के खिलाफ जोरदार उपदेश देना शुरू किया था। वे लोगों को मना करने और आपदा का सामना करने की धमकी देने लगे, लेकिन उसके साथ दुष्टता का व्यवहार किया गया। ईसाई सैनिकों ने नंगे पांव वाले एक छोटे पवित्र व्यक्ति को धर्म विरोधी कहा। इसके बावजूद संत फ्राँसिस युद्ध का विरोध करते रहे फिर भी इस प्रयास को कोई लाभ नहीं हुआ।

अंततः उन्होंने शिविर में मुसलमानों से मुलाकात करने का निश्चय किया। फ्राँसिस जोखिम को समझते थे। इसके लिए उन्हें मौत का शिकार होना अथवा बंदी बनाया जा सकता था।

फ्राँसिस सैनिकों की भाषा नहीं जानते थे, अतः उन्होंने सुल्तान, सुल्तान चिल्लाया। सैनिकों ने उन्हें पकड़कर सुल्तान की छावनी में लिया। उस समय सुल्तान अल कामिल की उम्र 39 थी और फ्राँसिस 38 साल के थे।

फ्राँसिस अल कामिल के सामने खड़े हो गये। सुल्तान ने नंगे पैर वाले, फटे पुराने कपड़ों में भिक्षुओं को देखा। सुल्तान ने सोचा कि फ्रैंक्स ने अपने नवीनतम शांति प्रस्ताव के जवाब के साथ उन्हें अपने पास भेज दिया है। युद्ध से थके सुल्तान, एक ऐसा सौदा चाहते थे जिसके द्वारा दमियता के बंदरगाह में ईसाइयों की घेराबंदी समाप्त हो, जहां उनके लोग बीमारी और भुखमरी से मर रहे थे।

संत फ्राँसिस ने सुल्तान का अभिवादन किया, "प्रभु आपको शांति प्रदान करे।" इस अभिवादन ने सुल्तान को अचंभित कर दिया। उसने फ्राँसिस के अभिवादन एवं मुसलमानों के अभिवादन में समानता देखी।  फ्राँसिस ने कहा कि हम प्रभु येसु ख्रीस्त के अग्रदूत हैं।

28 February 2019, 16:08